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गोल्डेन लंगूर : मनरेगा से प्रथम गैर-मानव लाभार्थी

Golden Langoor: First non-human beneficiary from MNREGA
  • वर्तमान संदर्भ
  • 5 जून, 2019 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम के बोंगाईगांव जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत एक बृहद् वृक्षारोपण परियोजना प्रारंभ की गई।
  • उद्देश्य
  • इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य असम राज्य में पाए जाने वाले गोल्डेन (सुनहरे) लंगूर को लाभान्वित करना एवं भोजन की तलाश के दौरान दुर्घटना से होने वाली इनकी मौतों में कमी लाना है।
  • परियोजना
  • इस परियोजना के अंतर्गत बोंगाईगांव जिला स्थित काकोईजाना आरक्षित वन (Kakoijana Reserve Forest) में जिला प्रशासन, असम वन विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वृक्षारोपण किया जाएगा।
  • इस परियोजना के अंतर्गत फलों के वृक्ष जैसे आम, अमरूद, जामुन आदि का वृक्षारोपण किया जाएगा।
  • मनरेगा के अंतर्गत प्रारंभ की गई इस परियोजना के अंतर्गत 27.24 लाख रुपये की लागत से लगभग 10,575 पौधों का वृक्षारोपण काकोईजाना आरक्षित वन क्षेत्र में किया जाएगा।
  • इन वृक्षों से उत्पन्न होने वाले फलों पर मुख्यतः इन लंगूरों का ही अधिकार होगा तथा इन फलों को लंगूरों को भोजन हेतु प्रदान किया जाएगा।
  • इसके साथ ही गोल्डेन लंगूर मनरेगा परियोजना से लाभान्वित होने वाला प्रथम गैर-मानव एवं प्राइमेट (Primate) लाभार्थी बन गया है, जिसे प्रत्यक्षतः लाभ पहुंचाने हेतु मनरेगा परियोजना के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्य किया जाएगा।
  • गोल्डन लंगूर
  • सुनहरा या गोल्डेन लंगूर (Trachypithecus Geei) भूटान एवं भारत (असम) में पाया जाने वाला प्राइमेट (Primate) है।
  • उपर्युक्त क्षेत्रों में यह 3000 मीटर की ऊंचाई तक पाया जाता है।
  • इनकी घटती जनसंख्या के कारण यह लंगूर ‘अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ’ (IUCN : International Union for Conservation of Nature) द्वारा जारी ‘रेड लिस्ट’ में ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) वर्ग में शामिल है।
  • साथ ही इसे ‘IUCN’ द्वारा ‘विश्व के 25 सर्वाधिक संकटग्रस्त प्राइमेट’ की सूची में भी शामिल किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त गोल्डेन लंगूर को संरक्षित करने हेतु भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध किया गया है।
  • असम में मुख्यतः काकोईजाना आरक्षित वन क्षेत्र एवं चक्रशिला वन्यजीव अभयारण्य को गोल्डेन लंगूर के संरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में जाना जाता है।
  • आई (Aie) नदी के तट पर स्थित काकोईजाना वन क्षेत्र को 29 अप्रैल, 1966 को आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया था।
  • असम के धुबरी एवं कोकराझार जिलों में स्थित चक्रशिला वन्यजीव अभयारण्य भारत में गोल्डेन लंगूर का दूसरा प्रसिद्ध प्राकृतिक आवास है।
  • इस अभयारण्य के निकट धीर बिल (Dheer Beel) एवं दीपलाई बिल (Diplai Beel) नामक झील अवस्थित है।
  • ध्यातव्य है कि भारत में ‘गोल्डेन लंगूर’ का वितरण मुख्यतः मानस (पूर्व में), संकोश (पश्चिम में) तथा ब्रह्मपुत्र (दक्षिण में) नदियों के मध्य है।
  • इससे इतर ये लंगूर ब्रह्मपुत्र नदी में स्थित उमानंदा नदी द्वीप (गुवाहाटी) एवं त्रिपुरा स्थित सिपाहीजाला वन्यजीव अभयारण्य में भी पाए जाते हैं।
  • ये लंगूर मुख्यतः आर्द्र सदाबहार वनों एवं उष्णकटिबंधीय अर्द्ध सदाबहार वनों में निवास करते हैं।

संललिन्द्र कुमार