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डी.एन.ए. प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018

DNA Technology (Usage and Application) Regulation Bill, 2018
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 8 जनवरी, 2019 को लोक सभा द्वारा डी.एन.ए. प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 को पारित कर दिया गया। इससे पूर्व 9 अगस्त, 2018 को केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन द्वारा इस विधेयक को लोक सभा में पेश किया गया था।
  • उद्देश्य
  • इस विधेयक का उद्देश्य आपराधिक एवं नागरिक मामलों में व्यक्तियों की पहचान स्थापित करने के लिए डी.एन.ए. प्रौद्योगिकी के उपयोग को विनियमित करना है।
  • डी.एन.ए. डेटा का उपयोग
  • अनुसूची में सूचीबद्ध मामलों के संबंध में यह विधेयक व्यक्तियों की पहचान के लिए डी.एन.ए. परीक्षण को विनियमित करता है। इसमें भारतीय दंड संहिता, 1860 (I.P.C. 1860) के साथ-साथ अन्य कानूनों जैसे कि अनैतिक यातायात (रोकथाम) अधिनियम, 1956, मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत अपराध शामिल हैं।
  • अनुसूची कुछ नागरिक मामलों में भी डी.एन.ए. परीक्षण के लिए अनुमति प्रदान करता है।
  • इनमें पितृत्व विवाद, वंशावली से संबंधित मुद्दे, आव्रजन या उत्प्रवास, सहायक पुनरुत्पादक प्रौद्योगिकी, मानव अंगों का प्रत्यारोपण और व्यक्तिगत पहचान की स्थापना जैसे मामले शामिल हैं।
  • शारीरिक पदार्थों को एकत्र करने हेतु सहमति
  • डी.एन.ए. प्रोफाइल तैयार करते समय जांच प्राधिकारी वर्ग द्वारा व्यक्तियों के शारीरिक पदार्थ एकत्र किए जा सकते हैं।
  • सात वर्ष तक की सजा वाले अपराध के लिए गिरफ्तार व्यक्ति के शारीरिक पदार्थों को एकत्र करने से पूर्व उसकी लिखित सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
  • यदि सहमति नहीं प्राप्त होती है, तो प्राधिकारी एक मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकते हैं, जो व्यक्ति से शारीरिक पदार्थों को लेने का आदेश दे सकता है, यदि वह संतुष्ट है कि डी.एन.ए. कथित अपराध में व्यक्ति की भागीदारी की पुष्टि या खंडन करेगा।
  • यदि व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध में सात वर्ष से अधिक के कारावास या मौत की सजा होती है, तो फिर सहमति की आवश्यकता नहीं होगी।
  • यदि कोई व्यक्ति पीड़ित (Victim) है या लापता व्यक्ति का रिश्तेदार है, तो प्राधिकारियों को शारीरिक पदार्थों को एकत्र करने के लिए उनकी लिखित सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
  • अल्पवयस्क या दिव्यांग व्यक्ति के मामले में, माता-पिता या अभिभावक की लिखित सहमति की आवश्यकता होती है।
  • यदि सहमति नहीं दी जाती है, तो प्राधिकारी एक मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकते हैं, जो व्यक्ति के शारीरिक पदार्थों को लेने का आदेश दे सकता है।
  • डी.एन.ए. डेटा बैंक
  • केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय डी.एन.ए. डेटा बैंक तथा प्रत्येक राज्य अथवा दो या अधिक राज्यों के लिए क्षेत्रीय डी.एन.ए. डेटा बैंकों की स्थापना आवश्यकतानुसार करेगी।
  • प्रत्येक डी.एन.ए. डेटा बैंक को डी.एन.ए. प्रयोगशाला द्वारा किए गए डी.एन.ए. परीक्षण के आधार पर निम्न सूचकांकों को बनाए रखना आवश्यक है-(i) अपराध दृश्य सूचकांक, (ii) ‘संदिग्ध’ या ‘विचाराधीन’ का सूचकांक,  (iii) अपराधियों का सूचकांक, (iv) लापता व्यक्तियों का सूचकांक और  (v) अज्ञात मृत व्यक्तियों का सूचकांक।
  • डी.एन.ए. विनियामक बोर्ड
  • विधेयक में एक डी.एन.ए. विनियामक बोर्ड की स्थापना का प्रावधान है, जो डी.एन.ए. डेटा बैंकों और डी.एन.ए. प्रयोगशालाओं की निगरानी करेगा।
  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव, इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होंगे।
  • इसके अतिरिक्त बोर्ड में 12 सदस्य शामिल होंगे, जो हैं-(i) जीव विज्ञान संबंधी विशेषज्ञ, (ii) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, डी.एन.ए. फिंगर प्रिंटिंग और डॉयग्नोस्टिक्स केंद्र, केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक, (iii) राष्ट्रीय जांच एजेंसी के महानिदेशक और (iv) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य।
  • बोर्ड को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि डेटा बैंक, डी.एन.ए. प्रयोगशालाओं और अन्य व्यक्तियों के साथ डी.एन.ए. प्रोफाइल से संबंधित सभी सूचनाएं गोपनीय रखी जाएं।
  • डी.एन.ए. डेटा का उपयोग केवल व्यक्तियों की पहचान के लिए किया जा सकता है।
  • अपराधों के लिए दंड
  • विभिन्न अपराधों जैसे-डेटा बैंक से सूचनाओं का अनधिकृत खुलासा, प्राधिकरण के बिना डेटा बैंक से जानकारी प्राप्त करना या प्राधिकरण के बिना डी.एन.ए. नमूने का उपयोग करना, के लिए तीन वर्ष तक का कारावास और एक लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है।
  • इसके अलावा, जानबूझकर छेड़छाड़ या जैविक सबूतों को नष्ट करने के लिए पांच वर्ष के कारावास के साथ-साथ दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

लेखक-काली शंकर ‘शारदेय’