Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

प्रोजेक्ट कन्नम्मा

Project kannamma
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • वर्तमान समय में कन्नम्मा प्रोजेक्ट के अंतर्गत रोटरी क्लब ऑफ मद्रास नॉर्थ के द्वारा चेन्नई शहर के सात सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 300 लड़कियों को सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Napkins) प्रदान किए जा रहे हैं।
  • कन्नम्मा प्रोजेक्ट संबंधी अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • कन्नम्मा प्रोजेक्ट, रोटरी क्लब ऑफ मद्रास नॉर्थ की एक पहल है, जिसके तहत छात्राओं को जागरूक कर सैनिटरी नैपकिन वितरित किए जाते हैं।
  • इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अगस्त, 2018 में हुई थी, जिसके अंतर्गत तमिलनाडु के उथंडी (Uthandi) के एक सरकारी स्कूल में 82 छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन वितरित किए गए थे।
  • इन सैनिटरी नैपकिनों का निर्माण ‘इरूला ट्राइबल वूमेंस वेलफेयर सोसायटी’ (ITWWS- Irula Tribal Women’s Welfare Society) के तहत इरूला समुदाय की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इरूला जनजाति सुभेद्य (Vulnerable) जनजातीय समूह के रूप में रेखांकित है।
  • ये सैनिटरी नैपकिन, बायोडिग्रेडेबल रूप में बनाई जाती हैं, जिसके लिए प्राकृतिक कच्चे माल जैसे कपास व लकड़ी के गूदे का प्रयोग किया जाता है ताकि उपयोग पश्चात स्वतः ही ये प्रकृति में अपघटित हो जाएं।
  • इन सैनिटरी नैपकिन का निर्माण आवाराम (Aavaram) ब्रांड के नाम से किया जा रहा है, जिसके लिए अरुणाचलम मुरुगनांथम मशीनों का उपयोग किया जाता है।
  • अरुणाचलम मुरुगनांथम तमिलनाडु में रहने वाले एक भारतीय सामाजिक उद्यमी हैं, जिन्होंने कम लागत की सैनेटरी नैपकिन बनाने वाली मशीन का निर्माण किया है ताकि ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं में सैनेटरी नैपकिन के उपयोग को बढ़ाया जा सके।
  • अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म पैडमैन इन्हीं के जीवन पर आधारित है।
  • भारत में पैड के उपयोग संबंधी सामाजिक तथ्य
  • भारत में लगभग 88 प्रतिशत महिलाएं मासिक धर्म (Menstruating) के दौरान विभिन्न प्रकार के घरेलू विकल्पों का उपयोग करती हैं, जिससे विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  • मासिक धर्म संबंधी स्वच्छता सुविधाओं की कमी से लगभग प्रतिवर्ष 23 मिलियन लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं।
  • भारत में लगभग 121 मिलियन लड़कियां व महिलाएं नॉन कम्पोस्टेबल (Non-compostable) सैनेटरी पैड का प्रयोग कर रही हैं, जिसके कारण लगभग 113,000 टन वार्षिक मासिक धर्म से संबंधित कचरे का उत्पादन हो रहा है।
  • निष्कर्ष
  • प्रोजेक्ट कन्नम्मा बहुआयामी रूप से मासिक धर्म के संबंध में संबंधित वर्ग को जागरूक कर रहा है, जिसके भविष्य में बहुउद्देश्यीय लाभ प्राप्त होंगे।

Post a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload CAPTCHA.