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मलेरिया उन्मूलन हेतु E-2020 पहल, 2019

E-2020 Initiative for Elimination of Malaria, 2019
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 21 जून, 2019 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, एशिया महाद्वीप के चार देशों और लैटिन अमेरिकी देश अलसल्वाडोर में वर्ष 2018 में मलेरिया के एक भी मामले दर्ज नहीं हुए हैं।
  • ध्यातव्य है कि एशिया महाद्वीप के ये चार देश- चीन, ईरान, मलेशिया एवं तिमोर-लिस्ते हैं।
  • गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मलेरिया के वर्ष 2020 तक उन्मूलन हेतु ‘E-2020 Initiative’ पहल चलाई जा रही है।
  • रिपोर्ट से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
  • वर्तमान रिपोर्ट मलेरिया उन्मूलन की दिशा में प्राप्त हुई सफलता को संदर्भित करती है। गौरतलब है कि मलेरिया उन्मूलन की इस पहल में पांच महाद्वीपों के 21 देशों को शामिल किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में विश्व स्वास्थ्य महासभा (World Health Assembly) ने वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन हेतु वैश्विक तकनीकी रणनीति को मंजूरी दी थी।
  • इस रणनीति के तहत वर्ष 2020 तक कम-से-कम 10 देशों को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization : WHO) ने वर्ष 2016 में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा, कि वर्ष 2020 तक कम-से -कम 21 देशों के मलेरिया मुक्त होने की क्षमता है।
  • इस पहल के तहत मई, 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अल्जीरिया और अर्जेंटीना को मलेरिया मुक्त घोषित किया जा चुका है।
  • गौरतलब है कि विश्व में मलेरिया के सर्वाधिक मामले नाइजीरिया (25%), कांगो (11%), मोजाम्बिक (5%) और युगांडा (4%) में पाए गए हैं।
  • भारत से संबंधित तथ्य
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत का मलेरिया से संबंधित मामलों में वैश्विक योगदान 4 प्रतिशत है।
  • भारत ने मलेरिया उन्मूलन की दिशा में उत्साहजनक प्रगति करते हुए वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2017 में 24 प्रतिशत तक (मलेरिया मामलों में) की कमी दर्ज करवाई है।
  • इसके साथ ही भारत, विश्व के 11 उन देशों में शामिल है, जहां पर वैश्विक मलेरिया के कुल मामलों में से 70 प्रतिशत पाए जाते हैं।
  • ये देश-बुर्किना फासो, कैमरून, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, घाना, माली, मोजाम्बिक, नाइजर, नाइजीरिया, युगांडा और तंजानिया हैं।

संधीरेन्द्र त्रिपाठी