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भ्रष्टाचार बोध सूचकांक, 2018

Corruption Perception Index, 2018

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल

ग्रामीण भारत के गांवों से लेकर ब्रुसेल्स में सत्ता के गलियारों तक भ्रष्टाचार के पीड़ितों एवं गवाहों को स्वर देने का कार्य ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा किया जाता है। वर्ष 1993 में एक गैर-सरकारी एवं गैर-लाभकारी संगठन के रूप में स्थापित यह संस्था सत्ता, रिश्वत एवं गुप्त सौदों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में सरकारों, व्यवसायों एवं नागरिकों के साथ मिलकर कार्य करती है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में स्थित अपने अंतरराष्ट्रीय सचिवालय से कार्य करते हुए यह संस्था वर्तमान में 100 से भी अधिक देशों में सक्रिय रूप से भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व कर रही है। इसी दिशा में कार्य करते हुए वर्ष 1995 से ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा प्रतिवर्ष भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (Corruption Perceptions Index) जारी किया जाता है। इस सूचकांक के तहत विश्व के देशों एवं क्षेत्रों को वहां व्याप्त भ्रष्टाचार के आधार पर रैंकिंग प्रदान की जाती है। वर्ष 2012 से ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्टाचार बोध सूचकांक के निर्माण में प्रयोग की जाने वाली प्रक्रिया को संशोधित भी किया है।

  • वर्तमान संदर्भ
  • 29 जनवरी, 2019 को ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ (Transparency International) द्वारा ‘भ्रष्टाचार बोध सूचकांक, 2018’ (Corruption Perceptions Index, 2018) जारी किया गया।
  • प्रतिवर्ष जारी होने वाली इस रिपोर्ट का यह 24वां संस्करण है।
  • सूचकांक, 2018
  • भ्रष्टाचार बोध सूचकांक, 2018 में 13 सर्वेक्षणों एवं विशेषज्ञ मूल्यांकनों के आधार पर विश्व के 180 देशों एवं क्षेत्रों को सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के स्तरों के अनुरूप रैंकिंग प्रदान की गई है।
  • इस सूचकांक में शून्य (0) से सौ (100) अंकों तक विस्तारित पैमाने का प्रयोग किया गया है, जहां शून्य का अर्थ ‘सर्वाधिक भ्रष्ट’ (Highly Corrupt) तथा सौ का अर्थ ‘सर्वाधिक ईमानदार’ (Very Clean) होने से है।
  • सूचकांक, 2018 के मुख्य अंश
  • सूचकांक के अनुसार दो-तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से कम है तथा इनका औसत स्कोर 43 है।
  • पिछले 7 वर्षों में केवल 20 देशों, जिनमें एस्टोनिया एवं आइवरी कोस्ट शामिल हैं, ने अपने CPI स्कोर में सुधार किया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, चिली एवं माल्टा सहित 16 देशों के स्कोर में गिरावट आई है।
  • उच्चतम स्कोरिंग क्षेत्र पश्चिमी यूरोप और यूरोपीय संघ (औसत स्कोर 66) है, जबकि सबसे कम स्कोरिंग क्षेत्र उप-सहारा अफ्रीका (औसत स्कोर 32) और पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया (औसत स्कोर 35) हैं।
  • वर्ष 2011 के बाद पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका शीर्ष 20 देशों की सूची से बाहर हो गया है।
  • सूचकांक में डेनमार्क (88 अंक) शीर्ष स्थान पर, जबकि सोमालिया (10 अंक) सबसे निचले स्थान पर है।
सबसे कम भ्रष्टाचार वाले 6 देश
देश रैंक (2018) स्कोर (2018)
डेनमार्क 1 88
न्यूजीलैंड 2 87
फिनलैंड 3 85
सिंगापुर 3 85
स्वीडन 3 85
स्विट्जरलैंड 3 85
सर्वाधिक भ्रष्टाचार वाले 5 देश
देश रैंक (2018) स्कोर (2018)
सोमालिया 180 10
सीरिया 179 13
दक्षिण सूडान 178 13
यमन 177 14
उत्तर कोरिया 176 14
  • सूचकांक में भारत की स्थिति
  • भ्रष्टाचार बोध सूचकांक, 2018 में भारत 41 अंकों के साथ 78वें स्थान पर है।
  • भारत के साथ बुर्किना फासो, घाना, कुवैत, लेसोथो, त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा तुर्की भी 41 अंकों के साथ 78वें स्थान पर हैं।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2017 के इस सूचकांक में भारत को 40 अंक (81वीं रैंक) प्राप्त हुए थे। अतः वर्ष 2018 में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है।
  • इस सूचकांक में भारत के पड़ोसी देशों में चीन 87वें स्थान (39 अंक), श्रीलंका 89वें स्थान (38 अंक), पाकिस्तान 117वें स्थान (33 अंक), नेपाल 124वें स्थान (31 अंक), बांग्लादेश 149वें स्थान (26 अंक) एवं अफगानिस्तान 172वें स्थान (16 अंक) के साथ भारत से पीछे हैं।
  • सूचकांक में भूटान 68 अंकों के साथ 25वें स्थान पर है।
  • वहीं ब्रिक्स देशों की रैंकिंग में भारत एवं चीन के अतिरिक्त दक्षिण अफ्रीका 73वें स्थान (43 अंक), ब्राजील 105वें स्थान (35 अंक) एवं रूस 138वें स्थान (28 अंक) पर हैं।
  • भ्रष्टाचार नियंत्रण के उपाय
  • भ्रष्टाचार को समाप्त करने की दिशा में वास्तविक प्रगति करने एवं विश्व में लोकतंत्र को सुदृढ़ करने हेतु ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल सभी देशों की सरकारों से निम्नलिखित कदम उठाने का आह्वान करती है-

(i) राजनीतिक शक्ति पर रोक एवं संतुलन बनाए रखने हेतु उत्तरदायी संस्थानों को सुदृढ़ करना तथा बिना किसी धमकी के उनके संचालन को सुनिश्चित करना।

(ii) भ्रष्टाचार विरोधी कानून, अभ्यास एवं प्रवर्तन के मध्य कार्यान्वयन संबंधी फासले को समाप्त करना।

   (iii) सरकारी व्ययों पर राजनीतिक भागीदारी और सार्वजनिक निगरानी में वृद्धि करने वाले नागरिक समाज संगठनों का समर्थन करना।

   (iv)पत्रकारों की सुरक्षा एवं बिना किसी भय के उनकी कार्य करने की क्षमता को सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वतंत्र मीडिया का समर्थन करना।

सं. ललिन्द्र कुमार