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जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2019

Climate Change Performance Index
  • सूचकांक
  • ‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक’ (Climate Change Performance Index : CCPI) अंतरराष्ट्रीय जलवायु राजनीति (International Climate Politics) में पारदर्शिता बढ़ाने हेतु परिकल्पित एक उपकरण है।
  • यह सूचकांक मानकीकृत मानदंडों के आधार पर 56 देशों और यूरोपीय संघ के जलवायु संरक्षण के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हुए तुलनात्मक अध्ययन करता है, जो संयुक्त रूप से वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जनों के लगभग 90 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं।
  • यह सूचकांक पहली बार वर्ष 2005 में जारी किया गया था।
  • उद्देश्य
  • इस सूचकांक का उद्देश्य जलवायु संरक्षण पर महत्वाकांक्षी कार्यवाही करने में असफल देशों पर राजनीतिक एवं सामाजिक दबाव डालना है।
  • साथ ही उन देशों को रेखांकित (Highlight) करना है, जिन्होंने जलवायु संरक्षण पर सबसे अच्छा काम किया है।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 10 दिसंबर, 2018 को ‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2019’ काटोवाइस (पोलैंड) में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (Cop-24) के दौरान जारी किया गया।
  • ‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2019’ जर्मनवाच (German watch), ‘न्यू क्लाइमेट इंस्टीट्यूट’ और ‘क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क’ (Climate Action Network) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया।
  • रैंकिंग
  • वर्ष 2019 के ‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक’ में 76.28 अंकों के साथ स्वीडन शीर्ष स्थान पर है।
  • शीर्ष तीन स्थान रिक्त रखे जाने के कारण स्वीडन सूचकांक में चतुर्थ क्रम पर है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम तीन स्थानों पर कोई भी देश स्थान नहीं बना सका है, क्योंकि पेरिस समझौता लागू होने के बाद भी किसी देश द्वारा जलवायु परिवर्तन के खतरनाक प्रभावों (तापमान को 2°C या 1.5°C की सीमा तक बनाए रखने) की रोकथाम हेतु पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
  • इस सूचकांक में मोरक्को को पांचवां (समग्र रूप से द्वितीय) एवं लिथुआनिया को छठा (समग्र रूप से तृतीय) स्थान प्राप्त हुआ है।
  • विगत वर्ष भी स्वीडन सूचकांक में शीर्ष (समग्र रूप से चौथा स्थान) स्थान पर ही था।
  • अफ्रीकी देश मोरक्को ने सूचकांक में लगातार अपनी वर्धमान प्रवृत्ति बनाए रखी है।
  • विगत वर्ष मोरक्को का सूचकांक में तृतीय स्थान (समग्र रूप से छठा स्थान) था।
  • विश्व के दो सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों यथा- चीन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) का सूचकांक में क्रमशः 33वां (स्कोर-49.60) एवं 59वां (स्कोर-18.82) स्थान है।
  • सूचकांक में सबसे नीचे सऊदी अरब (60वां स्थान), यूएसए (59वां स्थान), एवं ईरान (58वां स्थान) स्थित हैं, जिन्हें सबसे खराब (Very low) रेटिंग प्रदान की गई है।
  • सूचकांक में भारत
  • वर्ष 2019 के जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में भारत को 11वां स्थान (स्कोर-62.93) प्राप्त हुआ है।
  • इस वर्ष के सूचकांक में भारत की स्थिति में गत वर्ष की तुलना में तीन स्थानों का सुधार हुआ है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के सूचकांक में भारत का 14वां स्थान था।
  • सूचकांक में भारत के प्रदर्शन में सुधार का कारण नवीकरणीय ऊर्जा श्रेणी में सुधार है, जिसके परिणामस्वरूप भारत मध्यम प्रदर्शन करने वाले देशों के समूह में शामिल हो गया है।
  • सूचकांक, 2019 में भारत की रैंक में सुधार इंगित करता है कि भारत सरकार ग्रीन हाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन को कम करने हेतु तेजी से प्रयासरत है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • रैंकिंग परिणाम किसी देश के समग्र प्रदर्शन से परिभाषित किए गए हैं, जो चार श्रेणियों – ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन (40%), नवीकरणीय ऊर्जा (20%), ऊर्जा उपयोग (20%) तथा जलवायु नीति (20%) के अंतर्गत 14 संकेतकों से संबंधित हैं।
  • सूचकांक में शामिल देशों की रेटिंग को भी 6 श्रेणियों से प्रदर्शित किया गया है। रेटिंग की 5 श्रेणियां- अत्यधिक उच्च (Very high), उच्च (High), मध्यम (Medium), निम्न (Low) तथा अत्यधिक निम्न (Very low) हैं। जबकि 6वीं श्रेणी में ऐसे देश शामिल हैं, जिन्हें मूल्यांकन में शामिल नहीं किया गया है।

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक, 2019

रैंक देश स्कोर
4 स्वीडन 76.28
5 मोरक्को 70.48
6 लिथुआनिया 70.47
7 लाटविया 68.31
8 यूनाइटेड किंगडम 65.92
9 स्विट्जरलैंड 65.42
10 माल्टा 65.06