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जलवायु परिवर्तन पर बृहद प्रकाशन

Massive publication on climate change
  • पृष्ठभूमि
  • जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे ज्वलंत पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है। जलवायु परिवर्तन के कारण लोगों एवं पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है। इसका प्रभाव ग्लेशियरों के पिघलने, ध्रुवीय बर्फ में खंडित होने, परिहिमन क्षेत्र के विगलन, मानसून के तरीकों में परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, बदलते पारिस्थितिक तंत्र एवं घातक गर्म तरंगों के रूप में देखा जा सकता है। इस परिवर्तन के लिए एक प्रकार से प्राकृतिक गतिविधियां तथा मानवीय क्रिया-कलाप ही जिम्मेदार हैं। इन जलवायुवीय परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संस्थाओं एवं सरकारों द्वारा सम्मेलन/ बैठकें आयोजित किए जाते हैं तथा रिपोर्ट भी प्रकाशित की जाती है। हाल ही में भारत सरकार द्वारा भी जलवायु परिवर्तन से संबंधित एक बृहद रिपोर्ट प्रकाशित की गई है।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 12 फरवरी, 2019 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन की दिशा में की गई अनेक पहलों के बारे में ‘‘भारत-जलवायु समाधानों का नेतृत्वकर्ता’’ (India-Spearheading Climate Solutions) नामक प्रकाशन जारी किया।
  • इस प्रकाशन के अनुसार, दिसंबर, 2018 में भारत द्वारा UNFCCC को सौंपी गई दूसरी द्वि-वार्षिक अद्यतन रिपोर्ट में ये तथ्य दर्शाया गया है कि भारत के सकल घरेलू उत्पादन की उत्सर्जन तीव्रता वर्ष 2005 से 2014 के बीच घटकर 21 प्रतिशत हो गई है।
  • विशेषताएं
  • इस प्रकाशन में जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन के लिए विभिन्न क्षेत्रों के तहत भारत द्वारा की गई प्रमुख कार्यवाहियों का भी उल्लेख किया गया है।
  • इस प्रकाशन के अनुसार, भारत विश्व में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के विविध पहलुओं पर कार्य करने वाला विश्व का एक सक्रिय देश बन गया है।
  • इस प्रकाशन में न केवल जलवायु कार्रवाई के बारे में सरकारी उपलब्धियों को उजागर किया गया है, बल्कि भविष्य के लिए सरकार द्वारा की गई तैयारियों का भी उल्लेख किया गया है।
  • इस प्रकाशन में जिन पहलों का उल्लेख है, वे सतत विकास प्राथमिकताओं के साथ अच्छा संतुलन कायम करते हुए जलवायु परिवर्तन की चिंताओं का समाधान करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
  • रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
  • पिछले 4 वर्षों के दौरान राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई अनेक स्वच्छ और हरित विकास पहलों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • ई-मोबिलिटी, हरित ढुलाई, नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, वनीकरण और जल आदि विभिन्न क्षेत्रों में अनेक नई नीतियां और पहले शुरू की गई हैं ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम-से-कम किया जा सके।
  • इस प्रकाशन में शामिल की गई कुछ प्रमुख पहलें इस प्रकार हैं- जलवायु परिवर्तन पर भारत की राष्ट्रीय कार्ययोजना (एनएपीसीसी), अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए), जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्ययोजना (एसएपीसीसी), ई-मोबिलिटी के लिए फेम योजना, स्मार्ट शहरों के लिए – कायाकल्प और शहरी परिवर्तन हेतु अटल मिशन (अमृत), प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना – स्वच्छ कुकिंग ईंधन तक पहुंच, उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत मिशन।
  • वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य, स्मार्ट शहरों, विद्युत वाहनों, ऊर्जा दक्षता पहलों तथा अप्रैल, 2020 तक भारत स्टेज-IV से भारत स्टेज-VI उत्सर्जन मानदंडों में रूपांतरण जैसे कार्यों को सक्रियतापूर्वक शुरू किया गया है ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम-से-कम किया जा सके।
  • वर्तमान में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 74 गीगावॉट से अधिक है, जिसमें 25 गीगावॉट सौर ऊर्जा भी शामिल है।
  • भारत का वन और वृक्ष क्षेत्र वर्ष 2015 के आकलन की तुलना में 1 प्रतिशत बढ़ा है।
  • एलईडी वितरण के लिए उजाला जैसी योजना ने 320 मिलियन की संख्या को पार कर लिया है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली महिलाओं के लिए 63 मिलियन से भी अधिक परिवारों को स्वच्छ कुकिंग चूल्हों का वितरण कर दिया गया है।