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भारत : सौर e-कचरा

India: Solar e-waste
  • वर्तमान परिदृश्य
  • वर्ष 2050 तक भारत को ‘सौर e-कचरा’ नामक नई श्रेणी से जद्दो-जहद करने की संभावना है। एनर्जी कंसल्टेंसी फर्म, ‘ब्रिज टू इंडिया’ (BTI) के अध्ययन के अनुसार, भारत के PV (फोटोवोल्टिक) अपशिष्ट की मात्रा वर्ष 2030 तक 0.2 मिलियन टन और वर्ष 2050 तक 1.8 मिलियन टन होने का अनुमान है।
  • भारत की स्थिति
  • वर्तमान में भारत के e-कचरा नियमों में इस क्षेत्र से कचरे को रिसाइकल या डिस्पोज करने के लिए सौर सेल निर्माताओं को बाध्य करने का कोई कानून नहीं है।
  • भारत में e-कचरा (प्रबंधन और हैंडलिंग) नियम, 2011 का प्रावधान है, परंतु इसमें PV अपशिष्ट के निपटान से संबंधित किसी नियम का उल्लेख नहीं है।
  • भारत ने वर्ष 2022 तक 100 GW सौर ऊर्जा स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • अभी तक भारत के पास लगभग 28 GW सौर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए सौर सेल है, जिसमें से अधिकांशतः आयातित हैं।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, संगठित क्षेत्र में अनुमानित e-कचरे का केवल 4 प्रतिशत से कम पुनर्नवीनीकरण किया जाता है। अतः e-कचरे के निपटान के लिए भारत के पास बुनियादी रिसाइक्लिंग की सुविधा नहीं है।
  • PV मॉड्यूल और PV अपशिष्ट
  • PV मॉड्यूल अनिवार्यतः  सिलिकॉन, कांच, धातु और बहुलक अंशों से बना होता है।
  • PV मॉड्यूल में कांच और एल्युमीनियम कुल वजन का 80 प्रतिशत होते हैं, जो खतरनाक नहीं होते।
  • लेकिन PV मॉड्यूल में कुछ अन्य पदार्थों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें बहुलक, धातुएं, धात्विक यौगिक और मिश्र धातुएं शामिल हैं, जो अत्यंत खतरनाक हैं। जैसे- लेड की लीचिंग से पौधों और जानवरों की वृद्धि एवं प्रजनन दर में कमी, जैव विविधता में कमी, शारीरिक क्रिया-प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव आदि गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव परिलक्षित होता है।
  • PV अपशिष्ट रिसाइक्लिंग तकनीकी मानकों और भौतिक अवसंरचना दोनों ही दृष्टि से विश्व स्तर पर अभी भी नवजात अवस्था में है।
  • PV अपशिष्ट निपटान हेतु यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान, चीन आदि देशों द्वारा उचित दिशा-निर्देश जारी कर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
  • भारत की भावी रणनीति
  • अपशिष्ट प्रबंधन और उपचार के लिए प्रत्येक हितधारक की देयता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • PV अपशिष्ट संग्रह, उपचार और निपटान के लिए विशेषज्ञों द्वारा यथाशीर्घ दिशा-निर्देश और मानक निर्धारित किया जाना चाहिए।
  • PV मॉड्यूल आपूर्तिकर्ताओं, बिजली खरीददारों और परियोजना डेवलपर्स के मध्य आपसी रिसाइक्लिंग जिम्मेदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • यूरोपीय संघ जीवन चक्र में ऊर्जा से संबंधित उत्पादों के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए ‘इको-डिजाइन डायरेक्टिव, 2009’ की नीति का पालन करता है। भारत को भी इस नीति के महत्वपूर्ण अंशों को अपनाना चाहिए।

संअमर सिंह