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ऊर्जा पारगमन सूचकांक, 2019

World Economic Forum
  • 25 मार्च, 2019 को विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा ‘प्रभावी ऊर्जा पारगमन प्रोत्साहन’ (Fostering Effective Energy Transition) नामक रिपोर्ट का दूसरा संस्करण प्रकाशित किया गया।
  • यह रिपोर्ट मैकिन्से एंड कंपनी (Mckinsey and Company) के विश्लेषणात्मक समर्थन से तैयार की गई है।
  • यह रिपोर्ट ‘ऊर्जा के भविष्य को आकार देना’ (Shaping the Future of Energy) पर विश्व आर्थिक मंच प्रणाली पहल का भाग है।
  • WEF के अनुसार, कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति में जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी पिछले तीन दशकों में स्थिर रही है।
  • इसके अतिरिक्त, वैश्विक CO2 उत्सर्जन में वर्ष 2018 में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो वर्ष 2014 के बाद से सबसे अधिक है।
  • लगातार तीन वर्षों तक गिरावट के बाद वर्ष 2018 में कोयले की खपत में वृद्धि हुई है।
  • रिपोर्ट में ‘ऊर्जा पारगमन सूचकांक’ (ETI-Energy Transition Index) प्रस्तुत किया गया है।
  • ऊर्जा पारगमन सूचकांक में ‘ऊर्जा त्रिकोण’ (Energy triangle) के आधार पर 115 देशों की ऊर्जा प्रणालियों का मापन किया गया है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और पहुंच आर्थिक वृद्धि और विकास, पर्यावरणीय सतता और भविष्य में सफल होने के लिए कितनी अच्छी प्रणाली है, शामिल है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों की तुलना में ऊर्जा माध्यम महंगे हुए हैं और पर्यावरण हेतु अधिक नुकसानदेह हो गए हैं।
  • हालांकि ऊर्जा की उपलब्धता पहले से बेहतर हुई है और अब 1 अरब से कम लोग ही ऐसे हैं, जिनके पास विद्युत की उपलब्धता नहीं है।
  • ऊर्जा पारगमन के लिए तैयारी के घटकों में शामिल 6 संकेतक हैं :- पूंजी और निवेश, विनियमन और राजनीतिक प्रतिबद्धता, संस्थान और शासन, संस्थान और अभिनव व्यावसायिक वातावरण, मानव पूंजी और उपभोक्ता भागीदारी तथा ऊर्जा प्रणाली संरचना।
  • इस सूचकांक में पहला स्थान स्वीडन को प्राप्त हुआ है, जबकि स्विट्जरलैंड और नॉवर्ें का स्थान क्रमशः दूसरा एवं तीसरा है। हैती को सबसे अंतिम 115वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • सूचकांक में शीर्ष 10 देशों में फिनलैंड (चौथा), डेनमार्क (5वां), ऑस्ट्रिया (6वां), यूनाइटेड किंगडम (7वां), फ्रांस (8वां), नीदरलैंड्स (9वां) और आइसलैंड (10वां) शामिल हैं।
  • इस सूचकांक में बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) को 7वां, फ्रांस को 8वां, सिंगापुर को 13वां, जर्मनी को 17वां, जापान को 18वां तथा अमेरिका को 27वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • सूचकांक में भारत के पड़ोसी देशों में श्रीलंका को 60वां, चीन को 82वां बांग्लादेश को 90वां, नेपाल को 30वां तथा पाकिस्तान को 97वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • उभरते और विकासशील देशों की श्रेणी में मलेशिया 31वीं रैंक हासिल कर पहले पायदान पर है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रदूषण का स्तर उच्च है और इसकी ऊर्जा प्रणाली में अपेक्षाकृत उच्च CO2 गहनता है, इसलिए भारत को उच्च प्रदूषण स्तर वाले देशों की सूची में शामिल किया गया है।
  • हालांकि, भारत ने हाल के वर्षों में ऊर्जा पहुंच में सुधार के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं और वर्तमान में विनियमन और ऊर्जा संक्रमण के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में अच्छा स्कोर प्राप्त किया है।
  • सूचकांक में भारत को इस वर्ष 76वां स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि पिछले वर्ष यह 78वें स्थान पर था।
  • ब्रिक्स देशों में भी भारत को दूसरे सबसे बेहतर देश का स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि ब्राजील 46वीं रैंक के साथ पहले स्थान पर है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत कोयला के उपभोग में वृद्धि कर रहा है।
  • भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के लिए नीतियां बनाने में शीर्ष तीन देशों में शामिल किया गया है।
  • विद्युतीकरण की दिशा में सबसे तीव्र दर विकास करने वाले देशों में शामिल है।
  • यह सार्वजनिक-निजी सहयोग हेतु एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसका उद्देश्य विश्व के प्रमुख व्यावसायिक, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिज्ञों, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अग्रणी लोगों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करना है।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में स्थित है।
  • इस फोरम की स्थापना वर्ष 1971 हमें यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम. श्वाब ने की थी।

ऊर्जा पारगमन सूचकांक, 2019, शीर्ष 10 देश

देश

स्कोर

रैंक

स्वीडन

74.90%

1

स्विट्जरलैंड

74.30%

2

नॉर्वे

73.40%

3

फिनलैंड

73.00%

4

डेनमार्क

72.20%

5

ऑस्ट्रिया

70.70%

6

यूनाइटेड किंगडम

70.20%

7

फ्रांस

68.60%

8

नीदरलैंड्स

68.50%

9

आइसलैंड

68.50%

10

सं. बृजेश कुमार रावत

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