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द्वितीय द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2019-20

Second Bi-Monthly Monetry Policy Statement, 2019-20
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 6 जून, 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली ‘मौद्रिक नीति समिति’ (MPC) ने ‘द्वितीय द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2019-20’ (Second Bi-Monthly Monetry Policy Statement, 2019-20) जारी किया।
  • समिति द्वारा जारी वर्तमान मौद्रिक नीति वक्तव्य में ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF) के तहत नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की कमी करने का निर्णय लिया गया।
  • अगस्त, 2017 से वर्तमान मौद्रिक नीति तक यह लगातार तीसरा अवसर है, जब समिति ने नीतिगत दरों में कमी करने का निर्णय लिया है, जबकि इस अवधि के दौरान दो बार (जून एवं अगस्त, 2018 में) ब्याज दरों में वृद्धि की गई थी। शेष समय में नीतिगत दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था।
  • महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय
  • मौद्रिक नीति समिति (MPc) द्वारा ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF) के अंतर्गत ‘रेपो दर’ (Repo Rate) में तत्काल प्रभाव से 25 आधार अंकों की कमी करते हुए 5.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया है।
  • ध्यातव्य है कि प्रथम द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2019-20 में ‘रेपो दर’ (Repo Rate) 6 प्रतिशत निर्धारित था।
  • रेपो दर में परिवर्तन (कमी) करने के परिणामस्वरूप ‘रिवर्स रेपो दर’ (Re-RepoRate) भी पूर्व के स्तर 5.75 प्रतिशत से परिवर्तित (कमी) होकर 5.50 प्रतिशत पर समायोजित हो गई।
  • ‘सीमांत स्थायी सुविधा दर’ (MSF) तथा ‘बैंक दर’ भी 25 आधार अंकों की कमी के साथ पूर्व के स्तर 6.25 प्रतिशत से परिवर्तित (कमी) होकर प्रत्येक 6 प्रतिशत पर समायोजित हो गए।
  • नकद आरक्षित अनुपात (CRR) तथा एसएलआर (SLR) को पूर्व के स्तर क्रमशः 4 प्रतिशत एवं 19 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है।
  • मौद्रिक नीति प्रभाव
  • ‘रेपो दर’ (Repo Rate) ब्याज की वह दर होती है, जिस पर रिजर्व बैंक, बैंकों को ऋण (Fund) प्रदान करता है। चूंकि ‘रेपो दर’ घटने से बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से सस्ता ऋण प्राप्त हो सकेगा, इसलिए बैंक भी अब कम ब्याज दर पर ऋण (Loan) दे पाएंगे। इससे नया ऋण सस्ता होगा, जबकि ऋण ले चुके लोगों को या तो ईएमआई (Equated Monthly Income : EMI) में या पुनर्भुगतान अवधि (Repayment Period) में कटौती का फायदा भी मिल सकता है।
  • समिति द्वारा लिए गए निर्णय के तहत मौद्रिक नीति के रुख को ‘तटस्थ’ से ‘उदार’ बनाया गया है।
  • घरेलू अर्थव्यवस्था
  • घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय’ (NSO) द्वारा 31 मई, 2019 को जारी किए गए अनंतिम अनुमानों  वर्ष 2018-19 हेतु में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर को पूर्व के 7 प्रतिशत (फरवरी, 2019 में जारी द्वितीय अग्रिम अनुमान में) की तुलना में संशोधित करते हुए 6.8 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • तीसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में 283.4 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन (मुख्य रूप से रबी चावल, दालों और मोटे अनाजों के कम उत्पादन के कारण) विगत वर्ष की तुलना में 0.6 प्रतिशत कम अनुमानित है।
  • भारत के मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश (जून-सितंबर) लंबी अवधि के औसत (LPA) के 96 प्रतिशत तक सामान्य रहने की संभावना है।
  • 31 मई, 2019 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 421.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
  • संभावनाएं
  • अप्रैल, 2019 की द्वैमासिक मौद्रिक नीति में संतुलित जोखिम के साथ सीपीआई मुद्रास्फीति को वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही के लिए 2.4 प्रतिशत तथा वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिए 2.9-3.0 प्रतिशत एवं वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए 3.5-3.8 प्रतिशत का अनुमान लगाया गया था।
  • चौथी तिमाही में 2.5 प्रतिशत हेडलाइन मुद्रास्फीति के परिणाम अप्रैल नीति के अनुरूप थे।
  • जबकि वर्तमान मौद्रिक नीति में की गई कटौती के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019-20 की पहली छमाही के लिए संतुलित जोखिमों के साथ सीपीआई मुद्रास्फीति 3-3.1 प्रतिशत तथा दूसरी छमाही के लिए 3.4-3.7 प्रतिशत तक संशोधित किया गया है। 
  • अप्रैल, 2019 में जारी मौद्रिक नीति में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर संतुलित जोखिमों के साथ 7.2 प्रतिशत (पहली छमाही हेतु 6.8-7.1% तथा दूसरी छमाही हेतु 7.3-7.4%) की सीमा में अनुमानित किया गया था।
  • जबकि वर्तमान मौद्रिक नीति में की गई कटौती के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019-20 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को संशोधित (पहली छमाही के लिए 6.4-6.7% तथा दूसरी छमाही के लिए 7.2-7.5%) करते हुए समान रूप से संतुलित जोखिमों के साथ 7 प्रतिशत अनुमानित किया गया है।
  • वर्तमान मौद्रिक नीति में कटौती करने हेतु समिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति के साथ नीतिगत रेपो दर में तत्काल प्रभाव से 25 आधार अंकों से कम करने और मौद्रिक नीति को तटस्थ से उदार रूप में बदलने का निर्णय लिया।

संशिवशंकर तिवारी