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द स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया

The State of the Education Report for India
  • वर्तमान संदर्भ
  • 3 जुलाई, 2019 को यूनेस्को, नई दिल्ली द्वारा ताज पैलेस होटल (नई दिल्ली) में दिव्यांग बच्चों की भारत में शिक्षा की वर्तमान स्थिति से संबंधित ‘द 2019 स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया : चिल्ड्रेन विथ डिसएबिलिटीज’ (The 2019 State of the Education Report for India : Children with Disabilities) जारी किया गया।
  • उद्देश्य
  • भारत ने ‘यूएन कन्वेंशन ऑन राइट्स ऑफ चाइल्ड’ (UNCRC) और ‘यूएन कन्वेंशन ऑन राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज’ (UNCRPD) की पुष्टि करके दिव्यांग बच्चों को शामिल करने का अधिकार आधारित दृष्टिकोण अपनाया है।
  • अतः यह रिपोर्ट दिव्यांग बच्चों (Children with Disabilities) की शिक्षा के अधिकार का संरक्षण करने हेतु देश में किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों का प्रलेखीकरण करती है तथा इसकी पूर्ण प्राप्ति हेतु क्या किया जाना चाहिए, इसकी रूपरेखा तैयार करती है।
  • इसके अतिरिक्त इस रिपोर्ट के माध्यम से दिव्यांग बच्चों हेतु निर्मित किए जाने वाले नीतियों के लिए नीति-निर्माताओं को दस सिफारिशें भी प्रस्तुत की गई हैं।
  • क्या है रिपोर्ट?
  • भारत के लिए शिक्षा रिपोर्ट की स्थिति यूनेस्को नई दिल्ली द्वारा वार्षिक रूप से प्रकाशित की जाती है।
  • परंतु वर्ष 2019 की रिपोर्ट इस अर्थ में विशिष्ट है कि यह यूनेस्को नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई अपनी तरह की पहली रिपोर्ट है, जिसमें दिव्यांग बच्चों के शिक्षा के अधिकार के संबंध में उपलब्धियों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है।
  • टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा तैयार एवं यूनेस्को नई दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त यह रिपोर्ट राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्य के व्यापक शोध एवं मान्यता प्राप्त विषयगत शोध अध्ययनों की एक शृंखला पर आधारित है।
  • दिव्यांग बच्चों की शिक्षा की वर्तमान स्थिति
  • वर्तमान स्थिति का विश्लेषण इंगित करता है कि 19 वर्ष से कम आयु के अनुमानित 7.8 मिलियन बच्चे दिव्यांग हैं।
  • 5 वर्ष के दिव्यांग बच्चों में से तीन-चौथाई किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नहीं जाते हैं।
  • न ही 5-19 वर्ष की आयु के दिव्यांग बच्चों का एक-चौथाई भाग विद्यालय जाता है।
  • विद्यालय में नामांकित बच्चों की संख्या शिक्षण (Schooling) के प्रत्येक क्रमिक स्तर के साथ बहुत कम हो जाती है।
  • लड़कों की तुलना में विद्यालय में दिव्यांग लड़कियों की संख्या कम है।
  • दिव्यांग बच्चों का अनुपात जो विद्यालय से बाहर हैं, राष्ट्रीय स्तर पर आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों के समग्र अनुपात से बहुत अधिक है।
  • सिफारिशें
  • रिपोर्ट के अंत में विश्लेषण के निष्कर्ष से दस सिफारिशें प्रस्तुत की गई हैं।

(1)  दिव्यांग बच्चों की शिक्षा की विशिष्ट समस्याओं को शामिल करते हुए दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम, 2016 के साथ बेहतर मिलान करने हेतु शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 में संशोधन करना।

(2)  दिव्यांग बच्चों के सभी शिक्षा कार्यक्रमों के प्रभावी सकेंद्रण हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत एक समन्वय तंत्र स्थापित करना।

(3)  दिव्यांग बच्चों की सीखने की जरूरतों को पूरा करने हेतु शिक्षा बजट में विशिष्ट और पर्याप्त वित्तीय आवंटन सुनिश्चित करना।

(4)  नियोजन, कार्यान्वयन और निगरानी हेतु डेटा प्रणालियों का सशक्तीकरण करना ताकि उन्हें मजबूत विश्वसनीय और उपयोगी बनाया जाए।

(5)  विद्यालय पारिस्थितिकी प्रणालियों को समृद्ध बनाना और दिव्यांग बच्चों के समर्थन में सभी हितधारकों को शािमल करना।

(6)  दिव्यांग बच्चों की शिक्षा हेतु सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग का व्यापक विस्तार करना।

(7)  प्रत्येक बच्चे को अवसर देना और किसी भी बच्चे को दिव्यांगता के कारण पीछे न छोड़ना।

(8)  विविध शिक्षार्थियों को शामिल करने में सहायता करने वाली शिक्षण पद्धतियों में परिवर्तन।

(9)  रूढ़िवादिता से निकलकर कक्षा एवं उसके परे दोनों ही स्थानों पर दिव्यांग बच्चों के प्रति सकारात्मक निपटान का निर्माण करना।

(10)  दिव्यांग बच्चों के लाभ हेतु सरकार, नागरिक, समाज, निजी क्षेत्र और स्थानीय समुदायों को शामिल करने वाली प्रभावी भागीदारी को प्रोत्साहन देना।

निष्कर्ष

  • भारत ने विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों की नामांकन दर में सुधार हेतु एक मजबूत कानूनी ढांचा तथा कार्यक्रमों और योजनाओं को एक जगह रखने के मामले में बहुत प्रगति की है। फिर भी SDG4 एवं एजेंडा 2030 के लक्ष्यों की प्राप्ति तथा समावेशी शिक्षा के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है।

संललिन्द्र कुमार