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छठा द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2018-19

Sixth Bi-Monthly Monetary Policy Statement, 2018-19
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 7 फरवरी, 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली ‘मौद्रिक नीति समिति’ (MPc) द्वारा ‘छठा द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2018-19’ (Sixth Bi-Monthly Monetary Policy Statement, 2018-19) जारी किया गया।
  • मौद्रिक नीति समिति द्वारा लिए गए निर्णय के तहत ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF) के अंतर्गत नीतिगत दरों में परिवर्तन (वृद्धि/कमी) करने का निर्णय लिया गया।
  • मुख्य निर्णय
  • मौद्रिक नीति समिति द्वारा ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ के अंतर्गत रेपो दर (Repo Rate) में तत्काल प्रभाव से 25 आधार अंकों की कमी करते हुए रेपो दर को 6.25 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया।
  • ध्यातव्य है कि पांचवीं ‘द्वैमासिक मौद्रिक नीति’ में रेपो दर 6.50 प्रतिशत निर्धारित थी।
  • रेपो दर में परिवर्तन करने के परिणामस्वरूप रिवर्स रेपो दर (Re-Repo Rate) भी पूर्व के 6.25 प्रतिशत से परिवर्तित होकर 6 प्रतिशत पर समायोजित हो गई।
  • सीमांत स्थायी सुविधा दर (MSF) तथा बैंक दर भी 25 आधार अंकों की कमी के साथ पूर्व के स्तर 6.75 प्रतिशत से परिवर्तित होकर प्रत्येक 6.5 प्रतिशत पर समायोजित हो गए।
  • नकद आरक्षित अनुपात (CRR) को पूर्व के स्तर 4 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है, जबकि एसएलआर (SLR) में 25 आधार अंकों की कमी हुई है, जिससे यह पूर्व के स्तर 19.50 प्रतिशत से कम होकर 19.25 प्रतिशत हो गया है।
  • मौद्रिक नीति का प्रभाव
  • रेपो दर ब्याज की वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक, बैंकों को ऋण (Fund) प्रदान करता है। चूंकि रेपो दर घटने से बैंकों को आरबीआई से सस्ता ऋण प्राप्त हो सकेगा, इसलिए बैंक भी अब कम ब्याज दर पर ऋण (Loan) दे पाएंगे। इससे नया ऋण सस्ता होगा, जबकि ऋण ले चुके लोगों को या तो ईएमआई (Equated Monthly Income : EMI) में या पुनर्भुगतान अवधि (Repayment Period) में कटौती का फायदा भी मिल सकता है।
  • समिति द्वारा लिए गए निर्णय के तहत मौद्रिक नीति के रुख को ‘नपी-तुली  कठोरता’  (Calibrated tightening) से ‘तटस्थ’ में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया है, क्योंकि मुद्रास्फीति दर नीचे बनी हुई है।
  • महंगाई पर नजर
  • छः सदस्यीय एमपीसी (MPC) की बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की। आरबीआई गवर्नर बनने के बाद यह उनकी पहली एमपीसी बैठक थी।
  • समिति ने कहा है कि ये फैसले मध्यम अवधि (Medium Term)  में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर को 4 प्रतिशत (2 प्रतिशत कम/ज्यादा) तक रखने के लक्ष्य के मद्देनजर लिए गए हैं।
  • खाद्य कीमतों में लगातार गिरावट के चलते खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर, 2018 के 3.4 प्रतिशत से घटकर दिसंबर, 2018 में 2.2 प्रतिशत रही, जो 18 माह में सबसे निम्न है।
  • अन्य संबंधित तथ्य
  • वर्तमान मौद्रिक नीति चालू वित्त वर्ष की छठीं और अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा है।
  • आरबीआई ने पिछले तीन अवसरों पर अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया था।
  • अगस्त, 2017 से लेकर वर्तमान मौद्रिक नीति तक यह पहला मौका है, जब केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में कमी की है, जबकि इस दौरान दो बार (जून एवं अगस्त, 2018 में) ब्याज दर में वृद्धि की गई थी। शेष समय में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया था।
  • दिसंबर, 2018 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में परिवर्तन नहीं किया था, लेकिन यह अनुमान व्यक्त किया था कि अगर मुद्रास्फीति का जोखिम नहीं हुआ तो वह दरों में कटौती करेगा।
  • वित्त वर्ष (2019-20) की पहली छमाही में मुद्रास्फीति 3.2 से 3.4 प्रतिशत तथा तीसरी तिमाही में 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  • जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष (2019-20) में 7.4 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि प्रथम छमाही में 7.2-7.4 प्रतिशत तक तथा तीसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
  • 1 फरवरी, 2019 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 400.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
  • नीतिगत रेपो दर को कम करने के संबंध में एमपीसी के छः सदस्यों में से चार सदस्यों ने नीतिगत दर में कटौती का समर्थन किया, जबकि दो अन्य सदस्यों डॉ. चेतन घाटे एवं डॉ. विरल वी. आचार्य ने नीतिगत दर को अपरिवर्तित रखने के पक्ष में मतदान किया।