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भारत यू.एन.सी.सी.डी.(UNCCD) के कॉप-14 का मेजबान देश बना

India becomes the host country of UNCCD's COP-14
  • पृष्ठभूमि
  • ‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ मरुस्थलीकरण, विशेष रूप से अफ्रीका में मरुस्थलीकरण का मुकाबला करने और राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से सूखे के प्रभावों को कम करने से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
  • यह कानूनी रूप से बाध्यकारी एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जो मरुस्थलीकरण, भूमि अवनयन और सूखे की समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करता है।
  • यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) मरुस्थलीकरण और भूमि अवनयन की समस्या के समाधान के लिए अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका, कैरेबियन द्वीपसमूह मध्य एवं पूर्वी यूरोप तथा उत्तरी भूमध्य सागरीय क्षेत्रों में कार्यरत है।
  • यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) को वर्ष 1992 में हुए रियो सम्मेलन की अनुशंसा के आधार पर वर्ष 1994 में स्वीकार किया गया, जो कि दिसंबर, 1996 से वास्तविक रूप में अस्तित्व में आया।
  • भारत सहित 197 देश यू.एन.सी.सी.डी. के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के सदस्य हैं।
  • मार्च, 2013 में कनाडा इस सम्मेलन से हटने वाला पहला देश था, किंतु बाद में सम्मेलन से अपनी वापसी को रद्द करते हुए यह पुनः वर्ष 2017 में इस अधिवेशन का पार्टी बन गया।
  • इटली के रोम में वर्ष 1997 में इस अभिसमय की प्रथम बैठक का आयोजन हुआ।
  • यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) का स्थायी सचिवालय वर्ष 1999 में जर्मनी के बून शहर में स्थापित किया गया।
  • इस कन्वेंशन को और अधिक प्रसिद्धि दिलाने के लिए वर्ष 2006 में ‘इंटरनेशनल ईयर ऑफ डेजर्ट एंड डेजर्टीफिकेशन’ (International Year of Desert and Desertification) घोषित किया गया।
  • कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (CoP) इस अभिसयम के कार्यान्वयन की देख-रेख करता है। यह इस अभिसमय की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
  • गौरतलब है कि कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के पहले पांच सत्र (1997-2001) वार्षिक आयोजित किए गए थे। वर्ष 2001 के बाद से इसका सत्र द्विवार्षिक आधार पर आयोजित किया जाता है।
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 2-13 सितंबर, 2019 के मध्य यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) के कॉप-14 का आयोजन भारत के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट (India Expo Mart) में संपन्न हुआ।
  • 9 सितंबर, 2019 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन को संबोधित किया।
  • इस वर्ष इस सम्मेलन की थीम ‘भूमि को पुनर्स्थापित करें, भविष्य बनाए रखें’ था।
  • भारत में पहली बार यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज का आयोजन किया गया।
  • भारत ने वर्ष 2021 तक अगले 2 वर्षों के लिए चीन से यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज की अध्यक्षता ग्रहण की है।
  • कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के प्रतिभागी
  • यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज-14 (कॉप-14) में विश्वभर के लगभग 9,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधि, मंत्री, संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख, अंतर-सरकारी निकाय, युवा, स्थानीय सरकारें, व्यापारिक नेता और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें से कुछ प्रमुख प्रतिभागी हैं-भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सद्गुरु महाराज (भारत), यू.एन.सी.सी.डी. के कार्यकारी सचिव इब्राहिम थियाव (Ibrahim Thiaw), संयुक्त राष्ट्र के उप-महासचिव अमीना मोहम्मद, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस के प्रधानमंत्री रॉल्फ ई. गोंसाल्वेस, यूनेप की कार्यकारी निदेशक इंगेर एंडरसन (Inger Andersen), ग्लोबल इनावायरमेंट फैसिलिटी की अध्यक्ष नोको इशी, सी.बी.डी. की कार्यकारी निदेशक क्रिस्टियाना पस्का पामर, यू.एन.डी.पी. के प्रशासक अचीम स्टीनर (Achim Steiner) इत्यादि।
  • कॉप-14 सम्मेलन के प्रमुख बिंदु
  • 11 दिनों तक चलने वाली कॉप-14 बैठक 13 सितंबर को 11 उच्च स्तरीय बैठकों, 30 समिति स्तरीय बैठकों, हितधारकों की 170 से अधिक बैठकों, 145 साथ-साथ आयोजित कार्यक्रमों और 44 प्रदर्शनियों के साथ समाप्त हुई। इस सम्मेलन के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-
  • नई दिल्ली घोषणा-पत्र – कॉप-14 सम्मेलन के अंतिम दिन 196 देशों और यूरोपीयन संघ ने ‘नई दिल्ली घोषणा-पत्र’ को अपनाया। इस घोषणा-पत्र में स्वास्थ्य और लिंग, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, निजी क्षेत्र की भागीदारी, जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई, शांति वन पहल और भारत में 5 मिलियन हेक्टेयर परती भूमि की गुणवत्ता को बहाल करने के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
  • सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों ने भूमि क्षरण को एक बड़ी आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या माना। इसके साथ ही स्वैच्छिक ‘‘भूमि क्षरण तटस्थता’’ (Land Degradation Neutrality) के लक्ष्यों को अपनाने का जोरदार स्वागत किया, जिसमें वर्ष 2030 तक परती भूमि को पुनः उर्वर बनाने का लक्ष्य भी शामिल है।
  • शांति वन पहल (Peace Forest Initiative) – यह पहल दक्षिण कोरिया की एक पहल है, जिसमें शांति बहाली प्रक्रिया के रूप में पारिस्थितिकी बहाली का उपयोग करना है।
  • इंटरनेशनल कोलिशन फॉर एक्शन ऑन सैंड एंड डस्ट स्टार्म्स (Internationa Coalition for Action on Sand and Dust Storms) : CoP-14 सम्मेलन के दौरान ‘सैंड एंड डस्ट स्टॉर्म्स (Sand and Dust Storms-SDS) पर एक नया अंतरराष्ट्रीय गठबंधन अस्तित्व में आया। ‘सैंड एंड डस्ट स्टॉर्म्स’ एक ऐसी घटना है, जो अफ्रीका, एशिया, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के 151 देशों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। इस नए गठबंधन के फोकस क्षेत्रों में से एक ‘सैंड एंड डस्ट स्टॉर्म्स (SDS) की निगरानी में सुधार करना तथा बेहतर प्रतिक्रिया के लिए एस.डी.एस.  (SDS) स्रोत बेस मैप का विकास करना है।
  • इनिशिएटिव ऑफ सस्टेनबिलिटी, स्टेबिलिटी एंड सिक्योरिटी (Initiative of Sustainability, Stability and Security-3S) : सम्मेलन के दौरान 14 अफ्रीकी देशों ने भूमि की गुणवत्ता में गिरावट (Land degradation) से होने वाले प्रवासन को रोकने के लिए इस पहल की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य परती भूमि की गुणवत्ता को बहाल करना तथा प्रवासियों और कमजोर समूहों के लिए ‘ग्रीन जॉब्स’ (कृषि क्षेत्र में नौकरी) का निर्माण करना है।
  • ड्रॉट टूलबॉक्स (Drought Toolbox) – कॉप-14 सम्मेलन के आयोजन का दसवां दिन विश्वभर में सूखे की समस्या पर केंद्रित था। इस दौरान सूखे से निपटने के लिए ‘ड्रॉट टूलबॉक्स’ को लांच किया गया। यह टूलबॉक्स सूखा से संबंधित सभी तरह के कार्यों के लिए वन-स्टॉप-शाप के रूप में एक ऐसा ‘ज्ञान बैंक’ है, जो विभिन्न देशों को इन उपकरणों की मदद से सूखा का पूर्वानुमान लगाने और उसके प्रभाव को कम करके उससे प्रभावी तरीके से निपटने में सक्षम बनाता है।
  • लिंग काकस (Gender Caucus) – सम्मेलन के दौरान यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) सचिवालय ने मरुस्थलीकरण की समस्या से निपटने में महिलाओं की भूमिका को समझ कर उन्हें त्वरित रूप से मुख्यधारा में लाने की जरूरत को समझते हुए कॉप सम्मेलन के पहले ‘लिंग काकस’ (Gender Caucus) का उद्घाटन किया।
  • कॉप (CoP)-14 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन
  • 9 सितंबर, 2019 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय के कॉप-14 के उच्चस्तरीय खंड [High Level Segment of the 14th Conference of  Parties (CoP-14) of the UN Convention to Combat Desertification ]को संबोधित किया।
  • इस संबोधन के दौरान उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया, वे इस प्रकार से हैं-
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों से भारत ने धरती को महत्व दिया है। भारतीय संस्कृति में पृथ्वी को पवित्र माना गया है और इन्हें मां का दर्जा दिया गया है।
  • प्रधानमंत्री ने बंजर भूमि की समस्या से निपटने में जल संकट की समस्या का समाधान खोजने को भी महत्वपूर्ण बताया। इसके लिए उन्होंने यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) के नेतृत्व से भूमि के बंजर होने की रोकथाम की रणनीति के केंद्र बिंदु के रूप में ‘ग्लोबल वाटर एक्शन एजेंडा (Global Water Action Agenda) बनाने का आह्वान किया।
  • उन्होंने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देगा।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उन देशों को सहायता देने का प्रस्ताव करता है, जो एल.डी.एन. (लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रलिटी) रणनीतियों को समझना और अपनाना चाहते हैं।
  • भारत अपने कुल क्षेत्र में और अधिक गुणवत्तायुक्त भूमि का इजाफा करेगा। इस कार्य के लिए भारत अब से वर्ष 2030 के बीच 21 मिलियन हेक्टेयर से 26 मिलियन हेक्टेयर तक अपनी बंजर भूमि को खेती योग्य बनाएगा।
  • भारत बंजर भूमि के बारे में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और प्रौद्योगिकी शामिल करने के लिए भारतीय अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद में एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगा।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता और भूमि क्षरण जैसे क्षेत्रों में व्यापक दक्षिण-दक्षिण सहयोग बढ़ाने के लिए विभिन्न उपायों का प्रस्ताव रखता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • सितंबर, 2019 में यू.एन.सी.सी.डी. (UNCCD) के कॉप-14 का आयोजन करके भारत जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता और भूमि पर सभी तीनों रियो सम्मेलनों की कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज की मेजबानी करने वाला देश बन गया है।
  • कॉप-15 का आयोजन वर्ष 2021 में किया जाएगा।
  • भारत का पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ‘संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय’ के लिए नोडल मंत्रालय है।

सं. वृषकेतु राय