Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: ssgcpl@gmail.com

भारत जल प्रभाव सम्मेलन, 2018

India Water Impact Summit,2018
  • वर्तमान संदर्भ
  • 5 दिसंबर, 2018 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने भारत जल प्रभाव सम्मेलन (India Water Impact Summit), 2018 का शुभारंभ किया।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • 5-7 दिसंबर, 2018 के मध्य आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga : NMCG) और गंगा नदी बेसिन प्रबंधन एवं अध्ययन केंद्र (Centre for Ganga River Basin Management and Studies : cGanga) ने संयुक्त रूप से किया।
  • उल्लेखनीय है कि इस सम्मेलन का पहला आयोजन वर्ष 2012 में नई दिल्ली में संपन्न हुआ था।
  • इस सम्मेलन में 15 देशों से लगभग 200 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सहभागियों और 50 से अधिक केंद्रीय, राज्य और नगरीय प्रशासनों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।
  • प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस सम्मेलन के अंतर्गत देश में जल से संबंधित बड़ी समस्याओं के आदर्श समाधान विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जाता है।
  • इस वर्ष गंगा नदी बेसिन के जीर्णोद्धार पर बहुउद्देश्यीय विचार-विमर्श किया गया।
  • इस सम्मेलन में भारत और विदेश से प्रौद्योगिकी नवोन्मेष, अनुसंधान, नीतिगत ढांचे और वित्तपोषण की नीति पर विचार-विमर्श किया गया।
  • सम्मेलन के तीन प्रमुख पक्ष

(i) 5 राज्यों पर ध्यान केंद्रित करना (Spot light on 5 states) :

  • उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और बिहार में जारी प्रयासों और कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

(ii) गंगा वित्तपोषण मंच (Ganga Financing Forum) :

  • इस सम्मेलन के तहत गंगा वित्तपोषण मंच का भी उद्घाटन किया गया, जो अनेक संस्थानों को सामान्य जानकारी, सूचना और साझेदारी के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • यह मंच नमामि गंगे संबंधी कार्यक्रमों में निवेश करने के इच्छुक वित्तीय संस्थानों और निवेशकों को एकजुट करेगा।

(iii) प्रौद्योगिकी और नवाचार पर्यावरण (Technology and Innovation)

  • इसके तहत पर्यावरण प्रौद्योगिकी जांच प्रक्रिया (Environment Technology Verification : ETV) के रूप में ज्ञात प्रायोगिक/प्रदर्शनात्मक कार्यक्रमों का संचालन करना है, जिसके माध्यम से विश्वभर की प्रौद्योगिकी और नवाचार कंपनियों को नदी बेसिन में व्याप्त समस्याओं के समाधान हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त होगा।
  • ज्ञातव्य है कि 5 नवंबर, 2008 को गंगा नदी को ‘राष्ट्रीय नदी’ घोषित किया गया था।

लेखक-रमेश चन्द