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टाइफून हगीबिस

Typhoon Hagibis
  • भूमिका
  • हवाओं का परिवर्तनशील और अस्थिर चक्र, जिसके केंद्र में निम्न वायुदाब तथा केंद्र से बाहर उच्च वायुदाब होता है, उसे चक्रवात (Cyclone) कहते हैं। पृथ्वी के घूर्णन गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में इसकी दिशा घड़ी की सुइयों के विपरीत (वामावर्त) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में घड़ी की सुइयों की दिशा (दक्षिणावर्त) में होती है। अवस्थिति के आधार पर चक्रवात को दो श्रेणियों में विभक्त किया गया है, इसमें पहला शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclone) तथा दूसरा उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclone) है। हाल ही में जापान में आया प्रलयकारी टाइफून हगीबिस (Typhoon Hagibis) एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात था, जिससे व्यापक स्तर पर जनजीवन प्रभावित हुआ है।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 12 अक्टूबर, 2019 को जापान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित इजु प्रायद्वीप (Izu Peninsula) पर विनाशकारी टाइफून हगीबिस ने दस्तक दी।
  • इसे पिछले 60 वर्षों में जापान का सबसे प्रलयकारी तूफान माना जा रहा है।
  • प्रमुख तथ्य
  • टाइफून हगीबिस का नामकरण फिलीपींस (Philippines) द्वारा किया गया, जिसका फिलीपींस की भाषा में अर्थ होता है ‘गति’(Speed)।
  • ध्यातव्य है कि फिलीपींस ने स्थानीय स्तर पर इसका नाम ‘पेरला’ (Perla) रखा है।
  • गौरतलब है कि उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (लगभग 5 – 30 डिग्री उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्द्धों) में विकसित होने वाले चक्रवातों को उष्णकटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है।
  • इसे अमेरिका में हरिकेन और टारनेडो, ऑस्ट्रेलिया में विलीविलीज, चीन तथा जापान में टायफून तथा भारत में चक्रवात कहा जाता है।
  • आवश्यक दशाएं
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात अत्यधिक विनाशकारी वायुमंडलीय तूफान होते हैं, जिनकी उत्पत्ति कर्क एवं मकर रेखाओं के मध्य महासागरीय क्षेत्र में होती है, तत्पश्चात इसका प्रवाह स्थलीय क्षेत्र की तरफ होता है।
  • इनकी उत्पत्ति व विकास के लिए अनुकूल स्थितियां हैं :-

(i) वृहत् समुद्री सतह; जहां तापमान 27° सेल्सियस से अधिक हो।

(ii) कोरिऑलिस बल का होना।

(iii)  ऊर्ध्वाधर पवनों की गति में अंतर कम होना।

(iv)  कमजोर निम्न दाब क्षेत्र या निम्न स्तर का चक्रवातीय परिसंचरण का होना।

(v) समुद्री तंत्र पर ऊपरी अपसरण।

  • नामकरण
  • चक्रवातों का नामकरण उनके स्थान, विशेषता और विस्तार के आधार पर किया जाता है।
  • इसके लिए अक्षर प्रणाली (A, B, C, D…) का प्रयोग किया जाता है तथा इस प्रणाली में Q, U, X तथा Z अक्षर को शामिल नहीं किया गया है।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organization-WMO) ने नामों की 6 सूचियां तैयार की हैं, इन नामों को 6 वर्ष बाद पुनः प्रयोग किया जाता है।
  • गौरतलब है कि इस सूची का क्रियान्वयन सदस्य देशों द्वारा सुझाव गए नामों के अनुसार किया जाता है।
  • ज्ञातव्य है कि जो चक्रवात अत्यधिक विनाशकारी होता है, उसका नाम इस सूची से हटा दिया जाता है।
  • निष्कर्ष
  • जापान के सेंदाई, मियागी (Miyagi) में मार्च, 2015 में आयोजित आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन (United Nations World Conference on Disaster Risk Reduction) में सेंदाई फ्रेमवर्क, 2015-2030 (Sendai Framework, 2015-2030) को अपनाया गया। इसका उद्देश्य आपदा के पूर्व, आपदा के समय तथा आपदा के पश्चात विश्वस्तरीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर आपदा से होने वाली व्यापक जन-धन हानि को न्यून करना है। यह दुर्भाग्य की बात है कि जिस देश में (सेंदाई, जापान) वैश्विक आपदा को प्रभावहीन करने के लिए 15 वर्षीय रणनीति तैयार की गई, आज वही देश आपदा से सर्वाधिक प्रभावित है।

संसुनीत कुमार द्विवेदी