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तृतीय द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2019-20

Third Bi-Monthly Monetary Policy Statement, 2019-20
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 7 अगस्त, 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली ‘मौद्रिक नीति समिति’ (MPC) द्वारा ‘तृतीय द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2019-20’ (Third Bi-Monthly Monetary Policy Statement, 2019-20) जारी किया गया।
  • समिति द्वारा जारी वर्तमान मौद्रिक नीति वक्तव्य में ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF) के तहत नीतिगत दरों में 35 आधार अंकों की कमी करने का निर्णय लिया गया।
  • अगस्त, 2017 से वर्तमान मौद्रिक नीति तक यह लगातार चौथा अवसर है, जब समिति ने नीतिगत दरों में कमी करने का निर्णय लिया है, जबकि इस अवधि के दौरान दो बार (जून एवं अगस्त, 2018 में) ब्याज दरों में वृद्धि की गई थी। शेष समय के नीतिगत दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था।
  • महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय
  • मौद्रिक नीति समिति द्वारा ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF) के अंतर्गत ‘रेपो दर’ (Repo Rate) में तत्काल प्रभाव से 35 आधार अंकों की कमी करते हुए 5.40 प्रतिशत पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया है।
  • ध्यातव्य है कि द्वितीय द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2019-20 में ‘रेपो दर’ 5.75 प्रतिशत निर्धारित थी।
  • रेपो दर में परिवर्तन (कमी) करने के परिणामस्वरूप ‘रिवर्स रेपो दर’ (Re-RepoRate) की पूर्व के स्तर (5.50%) से परिवर्तित (कमी) होकर 5.15 प्रतिशत पर समायोजित हो गया।
  • ‘सीमांत स्थायी सुविधा दर’ (MSF) तथा बैंक दर भी 35 आधार अंकों की कमी के साथ पूर्व के स्तर (6%) से परिवर्तित (कमी) होकर प्रत्येक 5.65 प्रतिशत पर समायोजित हो गया।
  • नकद आरक्षित अनुपात (CRR) तथा एस.एल.आर. (SLR) को पूर्व के स्तर क्रमशः 4 प्रतिशत एवं 18.75 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है।
  • संभावनाएं
  • जहां जून, 2019 के दूसरे द्वैमासिक मौद्रिक नीति में संतुलित जोखिम के साथ वर्ष 2019-20 की पहली छमाही हेतु सीपीआई मुद्रास्फीति 3-3.1 प्रतिशत तथा दूसरी छमाही हेतु 3.4 – 3.7 प्रतिशत अनुमानित लगाया गया था, जबकि वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही के लिए वास्तविक हेडलाइन मुद्रास्फीति परिणाम 3.1 प्रतिशत रहा।
  • वहीं वर्तमान नीतिगत दरों में कटौती के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए संतुलित जोखिम के साथ वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए 3.1 प्रतिशत तथा वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए 3.5 – 3.7 प्रतिशत सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान लगाया गया है।
  • वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के लिए सीपीआई मुद्रास्फीति 3.6 प्रतिशत अनुमानित है।
  • मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा जून की मौद्रिक नीति में वर्ष 2019-20 के लिए संतुलित जोखिम के साथ वर्ष 2019-20 की पहली तथा दूसरी छमाही के लिए क्रमशः 6.4 – 6.7 तथा 7.2 – 7.5 प्रतिशत की सीमा में 7 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमानित था।
  • जबकि वर्तमान मौद्रिक नीति में सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर को संशोधित करते हुए 6.9 प्रतिशत अनुमानित किया गया है। साथ ही वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर को 7.4 प्रतिशत अनुमानित किया गया है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति का नरम रुख (Accomodative) बरकरार रखा है, जिससे यह संभावना बनती है कि आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर और कटौती हो सकती है।
  • महंगाई फिलहाल अगले 12 महीनों तक लक्ष्य के दायरे में रहने का अनुमान है, जबकि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में कमी तथा कारोबारी जंग से वैश्विक विकास दर और नीचे जाने का जोखिम बरकरार है।
  • वर्तमान में बैंक अब किसी एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को 20 प्रतिशत तक कर्ज दे सकेंगे, जबकि पूर्व में यह 15 प्रतिशत था।
  • प्राथमिक क्षेत्रों को कर्ज बढ़ाने के इरादे से पंजीकृत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को बैंकों द्वारा कर्ज देने की अनुमति दी गई है। बैंक एनबीएफसी (NBFC) को कृषि के लिए 10 लाख रुपये तक लघु उद्यम तथा आवास के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण दे सवंफ्रेगे।
  • आरबीआई द्वारा आवर्ती बिल अर्थात प्रत्येक महीने के भुगतान वाली सभी इकाइयों को भारतीय बिल-भुगतान प्रणाली (BBPS) के मंच से जुड़ने की छूट देने का निर्णय लिया गया है।
  • बीबीपीएस (BBPS) एक ऐसा मंच है, जिससे अभी पांच क्षेत्रों की कंपनियों  डीटीएच, बिजली, गैस, टेलीफोन और पानी के बिल जमा कराए जा सकते हैं।
  • आरबीआई ने डिजिटल लेन-देन में बढ़ती धोखाधड़ी को रोकने हेतु सेंट्रल पेमेंट फ्रॉड रजिस्ट्री बनाने का निर्णय लिया है, जिससे पेमेंट सिस्टम में धोखाधड़ी की रियल टाइम निगरानी हो सके।

सं. शिवशंकर तिवारी