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चार नए उत्पादों को जीआई टैग

Four new products GI tag
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • अगस्त, 2019 में चेन्नई स्थित भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री कार्यालय भारत सरकार द्वारा 4 नए उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI : Geographical Indication) प्रदान किया गया।
  • जिनमें डिंडीगुल (तमिलनाडु) जिले के पलानी शहर के पंचामिर्थम (पंचामृतम), मिजोरम राज्य का तल्लोहपुआन (वस्त्र) एवं मिजोपुआनचेई (शॉल) और केरल के तिरुर पान का पत्ता शामिल है।
  • पलानी पंचामिर्थम
  • पलानी पंचामिर्थम पलानी जिले में अवस्थित अरुल्मिगु धान्दयुथापनी स्वामी मंदिर के प्रमुख देवता’ भगवान धान्दयुथापनी (मुरुगन, कार्तिकेय) स्वामी के अभिषेक में प्रयुक्त पदार्थ है।
  • इस पदार्थ को पांच प्राकृतिक पदार्थों यथा- केला, गुड़-चीनी, गाय के घी, शहद और इलायची के निश्चित अनुपात से तैयार किया जाता है।
  • तल्लोहपुआन मिजोरम
  • तल्लोहपुआन मिजोरम का एक विशिष्ट प्रकार का वस्त्र है, जो हाथ से की गई बुनाई, जटिल डिजाइन तथा मजबूती के लिए जाना जाता है।
  • इसे पूरे मिजोरम राज्य में तैयार किया जाता है, आइजोल तथा थेनजोल इसके प्रमुख उत्पादक केंद्र हैं।
  • मिजोपुआनचेई
  • मिजोपुआनचेई मिजो शॉल वस्त्रों में सबसे रंगीन वस्त्र है।
  • यह मिजोरम की प्रत्येक महिला का एक अनिवार्य वस्त्र है, जो कमर के चारों ओर लपेटा जाता है।
  • ध्यातव्य है कि यह शॉल मिजोरम में पारंपरिक त्यौहारों तथा शादी-विवाह जैसे अवसरों पर पोशाक के रूप में उपयोग की जाती है।
  • तिरुर पान पत्ता (केरल)
  • तिरुर पान के पत्ते अपने अच्छे स्वाद तथा विशिष्ट औषधीय गुणों के कारण जाने जाते हैं।
  • इनका उपयोग पान मसाला बनाने में किया जाता है।
  • इसके कई औषधीय, सांस्कृतिक एवं औद्योगिक उपयोग हैं।
  • इसकी खेती मुख्यतः केरल के तनूर, तिरुरांगडी कुट्टिपुरम, मलपुरम जिलों में की जाती है।
  • GI टैग के बारे में
  • जीआई टैग किसी उत्पाद की गुणवत्ता व विशिष्टता का आश्वासन होता है।
  • जीआई टैग किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित होने वाले उन उत्पादों को प्रदान किया जाता है, जिनमें वहां की स्थानीय विशेषताएं अंतर्निहित हों।
  • किसी विशेष वस्तु की गुणवत्ता को व्यक्त करने के लिए यह आवश्यक है कि ग्राहकों को उसके उत्पादन स्थान के बारे में भी बताया जाए।
  • अतः किसी वस्तु/उत्पाद की विशेषता बताने के लिए किसी स्थान विशेष के नाम का प्रयोग ‘भौगोलिक संकेतक’ कहा जाता है।
  • भौगोलिक संकेतकों को ट्रिप्स करार के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकारों के घटक के रूप में शामिल किया जाता है।
  • भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्य के रूप में ‘माल के भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999’ को लागू किया है।
  • यह अधिनियम वर्ष 2003 से प्रभाव में है।
  • अन्य तथ्य
  • वर्ष 2003 से अब तक भौगोलिक संकेतकों के रूप में 354 उत्पाद पंजीकृत किए जा चुके हैं।
  • वर्ष 2004 में ‘दार्जिलिंग की चाय’ जीआई टैग प्राप्त करने वाला पहला भारतीय उत्पाद है।
  • हाल ही में कर्नाटक की गुलबर्गा तूर दाल तथा हमारम (Hmaram) हैंडीक्रॉफ्ट को जीआई टैग प्रदान किया गया।

संपवन कुमार तिवारी