Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2019

International Arbitration Center Bill, 2019
  • पृष्ठभूमि
  • वर्ष 2017 में पूर्व न्यायाधीश बी.एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने सिफारिश की थी, कि सरकार सार्वजनिक धन का उपयोग करते हुए वर्ष 1995 में स्थापित एक वर्तमान संस्थान अंतरराष्ट्रीय वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र (ICADR) का कार्य अपने हाथों में ले सकती है तथा इसे राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर सकती है।
  • इसी परिप्रेक्ष्य में 5 जनवरी, 2018 को लोक सभा में नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2018 को पेश किया गया, जिसे लोक सभा ने 4 जनवरी, 2019 को पारित कर दिया। लेकिन यह राज्य सभा में पारित न हो सका और 13 फरवरी, 2019 को संसदीय कामकाज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।
  • फलस्वरूप, इस संदर्भ में राष्ट्रपति द्वारा 2 मार्च, 2019 को नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र अध्यादेश, 2019 जारी किया गया।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 3 जुलाई, 2019 को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोक सभा में नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2019 को पेश किया।
  • उद्देश्य
  • यह विधेयक संस्थागत मध्यस्थता के लिए एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय की स्थापना का प्रावधान करता है। इसके अलावा नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (NDIAC) के लिए अंतरराष्ट्रीय वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र (ICADR) के उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण का प्रावधान है, जो कि 2 मार्च, 2019 से ही प्रभावी माना जाएगा। यह विधेयक 2 मार्च से लागू अध्यादेश को प्रतिस्थापित करेगा।
  • प्रभाव
  • विधेयक द्वारा प्रस्तावित संस्थागत मध्यस्थता का लाभ सरकार और उसकी एजेंसी तथा पक्षों के बीच विविध प्रकार से प्राप्त होगा। इसके परिणामस्वरूप भारत में गुणवत्ता के विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे तथा लागत के संदर्भ में एक लाभ भी होगा। इसके अतिरिक्त यह विधेयक भारत को संस्थागत मध्यस्थता का केंद्र बनने की सुविधा प्रदान करेगा।
  • नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (NDIAC)
  • विधेयक के अनुसार, नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र में कुल सात सदस्य शामिल होंगे। इनमें-

   i.  एक अध्यक्ष, जो उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो या मध्यस्थता के प्रशासन या व्यवहार में विशेष ज्ञान और अनुभव रखने वाला एक प्रसिद्ध व्यक्ति हो,

   ii. दो प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिनके पास संस्थागत मध्यस्थता में पर्याप्त ज्ञान और अनुभव हो,

   iii. तीन पदेन सदस्य, जिनमें वित्त मंत्रालय से एक नामिती और एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा

   iv. एक अंशकालिक सदस्य के रूप में नियुक्त, वाणिज्य और उद्योग के एक मान्यता प्राप्त निकाय के प्रतिनिधि शामिल हैं।

  • निष्कर्ष
  • वंफ्रेद्रीय कानून मंत्री ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि भारत मध्यस्थता का बड़ा केंद्र होना चाहिए। इस बारे में केंद्र सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि ऐसा स्वायत्त केंद्र होना चाहिए, जिसमें केंद्र का हस्तक्षेप नहीं हो।

संकालीशंकर