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गिग इकोनॉमी (Gig Economy)

Gig Economy
  • अभिप्राय
  • व्यक्ति की कार्यदक्षता पर आधारित श्रम-व्यवस्था वाली मुक्त बाजार प्रणाली को गिग इकोनॉमी कहते हैं।
  • इसमें स्थायी नौकरी के स्थान पर स्वच्छंद (Freelance) कार्यों वाले रोजगार की अस्थायी व्यवस्था होती है।
  • इसके साथ ही इसके द्वारा प्रोजेक्ट आधारित रोजगार को प्राथमिकता दी जाती है। इससे ‘शॉर्ट टर्म वर्क’ (Short turm work) और ‘वर्क फ्रॉम होम’ (Work from home) के प्रति रुझान बढ़ता है।
  • लाभ
  • गिग इकोनॉमी कार्यालय आने-जाने के खर्च, समय एवं समस्या से मुक्ति दिलाकर मनचाहा कार्य (कहीं भी, कभी भी) करने की आजादी प्रदान करता है।
  • यह कंपनी के नियमों एवं बंदिशों से मुक्त होकर कार्य करने के विभिन्न क्षेत्र एवं विकल्प को उपलब्ध कराता है।
  • इतना ही नहीं गिग इकोनॉमी द्वारा एक साथ कई प्रकार के कार्य करके अधिकतम आय प्राप्त किया जा सकता है।
  • हानियां
  • जहां तक बात गिग इकोनॉमी से हानि की है, तो इससे लंबे समय तक बेरोजगारी तथा अनिश्चित आमदनी का भय सदैव बना रहता है।
  • इस व्यवस्था का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसमें सहयोगियों को पेंशन व अन्य परिलब्धियां कंपनी द्वारा नहीं प्रदान की जाती हैं।
  • इसका सर्वाधिक प्रभाव अकुशल श्रमिकों पर पड़ता है, क्योंकि उनके लिए कुशल श्रमिकों की अपेक्षा अवसर की उपलब्धता कम है।
  • इससे सामाजिक – आर्थिक असमानता बढ़ने का खतरा सदैव बना रहता है, जिससे समावेशी विकास प्रभावित होता है।
  • वैश्विक स्थिति
  • गिग इकोनॉमी द्वारा जहां एक ओर विकसित देशों में स्वच्छंदतापूर्वक कार्य करने के प्रति रुझान बढ़ाता है, वहीं दूसरी ओर विकासशील देशों में मजबूरीवश कार्य करने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है।
  • इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी इत्यादि देश तेजी के साथ गिग इकोनॉमी की तरफ बढ़ रहे हैं।
  • भारत की स्थिति
  • गौरतलब है कि अमेरिका, जहां श्रमशक्ति का 31 प्रतिशत भाग गिग इकोनॉमी से संबंध रखता है, वहीं भारत में यह आंकड़ा 75 प्रतिशत के लगभग है।
  • परंतु आर्थिक परिदृश्य में बड़ा अंतर होने के कारण भारत को अमेरिका की अपेक्षा कम लाभ प्राप्त हो रहा है।
  • इसका प्रमुख कारण अमेरिका में योग्य, कुशल तथा दक्ष व्यक्ति की अधिकता तथा विविध कार्य करने की स्वतंत्रता है।
  • इसके विपरीत भारत में बड़ी संख्या में लोग इस व्यवस्था का हिस्सा इसलिए हैं, क्योंकि उनके पास न तो दक्षता है और न कार्य करने का कोई दूसरा विकल्प।
  • निष्कर्ष
  • डिजिटल युग के उद्भव के कारण गिग इकोनॉमी की बढ़ती लोकप्रियता से स्पष्ट है कि आने वाले समय में इसका क्षेत्र व्यापक होगा।
  • इसलिए अर्थव्यवस्था की समृद्धि के लिए भारत को भी कौशल विकास पर ध्यान देने हेतु अग्रिम रणनीति पर विचार करना आवश्यक है।

संसुनीत कुमार द्विवेदी