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त्रिपुरा राज्य में पहले विशेष आर्थिक क्षेत्र को मंजूरी

First special economic zone approved in Tripura state
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 4 अक्टूबर, 2019 को केंद्रीय सरकार ने त्रिपुरा में राज्य के पहले विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की।
  • यह स्वीकृति वाणिज्य मंत्रालय के बोर्ड ऑफ अप्र्रूवल की 92वीं बैठक में प्रदान की गई।
  • पृष्ठभूमि
  • कृषि आधारित विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना का प्रस्ताव जून, 2019 में प्रस्तुत किया गया था।
  • मुख्य बिंदु
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र में रबर आधारित उद्योग, टायर, सर्जिकल धागे, कपड़ा और परिधान, बांस उद्योग, कृषि आधारित प्रसंस्करण आदि की इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना दक्षिण त्रिपुरा के सबरूम उपखंड में पश्चिम जलेफा और दक्षिण बिजॉयपुर (लुधुआ चाय बागान क्षेत्र) में 25 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाएगी।
  • 25 हेक्टेयर क्षेत्र में से विशेष आर्थिक क्षेत्र का 16.35 हेक्टेयर क्षेत्र पश्चिम जलेफा में और 10.99 हेक्टेयर क्षेत्र दक्षिण बिजॉयपुर गांव      में विकसित किया जाएगा।
  • इसका कारण यह है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र को 25 हेक्टेयर में विकसित करने का प्रस्ताव है, जबकि पश्चिम जलेफा गांव में केवल 16.35 हेक्टेयर भूमि ही उपलब्ध है।
  • इसलिए विशेष आर्थिक क्षेत्र का 10.99 हेक्टेयर क्षेत्र दक्षिण बिजॉयपुर में विकसित किया जाएगा।
  • स्थापना के बाद पहले 5 वर्ष तक विशेष आर्थिक क्षेत्र की इकाइयों के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए आयतित और घरेलू खरीद वाले उत्पाद शुल्क रहित होंगे।
  • साथ ही इन 5 वर्षों तक विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थापित इकाइयों से निर्यात आय पर आयकर अधिनियम की धारा 10 एए के तहत 100 प्रतिशत आयकर छूट प्रदान की जाएगी।
  • उसके अगले 5 वर्ष के लिए 50 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी और 50 प्रतिशत प्रतिवर्ष अन्य 5 वर्ष के लिए वापस माल पर निर्यात लाभ प्रदान किया जाएगा।
  • लागत
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र परियोजना की लागत लगभग 147 करोड़ रु. आकलित की गई है।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र कम-से-कम 25 एकड़ में बनाया जाएगा।
  • निवेश
  • इस परियोजना में लगभग 1550 करोड़ रु. का निवेश किया जाएगा, जिससे लगभग 12000 कौशल रोजगार का सृजन होगा।
  • विकास
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र का विकास त्रिपुरा औद्योगिक विकास कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र
  • ऐसा क्षेत्र जहां से व्यापार, आर्थिक क्रिया-कलाप, उत्पादन तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को संचालित किया जाता है, विशेष आर्थिक क्षेत्र कहलाता है।
  • ये क्षेत्र विशेष आर्थिक नियमों और कानूनों को ध्यान में रखकर व्यावसायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए देश की सीमा के अंदर विकसित किया जाता है।
  • भारत ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1965 में कांडला में एक विशेष क्षेत्र की स्थापना की थी।
  • इस विशेष क्षेत्र को एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन (EPZ) नाम दिया गया था।
  • इस प्रकार भारत उन शीर्ष देशों में से एक है, जिन्होंने उद्योग तथा व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से ऐसी भौगोलिक इकाइयों को स्थापित किया।
  • भारत में विशेष आर्थिक क्षेत्र नीति
  • अप्रैल, 2000 में अस्थिर वित्तीय व्यवस्था के कारण सामने आने वाली दिक्कतों का सामना करने, विश्वस्तरीय अवसंरचना के अभाव, नियंत्रणों और मंजूरियों की विविधता तथा भारत में अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र नीति की घोषणा की गई।
  • इस नीति का उद्देश्य न्यूनतम संभावित विनियमनों के साथ आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन तथा गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना की सहायता से केंद्र एवं राज्य स्तर पर विशेष आर्थिक क्षेत्र को आर्थिक विकास का वाहक बनाना था।
  • जनवरी, 2000 से फरवरी, 2006 तक विशेष आर्थिक क्षेत्र विदेश व्यापार नीति के प्रावधानों के तहत कार्यरत रहा।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005
  • संसद द्वारा मई, 2005 में विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 पारित किया गया।
  • 23 जून, 2005 को इसे राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई।
  • व्यापक परामर्शों के बाद 10 फरवरी, 2006 से विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 प्रभावी हुआ।
  • अधिनियम के मुख्य उद्देश्य
  • वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात का संवर्धन।
  • घरेलू एवं विदेशी स्रोतों से निवेश का संवर्धन ।
  • रोजगार अवसरों का सृजन।
  • अवसंरचना सुविधाओं का विकास।
  • अतिरिक्त आर्थिक क्रिया-कलाप का सृजन।
  • अधिनियम के कुछ मुख्य प्रावधान
  • 19 सदस्यीय अंतःमंत्रिस्तरीय मंजूरी बोर्ड का गठन बोर्ड के माध्यम से विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना के लिए सिंगल विंडो मंजूरी।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास, परिचालन, रख-रखाव तथा क्षेत्र में इकाइयों एवं व्यवसाय के लिए सरल नियम।
  • विशेष आर्थिक क्षेत्र में कोई इकाई स्थापित करने के लिए सिंगल विंडो मंजूरी।
  • स्व-प्रमाणन के साथ सरल अनुपालन प्रक्रियाएं एवं प्रलेखन।
  • केंद्र एवं राज्य सरकारों से संबंधित मामलों पर सिंगल विंडो मंजूरी।
  • निष्कर्ष
  • यह विशेष आर्थिक क्षेत्र चटगांव के रास्ते पश्चिम एशियाई देशों के साथ व्यापार को सुगम बनाएगा।
  • चटगांव स्थित अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह से सबरूम में विकसित होने वाला विशेष आर्थिक क्षेत्र महज 70 किमी. की दूरी पर है।
  • भारत और बांग्लादेश सबरूम से चटगांव की दूरी तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुरूप सड़क बनाने के लिए सहमत हो चुके हैं।
  • अगले वर्ष के अंत तक फेनी नदी पर बन रहा पुल शुरू हो जाएगा।
  • यह रास्ता दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए बाजार तक पहुंच खोल देगा।
  • उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक्ट ईस्ट नीति के तहत यह पूर्वोत्तर में पहला विशेष आर्थिक क्षेत्र होगा।
  • पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ व्यापार को बढ़ावा देने के लिए  सेज सुविधाओं पर त्रिपुरा सरकार एक नई नीति बनाएगी, जिसे केंद्र सरकार ने वापस ले लिया था।

सं. राहुल त्रिपाठी