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नौसैन्य अभ्यास वरुण, 2019

Naval exercise Varuna, 2019
  • पृष्ठभूमि
  • भारत एवं फ्रांस की नौसेना के मध्य वर्ष 1993 से संयुक्त नौसैन्य अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2001 में इस संयुक्त नौसैन्य अभ्यास का नामकरण ‘वरुण’ (Varun) किया गया।
  • उद्देश्य
  • इस नौसैन्य अभ्यास का उद्देश्य भारत एवं फ्रांस की नौसेनाओं के मध्य रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।
  • वरुण, 2019
  • यह नौसैन्य अभ्यास दो चरणों में संपन्न हुआ।
  • वरुण, 2019 नौसैन्य अभ्यास के प्रथम चरण का आयोजन 1-10 मई, 2019 के मध्य गोवा के समुद्र तट के पास किया गया।
  • प्रथम चरण में दोनों देशों के नौसेना अधिकारियों के मध्य, पेशेवर वार्तालाप, विचार-विमर्श तथा खेल आदि को शामिल किया गया।
  • इस नौसैन्य अभ्यास के दूसरे चरण का आयोजन मई के अंत में जिबूती में किया गया।
  • फ्रांस की तरफ से इस नौसैन्य अभ्यास में एफएनएस चार्ल्स डी गौल, एफएनएस फोरबीन, एफएनएस प्रोवेंस, एफएनएस लाटच-ट्रेविल, एफएनएस मार्न आदि ने भाग लिया।
  • भारतीय नौसेना के आईएनएस विक्रमादित्य, आईएनएस मुंबई, आईएनएस तरकश, आईएनएस शंकुल, आईएनएस दीपक आदि ने इस नौसैन्य अभ्यास में भाग लिया।
  • वरुण, 2019 भारत और फ्रांस की नौसेनाओं के मध्य आयोजित किए जाने वाले वार्षिक द्विपक्षीय नौसैन्य अभ्यास ‘वरुण’ की शृंखला का 17वां संस्करण है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • भारत एवं फ्रांस की वायु सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास को ‘गरुड़’ के नाम से जाना जाता है।
  • नौसैन्य अभ्यास वरुण का विगत संस्करण मार्च, 2018 में भारत में आयोजित किया गया था।
  • भारत-फ्रांस रक्षा संबंध
  • मार्च, 2018 में भारत-फ्रांस ने एक-दूसरे के सैन्य अड्डों के उपयोग के संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • मार्च, 2018 में भारत-फ्रांस के मध्य हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग हेतु संयुक्त सामरिक दृष्टिकोण पर हस्ताक्षर किया गया।
  • सितंबर, 2016 में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के लिए अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  • अक्टूबर, 2006 में भारत ने फ्रांस के साथ 6 स्कॉर्पीन पनडुब्बी के निर्माण हेतु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
  • निष्कर्ष
  • भारत एवं फ्रांस के मध्य घनिष्ठ एवं मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। वर्ष 1998 में सामरिक साझेदारी स्थापित होने के उपरांत सभी क्षेत्रों यथा; रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष आदि में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा मिला है। दोनों देशों की सेनाओं के मध्य आयोजित होने वाले संयुक्त अभ्यास से दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की रणनीति एवं संचालन प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलेगी।

संअभय प्रताप सिंह