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कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती

Corporate tax cuts 2019
  • भूमिका
  • निगम कर (Corporate Tax) एक प्रत्यक्ष कर है, जो कंपनियों के लाभ पर लगाया जाता है। इसे ‘कंपनी लाभ कर’ भी कहा जाता है। यह केंद्र सरकार द्वारा आरोपित एवं एकत्रित किया जाता है तथा राज्यों के मध्य विभाजित नहीं किया जाता है। वर्तमान में निगम कर भारत सरकार के राजस्व प्राप्त करने का सबसे ब़डा स्रोत बना हुआ है। भारत की विकास दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है, जो पिछले 6 वर्षों में सबसे न्यूनतम स्तर पर है। कृषि क्षेत्र से लेकर विनिर्माण उद्योग तक अलग-अलग क्षेत्रों में आर्थिक मंदी की स्थिति व्याप्त है। अतः भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मकता लाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती करने का निर्णय लिया गया है।
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 20 सितंबर, 2019 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax-GST) परिषद की बैठक में आर्थिक विकास, निवेश तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निगम कर (Corporate Tax) की दर में कटौती की घोषणा की है।
  • निगम कर कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत पंजीकृत निजी एवं सार्वजनिक दोनों प्रकार की कंपनियों एवं निगमों पर लगाया जाता है।
  • प्रमुख तथ्य
  • कंपनियों के लिए निगम कर की आधार दर 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दी गई है। इससे निगम कर की प्रभावी दर 34.94 प्रतिशत से कम होकर 25.17 प्रतिशत हो गई है।, जिसमें अधिभार एवं उपकर भी शामिल हैं।
  • इसके अतिरिक्त इन कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (Minimum Alternative Tax-MAT) भी देने की आवश्यकता नहीं है।
  • विनिर्माण के क्षेत्र में अक्टूबर, 2019 या उसके बाद स्थापित होने वाली तथा 31 मार्च, 2023 से पूर्व उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों के लिए निगम कर की दर 25 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है।
  • इससे इन कंपनियों के लिए प्रभावी निगम कर की दर 29.12 प्रतिशत से कम होकर 17.01 प्रतिशत पर आ जाएगी। इन कंपनियों को भी न्यूनतम वैकल्पिक कर से छूट प्राप्त है।
  • इसके अतिरिक्त कॉर्पोरेट टैक्स के तहत कर छूट और प्रोत्साहन का लाभ उठा रही कंपनियों को राहत देने के लिए न्यूनतम वैकल्पिक दर (MAT) को 18.5 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की गई है।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF: International Monetary Fund) ने भारत द्वारा की गई निगम कर में कटौती का समर्थन करते हुए कहा है कि भारत के इस कदम से निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • आईएमएफ में एशिया एंड पैसिफिक विभाग के निदेशक चोंगयोंग री (Changyong Rhee) के अनुसार, भारत में पिछली दो तिमाही में दर्ज की गई सुस्ती को देखते हुए अर्थव्यवस्था के इस वित्त वर्ष में 6.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने की उम्मीद है, जो वर्ष 2020 में 7.0 प्रतिशत तक जा सकती है।

देश

कॉर्पोरेट टैक्स की दर

भारत

25.17%

अमेरिका

25.89%

यूके

19%

जर्मनी

29.89%

फ्रांस

32.02%

चीन

25%

वियतनाम

20%

फिलीपींस

30%

मलेशिया

24%

सिंगापुर

17%

स्रोत : KPMG, OECD

  • कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से लाभ
  • देश में मेक इन इंडिया (Make in india) को बढ़ावा देने के लिए विनिर्माण क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करना अधिक आसान हो जाएगा।
  • कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती होने से बैंकिंग, ऑटोमोबाइल सेक्टर, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जैसे कुछ क्षेत्र लाभान्वित हो सकते हैं।
  • इससे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (Non-Banking Financial Companies-NBFC) से संबंधित क्षेत्रों में बचत को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
  • सरकार के इस कदम से निजी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राजस्व एवं आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
  • इससे निजी निवेश आकर्षित होगा, जो प्रतिस्पर्धा एवं रोजगार के अवसर को सृजित करेंगे।
  • कटौती से पूंजीगत लाभ में वृद्धि होगी, जो बचत को बढ़ाने में प्रोत्साहन प्रदान कर सकता है।
  • अमेरिका और चीन के मध्य व्यापार युद्ध (Trade War) से प्रभावित कंपनियां जो नए विकल्प तलाश रही हैं, वह भारत की तरफ रुख कर सकती हैं।
  • इस कटौती से शेयर बाजार के निवेशक सकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। कर में बचत से कंपनियां होने वाले लाभों का फायदा अपने निवेशकों को देंगी, जिससे बाजार में तेजी आएगी।
  • सरकार की इस पहल का उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र में सकारात्मक असर पड़ सकता है। यह भारत को दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में समर्थ होगा।
  • चुनौतियां
  • कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से केंद्र द्वारा राज्यों को मिलने वाले अनुदान में कमी आने की संभावना है, जिससे राज्यों का राजकोषीय घाटा नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है।
  • कटौती के प्रोत्साहन से मध्यावधि में निवेश को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन इससे होने वाले राजस्व नुकसान से केंद्र के राजकोषीय घाटे की स्थिति खराब हो सकती है।
  • लाभ प्राप्त करने वाली कंपनियों को शर्तों का पालन करना होगा जिससे कानूनी समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • यद्यपि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती होने से अर्थव्यवस्था में तीव्र गति से निवेश में वृद्धि हो सकती है, परंतु इससे जमीनी स्तर पर मांग में वृद्धि न होने के कारण तात्कालिक प्रभाव लगभग नगण्य बने रहेंगे।
  • विश्लेषण
  • भारत को वर्ष 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की संकल्पना को वास्तविकता में बदलने के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से प्रयास कर रही है। इसी क्रम में निगम कर में कटौती करके भारतीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने का प्रयास किया गया है। इसके अतिरिक्त सरकार को अन्य विकल्पों पर भी गंभीर रूप से मंथन कर प्रति व्यक्ति आय तथा राष्ट्रीय आय में वृद्धि के लिए भी कदम उठाने चाहिए, जिससे संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।

सं. सुनीत कुमार द्विवेदी