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कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज का 24वां सम्मेलन (CoP-24)

CoP-24: Conference of Parties-24
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  • कॉप क्या है?

  जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC : United Nations Framework Convention on Climate Change) के भागीदार सदस्यों के 24वें सम्मेलन का अनौपचारिक नाम ही ‘कॉप-24’ (CoP-24: Conference of Parties-24) है। वर्ष 1992 में ‘रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन’ (Rio Earth Summit) में तीन महत्वपूर्ण अभिसमय (Convention) स्वीकार किए गए थे, जिसमें से एक जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क अभिसमय है। यह अभिसमय 21 मार्च, 1994 को प्रभावी हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य था-जलवायु प्रणाली में मानवीय हस्तक्षेप को रोकना। जिन देशों ने इस अभिसमय की अभिपुष्टि की थी, वे इस अभिसमय के पक्षकार कहलाते हैं। इन पक्षकारों का सम्मेलन यूएनएफसीसीसी (UNFCCC) अभिसमय का सर्वोच्च निकाय होता है, जिसमें पक्षकारों के प्रतिनिधि अभिसमय में भाग लेते हैं। कॉप की बैठक प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इस बैठक में कॉप, अभिसमय के उपबंधों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु निर्णय लेती है तथा इन उपबंधों के कार्यान्वयन की नियमित रूप से समीक्षा भी करती है। यूएनएफसीसीसी के पक्षकारों का प्रथम सम्मेलन (CoP-1) का आयोजन वर्ष 1995 में जर्मनी के बर्लिन में हुआ था, जबकि CoP-23 का आयोजन यूएनएफसीसीसी के बॉन (जर्मनी) स्थित सचिवालय में नवंबर, 2017 में हुआ था। इसी कड़ी में CoP-24 का आयोजन वर्ष 2018 में किया गया।

  • वर्तमान संदर्भ
  • 2-14 दिसंबर, 2018 के मध्य पोलैंड के कैटोवाइस (Katowice) में कॉप-24 (CoP-24) का आयोजन किया गया।
  • इस दौरान क्योटो प्रोटोकॉल के पक्षकारों की बैठक का 14वां सत्र (CMP 14) पेरिस समझौते के पक्षकारों की बैठक के पहले सत्र का तीसरा भाग (CMA 1.3), वैज्ञानिक एवं तकनीकी परामर्श सहायक निकाय का 49वां सत्र (SBSTA 49), कार्यान्वयन हेतु सहायक निकाय का 49वां सत्र (SBI 49) तथा पेरिस समझौते पर तदर्थ कार्यसमूह के प्रथम सत्र के सातवें भाग (APA 1.7) का भी आयोजन किया गया।
  • गौरतलब है कि पोलैंड इससे पूर्व दो बार- वर्ष 2008 में पोजनान (Poznan) में एवं वर्ष 2013 में वारसा में कॉप सम्मेलन का आयोजन कर चुका है।
  • कॉप-24
  • कॉप-24 की प्रथम बैठक का संचालन 2 दिसंबर, 2018 को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (ICC) में विगत कॉप सम्मेलन के अध्यक्ष फिजी के प्रधानमंत्री फ्रैंक बैनीमारमा द्वारा किया गया।
  • इस बैठक में कॉप-24 के अध्यक्ष का चुनाव किया गया।
  • कॉप बैठक के अध्यक्ष का चुनाव पांच क्षेत्रीय समूहों में से चक्रीय प्रणाली के आधार पर किया जाता है।
  • इस बार पूर्वी यूरोपीय राज्यों से अध्यक्ष का चुनाव किया जाना था।
  • बैठक में पोलैंड के पर्यावरण मंत्रालय में राज्य सचिव माइकल कुर्तिका को कॉप-24 का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया।
  • इस बैठक में 196 देशों एवं यूरोपीय संघ के वार्ताकार सहित लगभग 23 हजार लोगों ने भाग लिया।
  • बैठक को पोलैंड के राष्ट्रपति आंद्रेजेज डूडा, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस; संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र की अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोजा आदि द्वारा संबोधित किया गया।
  • उल्लेखनीय है कि कॉप-25 का आयोजन चिली में किया जाएगा।
  • विषय एवं कार्यक्रम
  • कॉप-24 मुख्यतः पेरिस समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन पर केंद्रित था।
  • इसे कार्यान्वयन पैकेज या ‘कैटोवाइस रूल्स’ भी कहा गया।
  • इसके अलावा मंत्रिस्तरीय दो अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम भी केंद्रित विषय में शामिल थे।
  • इनमें प्रथम है-वर्ष 2025 से बाद की अवधि के लिए प्रति वर्ष 100 बिलियन डॉलर के वर्तमान लक्ष्य से आगे जलवायु संबंधी नए वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करने की प्रक्रिया को वर्ष 2020 में प्रारंभ करना।
  • पेरिस समझौते के उद्देश्यों के साथ तालानोआ संवाद के उद्देश्यों को प्राप्त करने हेतु दूसरा कार्यक्रम भी विषय में शामिल था।
  • सम्मेलन में हुई महत्वपूर्ण चर्चाएं
  • सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (Inter-governmental Panel on Climate Change) द्वारा अक्टूबर, 2018 में जारी 1.5 सेल्सियस वैश्विक तापन का प्रभाव (Impacts of 1.5 C Global warming) नामक रिपोर्ट का अधिकांश देशों द्वारा स्वागत किया गया।
  • परंतु संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब, रूस एवं कुवैत ने इस रिपोर्ट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की तथा रिपोर्ट को नकार दिया।
  • 1.5 रिपोर्ट मूलतः औपचारिक रूप से वर्ष 2015 के पेरिस समझौते में सदस्य देशों के अनुरोध पर तैयार की गई थी।
  • सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों (NDC : Nationally Determined Contributions) पर दिशा-निर्देश भी जारी किए गए, यह पेरिस समझौते के अनुच्छेद 4 में वर्णित है। इसके तहत अंतिम रूप से यह निर्णय लिया गया कि सभी देश वर्ष 2006 के आईपीसीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उत्सर्जन करेंगे।
  • साथ ही सभी देश इस पर सहमत हुए हैं कि उनके वादों को सार्वजनिक रजिस्ट्री में रिकॉर्ड किया जाए।
  • क्योटो प्रोटोकॉल की स्वच्छ विकास यांत्रिकी (मैकेनिज्म) जिसका वर्णन अनुच्छेद 6.4 में है, को वर्ष 2019 की वार्ता तक स्थगित कर दिया गया है।
  • अनुच्छेद 9 के तहत वर्णित जलवायु वित्तीय रिपोर्टिंग पर भी वार्ता हुई।
  • सम्मेलन के पश्चात जारी अंतिम रिपोर्ट (Rulebook) में सभी  देशों पर एक ही प्रकार के नियम लागू करने की बात की गई।
  • कॉप-24 एक विशेष अनुपालन समिति के गठन हेतु सहमत हुई है, जिसका मुख्य कार्य पेरिस समझौतों के अनुपालन की निगरानी करना होगा। परंतु यह समिति किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या अर्थदंड नहीं लगाएगी।
  • सम्मेलन को एक 15 वर्षीय स्वीडिश कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunburg) ने भी संबोधित किया।
  • सम्मेलन में अनुकूलन पर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। अनुकूलन पर दिशा-निर्देश विकासशील देशों की संयोजन आवश्यकताओं को स्वीकृति देते हैं और यह सीबीडीआर-आरसी (CBDR-RC) के अति सफल सिद्धांत पर आधारित हैं।
  • सम्मेलन में वित्तीय प्रावधानों पर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसके तहत विकसित देशों ने विकासशील देशों को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निम्न मूल्य (Floor) से वर्ष 2020 के बाद नए सामूहिक वित्तीय लक्ष्यों की स्थापना पर कार्य शुरू करने पर सहमति जताई है।
  • इसके अंतर्गत पक्षकार वर्ष 2020 में आयोजित होने वाली CoP-26 की बैठक में चर्चा करने हेतु तैयार हो गए हैं।
  • भारत एवं कॉप-24

कॉप-24 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने किया।

भारत ने पेरिस समझौते को कार्यान्वित करने के अपने वादे को दुहराते हुए कॉप-24 के दौरान प्रतिबद्धता, नेतृत्व एवं जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने हेतु सामूहिक रूप से कार्य करने की भावना प्रदर्शित की। भारत कॉप-24 के परिणामों को सकारात्मक मानता है, जो सभी पक्षकारों की चिंताओं पर ध्यान देते हैं तथा पेरिस समझौते के सफल कार्यान्वयन की दिशा में आगे कदम बढ़ाते हैं।