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नासा का ड्रैगनफ्लाई मिशन

NASA's Dragonfly Mission
  • टाइटन, शनि ग्रह के 62 ज्ञात उपग्रहों (Moons) में सबसे बड़ा है।
  • टाइटन, बृहस्पति (Jupiter) के उपग्रह ‘गैनीमीड’ (Ganymede) के बाद हमारी सौर प्रणाली (Solar System) का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है।
  • इसकी विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह ‘बुध ग्रह’ (Mercury) से भी बड़ा है।
  • डच-अमेरिकी खगोलविद् ‘गेरार्ड कुइपर’ (Gerard Kuiper) ने वर्ष 1944 में टाइटन में ‘वायुमंडल’ (Atmosphere) की उपस्थिति की पुष्टि की थी और इसकी यही विशेषता इसे अद्वितीय बनाती है।
  • वास्तव में, हमारी सौर प्रणाली के 150 से अधिक ज्ञात उपग्रहों में से टाइटन एकमात्र ऐसा उपग्रह है, जहां पर्याप्त मात्रा में सघन वायुमंडल उपस्थित है।
  • पृथ्वी की ही तरह टाइटन का वायुमंडल मुख्यतः नाइट्रोजन (लगभग 95%) से निर्मित है, हालांकि इसमें अल्प मात्रा में मीथेन (लगभग 5%) भी उपस्थित है।
  • सौरमंडल में पृथ्वी के अलावा टाइटन एकमात्र ऐसा स्थान है जिसकी सतह पर नदियों, झीलों तथा समुद्रों के रूप में तरल (Liquids) की उपस्थिति ज्ञात हुई है।
  • सूर्य से बहुत अधिक दूरी पर स्थित होने के कारण इसकी सतह का तापमान -290 डिग्री फॉरेनहाइट (-179 डिग्री सेल्सियस) के आस-पास रहता है।
  • अन्वेषण (Exploration)
  • अप्रैल, 1973 में नासा द्वारा प्रक्षेपित ‘पायनियर 11’ (Pioneer 11) टाइटन का अन्वेषण करने वाला पहला अंतरिक्षयान था।
  • इसके बाद बाह्य सौरमंडल के अध्ययन हेतु प्रक्षेपित नासा के वॉयजर-1 तथा वॉयजर-2 (Voyager-2) अंतरिक्षयान क्रमशः वर्ष 1980 एवं 1981 में शनि प्रणाली (Saturn System) के निकट से होकर गुजरे थे।
  • अक्टूबर, 1997 में नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी तथा इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘कैसिनी-हाइगेंस’ (Cassini-Huygens) मिशन के तहत प्रक्षेपित ‘कैसिनी’ वर्ष 2004 में शनि ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने वाला पहला अंतरिक्षयान बना था।
  • इस मिशन के तहत कैसिनी अंतरिक्षयान के साथ भेजा गया हाइगेंस लैंडर, कैसिनी से अलग होकर पैराशूट के माध्यम से टाइटन के वायुमंडल से होता हुआ 14 जनवरी, 2005 को उसकी सतह पर उतरा।
  • यह बाह्य सौरमंडल में किसी अंतरिक्षयान की प्रथम लैंडिंग थी।
  • लगभग 13 वर्षों तक शनि ग्रह की कक्षा में रहने के दौरान कैसिनी अंतरिक्षयान 127 बार टाइटन के निकट से होकर गुजरा (127 Fly bys)।
  • ईंधन खत्म हो जाने के कारण कैसिनी अंतरिक्षयान का मिशन 15 सितंबर, 2017 को समाप्त घोषित कर दिया गया।
  • 27 जून, 2019 को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, शनि ग्रह के उपग्रह टाइटन के अन्वेषण हेतु वर्ष 2026 में ‘ड्रैगनफ्लाई’ (Dragonfly) नामक मिशन प्रक्षेपित किया जाएगा।
  • यह नासा के ‘न्यू फ्रंटियर्स कार्यक्रम’ (New Frontiers Program) के तहत प्रक्षेपित किया जाने वाला चौथा मिशन होगा।
  • इस मिशन के तहत ड्रैगनफ्लाई नामक एक ऑक्टोकॉप्टर लैंडर (एक रोवर के आकार का ड्रोन की तरह का वाहन) टाइटन पर भेजा जाएगा।
  • यह लैंडर टाइटन के विभिन्न स्थलों के जैविक संगठन का अन्वेषण करेगा तथा नमूने एकत्र करेगा।
  • यह प्रथम अवसर होगा जब नासा एक ‘बहु-रोटर वाहन’ (Multi-rotor vehicle) को वैज्ञानिक अन्वेषण हेतु किसी अन्य ग्रह/उपग्रह पर भेजेगी।
  • ड्रैगनफ्लाई रोटरक्राफ्ट वर्ष 2034 में टाइटन पर पहुंचेगा।
  • अपने 2.7 वर्षीय वैज्ञानिक मिशन के दौरान यह टाइटन पर 108 मील (175 किमी.) से अधिक दूरी तक उड़ान भरेगा।
  • न्यू फ्रंटियर्स कार्यक्रम
  • ‘न्यू फ्रंटियर्स कार्यक्रम’ नासा द्वारा संचालित अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों की एक शृंखला है, जिसका उद्देश्य बौने ग्रह प्लूटो सहित सौरमंडल के विभिन्न पिण्डों का अन्वेषण करना है।
  • वर्तमान में इस कार्यक्रम के तहत निम्न तीन मिशन संचालित हो रहे हैं-

(i) न्यू होराइजंस मिशन (New Horizons Mission))

  • प्यूटो तथा कुइपर बेल्ट (Kuiper Belt) के अध्ययन हेतु यह मिशन जनवरी, 2006 में प्रक्षेपित किया गया था।

(ii) जूनो मिशन

  • बृहस्पति ग्रह की संरचना एवं इसकी उत्पत्ति से संबंधित तथ्यों को उद्घाटित करने हेतु जूनो मिशन अगस्त, 2011 में लांच किया गया था।

(iii) ओसिरिसरेक्स (OSIRIS-REx) मिशन

  • पृथ्वी के निकट स्थित एक क्षुद्रग्रह (near-Earth asteroid) बेनू (Bennu) से नमूने एकत्र कर पृथ्वी पर लाने हेतु यह मिशन सितंबर, 2016 में प्रक्षेपित किया गया था।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान में शनि ग्रह के उपग्रह टाइटन पर परिस्थितियां ठीक वैसी ही हैं जैसी जीवन की उत्पत्ति से पूर्व पृथ्वी पर थीं। अतः यह उपग्रह पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

सं. सौरभ मेहरोत्रा