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Magazine January 2019

‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ (PCA-Prompt Corrective Action) âेमवर्क कमजोर एवं समस्याग्रस्त बैंकों के आकलन, निगरानी एवं नियंत्रण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई एक नियामकीय व्यवस्था है। इसके तहत तीन ट्रिगर बिंदु निर्धारित किए गए हैं-

  1. पूंजी से जोखिम भारित संपत्ति अनुपात (CRAR-Capital to Risk Weighted Assets Ratio)
  2. शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA-Non Performing Assets)
  3. संपत्ति पर प्राप्ति (RoA-Return on Assets)

इन बिंदुओं पर असफल रहने वाले बैंकों पर रिजर्व बैंक कुछ विवेकाधीन कार्रवाइयों की शुरुआत कर सकता है, जिसमें बैंकों के ऋण देने और नई शाखाओं को खोलने पर रोक शामिल है। पीसीए (PCA)  फ्रेमवर्क केवल वाणिज्यिक बैंकों के लिए लागू है इसे सहकारी बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), वित्तीय बाजार अवसंरचनाओं (FMIs) पर विस्तारित नहीं किया गया है।

पीसीए के अंतर्गत 11 वाणिज्यिक बैंक ला दिए गए हैं। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के त्यागपत्र के बाद एक आमधारणा यह बनी कि सरकार पीसीए जैसे नियामकीय कार्रवाईयों पर रोक लगाकर रिजर्व बैंक की स्वायत्तता को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है, यद्यपि कि श्री पटेल ने कहा है कि उन्होंने निजी कारणों से त्याग-पत्र दिया है। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 1 जनवरी, 2019 को अपने साक्षात्कार में भी इस बात का उल्लेख किया। इस अंक के आवरण आलेख में केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता संकट पर विमर्श प्रस्तुत किया गया है।

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सत्ता-विरोधी रुझान (Anti-Incumbency) एक लंबे समय से भारतीय राजनीति के अनिवार्य एवं स्थापित नियम के रूप में रहा है, लेकिन यह नियम बदलता हुआ तब प्रतीत हुआ जब वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा केंद्र की सत्ता में आई। इसके बाद होने वाले राज्यों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी एक के बाद एक फतह हासिल कर कांग्रेस मुक्त भारत के अपने सपने की ओर बढ़ चली। इस पर विराम तब लगा जब हालिया संपन्न 5 राज्यों के चुनाव में किसी में भी भारतीय जनता पार्टी वापसी नहीं कर सकी। तेलंगाना एवं मिजोरम में राष्ट्रीय पार्टियां कहीं नहीं थीं किंतु छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में मुकाबला दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों के बीच ही था।

तीनों हिंदी हृदय स्थल वाले राज्यों में जिस प्रकार कड़े मुकाबले में कांग्रेस 3-0 से विजयी रही, उसने प्रधानमंत्री मोदी को कांग्रेस मुक्त भारत की परिभाषा बदल देने के लिए विवश कर दिया है। 1 जनवरी, 2019 को दिए गए अपने साक्षात्कार में प्रधानमंत्री ने कहा है कि कांग्रेस मुक्त भारत का उनका नारा राजनीतिक रूप से मुख्य विपक्षी दल को समाप्त करने का नहीं बल्कि देश को कांग्रेस-संस्कृति से छुटकारा दिलाने के लिए है। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव पर सामयिक आलेख इस अंक में प्रस्तुत किया गया है। यह गुरुनानक देव जी का ही करिश्मा है कि, जहां सीमाओं पर बंकर बनते रहे हैं वहां पहली बार गलियारा बनाया जाएगा।

जिस प्रकार गुरुनानक देव की मृत्यु के बाद उनके अनुयायी सिख एवं मुस्लिम दोनों ही थे और उन्होंने उनकी कब्र और मजार दोनों ही स्थापित कर समन्वय का परिचय दिया था, उसी प्रकार दोनों ही देशों में गलियारे के निर्माण पर सहमति भी तुरत-फुरत बन गई। मजे की बात है कि पाकिस्तान ने यह कहा कि करतारपुर साहिब गलियारे को खोलने का फैसला संघर्ष से सहयोग, दुश्मनी से दोस्ती और शत्रुता से शांति की दिशा में आगे की ओर उठाया गया कदम हो सकता है। करतारपुर गलियारा निर्माण पर आलेख इस अंक में प्रस्तुत किया गया है। G-20 शिखर सम्मेलन पर भी सामयिक आलेख प्रस्तुत है, जिसमें विभिन्न नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय वार्ताओं का ब्योरा भी प्रस्तुत है।

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सभी पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर वर्ष 2019 का कैलेण्डर पत्रिका के साथ प्रदान किया जा रहा है। अन्य सभी स्थायी स्तंभों के साथ इस अंक में मुख्य परीक्षा पर विशेष सामग्री प्रस्तुत की जा रही है। पाठकों से अनुरोध है, इस पर अपनी प्रतिक्रिया संप्रेषित करें।