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एनआईए संशोधन विधेयक, 2019

NIA Amendment Bill, 2019
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 24 जुलाई, 2019 को राज्य सभा ने एनआईए (संशोधन) विधेयक, 2019 को मंजूरी दे दी।
  • गौरतलब है कि यह विधेयक सदन के निचले सदन लोक सभा में 22 जुलाई, 2019 को भारी बहुमत के साथ पारित हुआ था।
  • ध्यातव्य है कि अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के उपरांत यह विधेयक, कानून (अधिनियम) बन जाएगा।
  • एनआईए (संशोधन) विधेयक, 2019 के माध्यम से भारत सरकार आतंकवाद के विरुद्ध जांच की सर्वोच्च एजेंसी ‘एनआईए’ (National Investigation Agency -INA) के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि कर भविष्य में आतंकी घटनाओं के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही को सुनिश्चित करना चाहती है।
  • संशोधन के माध्यम से एनआईए के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि
  • नवीनतम संशोधन एनआईए को मानव तस्करी, जाली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण या बिक्री, साइबर आतंकवाद और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम,1908 के अंतर्गत शामिल अपराधों से संबंधित मामलों की जांच करने में सक्षम बनाएगा।
  • यह विधेयक एनआईए अधिकारियों को भारत के विरुद्ध देश के बाहर किए गए अपराधों की जांच करने की शक्ति देता है। हालांकि एनआईए का क्षेत्राधिकार अंतरराष्ट्रीय संधियों और अन्य देशों के घरेलू कानूनों के अधीन होगा।
  • इसके अतिरिक्त यह विधेयक एनआईए के दायरे में आने वाले अपराधों तथाकथित अनुसूचित अपराधों (Scheduled Offences) के लिए विशेष अदालतों के गठन का प्रावधान करता है।
  • इसके साथ ही यह विधेयक एनआईए को अपनी जांच के दौरान संपत्ति की जब्ती या कुर्की (Seizure or attachment of property) की अनुमति भी देता है।
  • एनआईए का गठन
  • एनआईए का गठन वर्ष 2009 में मुंबई आतंकवादी हमले के उपरांत किया गया था, जिसमें 166 लोगों की जान चली गई थी।
  • ध्यातव्य है कि इस केंद्रीय जांच एजेंसी को कानूनी अधिकार देने हेतु राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिनियम, 2008 पारित किया गया था।
  • वर्तमान संशोधन से पहले एनआईए केवल गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (Unlawful Activities Prevention Act),1967 और परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत हुए अपराधों की ही जांच कर सकती थी।
  • गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय वर्ष 2017 से ही आतंकवाद एवं अन्य अपराधों की बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिए एनआईए को और अधिक अधिकार देने की मांग कर रहा था।

संधीरेंद्र त्रिपाठी