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मंकीपॉक्स वायरस का कहर

Monkeypox virus wrecks
  • पृष्ठभूमि
  • मंकीपॉक्स एक दुर्लभ वायरल बीमारी है, जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। यह मुख्य रूप से मध्य एवं पश्चिमी अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों के आस-पास के क्षेत्रों में पाई जाती है, जहां संक्रमित जानवरों के साथ अक्सर संपर्क होता रहता है। वर्ष 1958 में सर्वप्रथम बंदरों में इस बीमारी के लक्षण पाए जाने के कारण इसे मंकीपॉक्स बीमारी कहा जाता है। मंकीपॉक्स वायरस पॉक्सविरिडे फैमिली (Poxviridae Family) के आर्थोपॉक्स वायरस (Orthopox virus) समूह से संबंधित है। वर्ष 1970 में पहली बार कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में मानव इस वायरस से संक्रमित हुआ। अफ्रीका के बाहर वर्ष 2003 में संयुक्त राज्य अमेरिका में इसका संक्रमण हुआ था।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 9 मई को एक बयान जारी कर बताया कि 38 वर्षीय एक नाइजीरियाई व्यक्ति मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह नाइजीरियाई व्यक्ति सिंगापुर पहुंचने से पूर्व नाइजीरिया में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुआ था।
  • इस वैवाहिक कार्यक्रम में नाइजीरियाई व्यक्ति ने बुशमीट (Bushmeat) खाया था, जो वायरस संक्रमण का स्रोत हो सकता है।
  • ज्ञातव्य है कि बुशमीट चिम्पैंजी, गोरिल्ला, मृग, पक्षी तथा कुतरने (Rodent) वाले जानवरों इत्यादि के मांस को कहा जाता है, जिसमें मंकीपॉक्स वायरस के फैलने की सर्वाधिक संभावना होती है।
  • वायरस
  • विषाणु (Virus) अकोशिकीय अतिसूक्ष्म जीव है, जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि करते हैं। सर्वप्रथम 1796 ई. में एडवर्ड जेनर ने चेचक विषाणु का पता लगाया तथा इसके लिए टीके (Vaccine) का आविष्कार भी किया था।
  • विषाणु लाभप्रद एवं हानिकारक दोनों होते हैं। जीवाणुभोजी विषाणु एक लाभप्रद विषाणु है जो हैजा, पेचिश, टायफायड इत्यादि रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को नष्ट कर मानव की रोगों से रक्षा करता है।
  • इसके अतिरिक्त कुछ विषाणु पौधे या जंतुओं में रोग उत्पन्न करते हैं, जो हानिप्रद होते हैं जैसे- एचआईवी (HIV), इन्फ्लूएंजा वायरस, पोलियो वायरस इत्यादि।
  • सामान्य रूप से विषाणु का संचरण संपर्क द्वारा, वायु द्वारा, भोजन एवं जल द्वारा होता है, परंतु विशिष्ट प्रकार के विषाणु विशिष्ट विधियों द्वारा संचरण करते हैं।
  • लक्षण
  • मंकीपॉक्स से ग्रसित व्यक्ति को प्रारंभ में बुखार तथा सिरदर्द होता है तत्पश्चात दाने समान छोटे-छोटे चकत्ते पूरे शरीर में फैलने लगते हैं।
  • इसके अतिरिक्त त्वचा में पहली बार विशेष बदलाव का आना, मांसपेशियों में दर्द, पीठ में दर्द, लिम्फ नोड्स (Limph Nodes) में सूजन, बेचैनी इत्यादि समस्याएं मंकीपॉक्स से ग्रसित व्यक्ति में स्पष्ट दिखाई पड़ती हैं।
  • संक्रमण
  • मंकीपॉक्स एक संक्रमित जानवर से जानवरों को काटने या जानवरों के घावों (wounds) या शरीर के तरल पदार्थ के सीधे संपर्क में आने से मनुष्यों में फैल सकता है।
  • यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकती है। मानव संचरण में वायरस को प्रत्यक्ष और लंबे समय तक आमने-सामने संपर्क के दौरान श्वसन बूंदों द्वारा प्रेषित होता है।
  • इसके अतिरिक्त यह संभव है कि किसी संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थ या वायरस दूषित वस्तुओं जैसे कि बिस्तर या कपड़ों के साथ सीधे संपर्क में आने से भी यह फैल सकता है।
  • उपचार एवं टीका
  • अभी तक मंकीपॉक्स के संक्रमण से निपटने के लिए कोई विशिष्ट उपचार या टीका (Vaccine) उपलब्ध नहीं है फिर भी उसके प्रकोप को विविध क्रियाविधियों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।
  • इसके लिए पशु से मानव संचरण के जोखिम को कम करना तथा कृतंक (Rodent) (कुतरने वाले जानवर) के साथ संपर्क से बचना सटीक उपाय है।
  • इसके अतिरिक्त रक्त और मांस के सीधे संपर्क से बचाव करना तथा मंकीपॉक्स से पीड़ित लोगों की देखभाल करते समय दस्तानों (Gloves) तथा अन्य सुरक्षात्मक उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए।
  • अवधि
  • मंकीपॉक्स का प्रभाव आमतौर पर 2-4 सप्ताह तक रहता है तत्पश्चात उपचार द्वारा यह शनैः-शनैः समाप्त हो जाता है।
  • निष्कर्ष
  • चूंकि मंकीपॉक्स वायरस से निपटने के लिए प्रभावी उपचार एवं टीकों की अनुपलब्धता है। इसलिए इसको नियंत्रित करने के लिए बुशमीट पर प्रतिबंध, सफाई की विशेष व्यवस्था तथा संक्रमित व्यक्ति के पूर्ण स्वस्थ होने के पश्चात ही क्षेत्र से बाहर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

संसुनीत कुमार द्विवेदी