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कंधमाल हल्दी को GI टैग प्राप्त

Kandhamal turmeric received the GI tag
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 1 अप्रैल, 2019 को चेन्नई स्थित ‘भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री कार्यालय’ भारत सरकार द्वारा ओडिशा राज्य की ‘कंधमाल हल्दी’ को भौगोलिक संकेतक (GI : Geographical Indication) प्रदान किया गया।
  • कंधमाल हल्दी
  • कंधमाल हल्दी मूलरूप से दक्षिणी ओडिशा राज्य के कंधमाल जिले के भीतरी इलाकों में रहने वाले आदिवासी किसानों द्वारा उगाई जाती है।
  • कंधमाल हल्दी को भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) उसके विभिन्न औषधीय गुणों के कारण प्रदान किया गया है।
  • हल्दी का रंग सुनहरा पीला होता है और इसमें हल्दी की अन्य किस्मों की अपेक्षा ओलेरोसिन व वाष्पशील तेल की मात्रा अधिक होती है तथा उच्च सुगंध वाली होती है।
  • गौरतलब है कि दिसंबर, 2018 में कंधमाल एपेक्स स्पाइसेज एसोसिएशन फॉर मार्केटिंग ने कंधमाल हल्दी के पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, जिसे वस्तु भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम की धारा 13 की उपधारा 1 के तहत मंजूरी प्रदान की गई है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • भौगोलिक संकेतक का दर्जा प्राप्त करने के लिए वस्तुएं उस क्षेत्र में उत्पादित/संसाधित/विनिर्मित की जानी चाहिए।
  • किसी विशेष उत्पाद की गुणवत्ता को व्यक्त करने के लिए यह आवश्यक है कि ग्राहक को उक्त वस्तु विशेष के उत्पादन की मूल जगह (स्थान) के बारे में बताया जाए।
  • उत्पादों की वे श्रेणियां जिनमें भौगोलिक संकेतक प्रदान किए जाते हैं-

   (1)  कृषि उत्पाद

   (2)  विनिर्मित उत्पाद

   (3)  प्राकृतिक वस्तुएं

   (4)  हस्तशिल्प

   (4)  खाद्य उत्पाद

   (6)  वस्त्र और कपड़ा

   (7)  हस्तनिर्मित कालीन

   (8)  मसालें

   (9)  मिठाइयां

   (10) सुरक्षा

   (11) पवित्र भोजन

  • हैदराबादी हलीम जीआई टैग का दर्जा प्राप्त करने वाला एकमात्र भारतीय व्यंजन है।
  • उत्तराखंड का तेजपत्ता (मसाला) जीआई टैग का दर्जा प्राप्त करने वाला पहला देशज उत्पाद है।
  • दार्जिलिंग चाय भारत की पहली भौगोलिक संकेतक का (2004-05) दर्जा प्राप्त करने वाली उत्पाद बनी।

अश्वनी सिंह