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देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय

Dena Bank and Vijaya Bank merge into Bank of Baroda
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 1 अप्रैल, 2019 को बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक के विलय के पश्चात  बैंक ऑफ बड़ौदा समग्र व्यवसाय (रु. 15.4 ट्रिलियन) की दृष्टि से भारतीय स्टेट बैंक (रु. 45.25 ट्रिलियन) तथा एचडीएफसी बैंक (रु. 15.8 ट्रिलियन) के पश्चात भारत का तीसरा सबसे बड़ा बैंक तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक के पश्चात दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया। उल्लेखनीय है कि एचडीएफसी बैंक एक निजी क्षेत्र का बैंक है।
  • विलय का उद्देश्य
  • भारत सरकार ने बैंकों के बढ़ते एनपीए (Non Performing Assets-NPA) को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2016 में सरकारी बैंकों के एकीकरण की घोषणा की थी। इस उद्देश्य से 1 अप्रैल, 2017 को भारतीय स्टेट बैंक में उसके पांच अनुषंगी बैंकों (स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर) तथा भारतीय महिला बैंक का विलय किया गया। विलय के अन्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
  • बड़ा बैंकिंग नेटवर्क ग्राहकों को उपलब्ध कराना।
  • भारतीय बैंक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में सक्षम होंगे।
  • बैंकों के कर्ज देने की क्षमता में वृद्धि होगी।
  • संचालन क्षमता में सुधार होगा।
  • विलय के पश्चात बैंक ऑफ बड़ौदा की स्थिति
  • विलय के पश्चात बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाओं की कुल संख्या 9490, कर्मचारियों की कुल संख्या 85675, कुल जमा राशि रु. 841830 लाख करोड़ तथा ग्राहकों की कुल संख्या लगभग 12 करोड़ हो गई है।
  • विलय के पश्चात बैंक ऑफ बड़ौदा का एनपीए 5.71 प्रतिशत हो गया, जो सरकारी बैंकों के औसत एन.पी.ए. 12.13 प्रतिशत की तुलना में बेहतर है।
  • विलय के पश्चात विजया बैंक और देना बैंक के सभी कर्मचारी बैंक ऑफ बड़ौदा के कर्मचारी हो गए तथा बैंक ऑफ बड़ौदा का प्रबंध तंत्र इन सभी के हितों की सुरक्षा करेगा।
  • शेयरधारकों की स्थिति
  • समझौते के अनुसार, देना बैंक के शेयरधारकों को 1000 शेयरों के बदले बैंक ऑफ बड़ौदा के 110 शेयर व विजया बैंक के शेयरधारकों को 1000 शेयरों के बदले बैंक ऑफ बड़ौदा के 402 शेयर मिलेंगे।
  • ग्राहकों को फायदा
  • विलय के पश्चात देना बैंक के ग्राहकों को तत्काल लोन मिलना प्रारंभ हो जाएगा, क्योंकि देना बैंक फंसे कर्ज (NPA) के बड़े बोझ के कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) के दायरे में था, जिस कारण इस बैंक पर लोन देने की पाबंदी थी।
  • विलय के पश्चात अब इनके ग्राहक तीनों बैंकों के ATM से महीने में चाहे जितनी बार पैसे निकाल सकते हैं, इसके लिए उन्हें कोई ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं देना होगा, क्योंकि बैंक ऑफ बड़ौदा में ATM से लेन-देन की कोई सीमा नहीं है। शर्त यह है कि ट्रांजेक्शन इन्हीं तीनों बैंकों के ATM से होना चाहिए।
  • बैंक ऑफ बड़ौदा और देना बैंक के ग्राहक विजया बैंक की प्लांटेशन फाइनेंशिंग जैसी स्कीमों का फायदा उठा सकते हैं।
  • ग्राहकों को पहले से बेहतर फोन बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग की सुविधा प्राप्त होगी।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • बैंक ऑफ बड़ौदा
  • इसकी स्थापना 20 जुलाई, 1908 को बड़ौदा (गुजरात) के महाराज सयाजी राव गायकवाड़ III द्वारा बड़ौदा (गुजरात) में की गई थी।
  • भारत सरकार द्वारा भारत के अन्य 13 वाणिज्यिक बैंकों के साथ इसका 19 जुलाई, 1969 को राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • इसका मुख्याल बड़ोदरा (गुजरात) में तथा कॉर्पोरेट कार्यालय मुंबई में है।
  • वर्तमान में इसके प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री पी.एस. जयकुमार हैं।
  • देना बैंक
  • देना बैंक की स्थापना देवकरण नानजी के परिवार द्वारा 26 मई, 1938 को देवकरण नानजी बैंकिंग कंपनी के नाम से की गई थी।
  • यह वर्ष 1939 में सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित हुआ और कालांतर में इसका नाम परिवर्तित होकर देना बैंक लि. हो गया।
  • जुलाई, 1969 में 13 अन्य बैंकों के साथ देना बैंक का राष्ट्रीयकरण हुआ।
  • विजया बैंक
  • 23 अक्टूबर, 1931 को श्री ए.बी. शेट्टी और अन्य उद्यमशील किसानों द्वारा कर्नाटक के मंगलूर शहर में विजया बैंक की स्थापना की गई।
  • 15 अप्रैल, 1980 को बैंक का राष्ट्रीयकरण हुआ।
  • वर्तमान में इसके प्रबंध निदेशक एवं सी.ई.ओ. श्री आर.ए. शंकर नारायणन हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या
  • विलय के पश्चात सार्वजनिक क्षेत्र के कुल बैंकों की संख्या 18 रह गई है।

सं.  गजेन्द्र प्रताप