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मासिक पत्रिका अप्रैल-मई,2019 पी.डी.एफ. डाउनलोड

Magazine April-May 2019

भारतीय निर्वाचन आयोग विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए सर्वाधिक अहम है। 25 जनवरी, 1950 को अनुच्छेद 324 के अंतर्गत स्थापित भारतीय निर्वाचन आयोग ने देश में लोकतंत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 10 मार्च, 2019 को लोक सभा निर्वाचन, 2019 तथा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा एवं सिक्किम विधानसभा निर्वाचन की उद्घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा कर दी गई है। 16वीं लोक सभा का 5 वर्षीय कार्यकाल 3 जून, 2019 को समाप्त हो रहा है। अतः इस तिथि से पूर्व 17वीं लोक सभा का गठन कर दिया जाना अनिवार्य है। इसी संवैधानिक अनिवार्यता के चलते कुल 7 चरणों (11 अप्रैल से 19 मई, 2019) में चुनाव संपन्न कराने की घोषणा की गई है। सभी नागरिक जो 1 जनवरी, 2019 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, इस चुनाव में मतदान का अधिकार रखते हैं।

1 जनवरी, 2019 तक संशोधित मतदाता रजिस्टर के अनुसार, देश में कुल 90 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 1.5 करोड़ मतदाता 18-19 आयु वर्ग के हैं। भारतीय निर्वाचन आयोग ने इस बार यह फैसला किया है कि प्रत्येक मतदेय स्थल पर VVPAT युक्त मतदान मशीनें होंगी। इस बार भारतीय निर्वाचन कितना विशालकाय होगा इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 7 राष्ट्रीय दल, 64 राज्यदल तथा 2354 रजिस्ट्रीकृत अमान्यता प्राप्त दल भाग ले रहे हैं।

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मतदान शुचिता किसी भी लोकतंत्र का अनिवार्य भाग है। कुछ लोगों का यह मानना है कि मतदान की शुचिता के लिए बैलेट पेपर आधारित चुनाव प्रणाली लागू करनी पड़े तो करनी चाहिए, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की शुचिता के प्रति संदेह व्यक्त किया गया है। दूसरी ओर ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो यह मानते हैं कि EVM पर संदेह का कोई कारण नहीं है और बैलेट पेपर आधारित चुनाव देश को बैलगाड़ी युग में पहुंचाने जैसा अदूरदर्शी कदम होगा। इस पर याचिकाएं भी दायर की गईं।

फिलवक्त शीर्ष न्यायालय का फैसला यही है कि मतदान EVM द्वारा ही होगा, बस इन्हें VVPAT युक्त होने की अनिवार्यता होगी। भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव की उद्घोषणा जारी कर दी है। अतः इस अंक के आवरण आलेख में हमने इससे संबंधित जानकारियों का वर्णन किया है। अगला अंक चुनाव के परिणामों पर केंद्रित हेागा।

27 मार्च, 2019 को मध्याह्न समस्त देशवासी तब हर्षातिरेक और सुखद आश्चर्य से परिपूरित हो उठे जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में मिशन शक्ति की सफलता के बारे में जानकारी दी। ‘मिशन शक्ति’ उपग्रहरोधी मिसाइल के निर्माण हेतु रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा संचालित अभियान है। इसी मिशन के तहत भारत ने 27 मार्च, 2019 को 283 किमी. की ऊंचाई पर पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थित अपने ही एक सक्रिय उपग्रह माइक्रोसैट-आर को ध्वस्त कर उपग्रह भेदी मिसाइल परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। भारत ऐसी सफलता हासिल करने वाला विश्व का चौथा देश (अमेरिका, रूस, चीन के बाद) बना। मिशन शक्ति के सफल परीक्षण के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने यह चिंता अभिव्यक्त की थी कि उपग्रहरोधी मिसाइल से ध्वस्त उपग्रह के 300 से 400 टुकड़े फैले, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए खतरा हो सकते हैं।

इसके जवाब में DRDO प्रमुख सतीश रेड्डी ने कहा है कि 13 मी. ऊंचा 3 चरणीय ASAT प्रक्षेपास्त्र (2 चरणों में ठोस प्रणोदक रॉकेट एवं एक चरण में मारक वाहन-Kill  Vehicle) की निर्देशन एवं नियंत्रण प्रणाली 1000 किमी. से अधिक ऊंचाई वाले उपग्रहों को अंतर्वेधित करने के लिए विकसित है, किंतु मिशन शक्ति को जानबूझ कर निम्नतम संभाव्य ऊंचाई वाली कक्षा (283 किमी.) स्थित उपग्रह के लिए योजनाबद्ध किया गया ताकि अन्य अंतरिक्ष वस्तुओं को इसके मलबे से न्यूनतम खतरा हो। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से 120 किमी. नीचे की कक्षा स्थित उपग्रह को लक्ष्य बनाने का यही उद्देश्य था। इस अंक में मिशन शक्ति पर सामयिक आलेख प्रस्तुत किया गया है।

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पुलवामा हमले से भारतीयों में जो क्रोध और क्षोभ व्याप्त हुआ था, उसका प्रतिकार ऑपरेशन बालाकोट ही हो सकता था। लेकिन इस ऑपरेशन को जिस प्रकार राजनीति की विषयवस्तु बना दिया गया, उसी का परिणाम था कि पूर्व सैनिकों को पत्र लिखकर राजनीतिज्ञों से सेना पर राजनीति न करने का आग्रह करना पड़ा। ऑपरेशन बालाकोट आतंक के प्रति भारत की बदलती नीति का भी द्योतक है। संपूर्ण प्रकरण की व्याख्या करता आलेख इस अंक के सामयिक आलेख में प्रस्तुत है।

एक वैचारिक आलेख वैश्विक ताकतों की आपसी प्रतिस्पर्धा के दौर में दक्षिण एशियाई देशों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों एवं संभावनाओं पर भी प्रस्तुत है।

7 फरवरी, 2019 को प्रस्तुत उ.प्र. बजट पर सामयिक आलेख भी इस अंक में प्रस्तुत है, जो परीक्षार्थियों के लिए वर्षभर उपयोगी रहेगा। विगत अंकों की भांति यह अंक भी मुख्य परीक्षा पर विशेष सामग्री से युक्त है।

इस अंक में बागवानी उत्पादन एवं क्षेत्र के आंकड़ों के साथ-साथ अर्पण-2019 दिया जा रहा है जिसमें उ.प्र. पी.सी.एस., 2016 में चयनित परीक्षार्थियों ने अपनी सफलता बयां की है। पाठकों से अनुरोध है कि अंक पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजें।