Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

इसरो ने 7 मेगा मिशन घोषित किए

ISRO declared 7 mega mission
    null
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • मई, 2019 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आगामी 10 वर्षों हेतु 7 बड़े अंतरिक्ष कार्यक्रमों की घोषणा की है।
  • इसरो ने अभी केवल चंद्रयान-2, आदित्य-L1 मिशन तथा Xposat मिशन का ही विवरण उपलब्ध कराया है।
  • इसरो ने इस घोषणा के साथ अगले 30 वर्षों का एक रोडमैप भी तैयार किया है, जिसमें इसरो के सभी प्रमुख प्रक्षेपण मिशनों का उल्लेख है।

सात प्रमुख मिशन

  मिशन प्रक्षेपण वर्ष
1. चंद्रयान-2 जुलाई, 2019
2. Xposat वर्ष 2020
3. आदित्य-L1 वर्ष 2021
4. मंगलयान-2 वर्ष 2022
5. शुक्र वर्ष 2023
6. चंद्रयान-3 वर्ष 2024
7. सौरमंडल से बाहर ग्रहों की खोज हेतु मिशन वर्ष 2028
  • चंद्रयान
  • चंद्रयान-2 को जुलाई, 2019 में प्रक्षेपित करने की योजना है।
  • चंद्रयान-2 की पहली तस्वीरें हाल ही में इसरो ने बंगलुरू के ‘उपग्रह एकीकरण व परीक्षण सुविधा केंद्र’ से जारी की है।
  • चंद्रयान-2 के लैंडर का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर ‘विक्रम’ रखा गया है।
  • चंद्रयान-2 को GSLV-मार्क 3 से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसमें 13 भारतीय पेलोड (आर्बिटर पर 8, लैंडर पर 3 व रोवर पर 2) तथा एक अमेरिकी पैसिव एक्सपेरिमेंट पेलोड होगा।
  • 3.8 टन वजनी इस अंतरिक्षयान के 3 मॉड्यूल हैं, जिनमें आर्बिटर, लैंडर व प्रज्ञान नामक रोवर शामिल हैं।
  • चंद्रयान-2 के लगभग सभी उपकरण यथा- पुनः प्रवेश क्षमता, क्रू एस्केप सिस्टम, क्रू मॉड्यूल, तापीय संरक्षण व्यवस्था, मंदन एवं प्रवर्तन व्यवस्था, जीवन रक्षक प्रणाली स्वदेश में ही विकसित किए गए हैं।
  • चंद्रयान-2, इसरो का पहला ऐसा अंतर्ग्रहीय मिशन है, जिसमें इसरो किसी दूसरे खगोलीय पिंड की सतह पर उतरेगा। इस मिशन के साथ ही इसरो पहली बार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर उतारकर चंद्रमा की सतह के घटकों का अध्ययन एवं विश्लेषण करेगा।
  • चंद्रमा पर उतरने वाला ‘प्रज्ञान’ रोवर चंद्रमा की सतह पर भ्रमण करके मिट्टी तथा चट्टानों के नमूने एकत्रित करेगा, जिससे चंद्रमा की भू-पर्पटी, खनिज पदार्थ और जल की सूचनाएं एकत्र करेगा।
  • चंद्रमा की सतह पर अभी तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही  पहुंच सके हैं, जबकि इस्राइल का स्पेसक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
  • चंद्रयान-2, चंद्रयान-1 का उन्नत संस्करण है। चंद्रयान-1 वर्ष 2008 में प्रक्षेपित किया गया था, जिसने केवल चंद्रमा की परिक्रमा की थी।
  • आदित्य-L1
  • वर्ष 2020 के मध्य में सूर्य की कोरोना के अध्ययन हेतु इसरो इस मिशन को लांच करेगा।
  • आदित्य-L1 मिशन के लिए स्पेसक्राफ्ट (अंतरिक्षयान) को ‘लिबरेशन आर्बिट’ में स्थापित किया जाएगा, जिस पर पृथ्वी तथा सूर्य का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव समान होता है।
  • इस मिशन की सहायता से पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन की बेहतर समझ एवं पूर्वानुमान संभव हो सकेगी क्योंकि सूर्य की कोरोना का ऊपरी वायुमंडल पर वृहद प्रभाव परिलक्षित होता है।
  • लिबरेशन आर्बिट सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का 1 प्रतिशतवां हिस्सा है, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर है।
  • ध्यातव्य है कि आदित्य, सूर्य का एक पर्यायवाची नाम है।
  • Xposat
  • ब्रह्मांडीय विकिरण के अध्ययन हेतु, इसरो इस पंचवर्षीय मिशन को वर्ष 2020 के मध्य तक लांच करेगा।
  • Xposat (X-ray Polarimeter Satellite : Xposat) पेलोड 500-700 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा।
  • मिशन में रमण शोध संस्थान द्वारा विकसित कॉस्मिक किरणों के अध्ययन हेतु POLIX (Polarimeter Instrument in X-rays) को भी उसकी कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
  • संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के निदेशक के. सिवान ने कहा है कि वर्ष 2030 तक भारत अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करेगा, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की तुलना में छोटा होगा।
  • यह अंतरिक्ष स्टेशन धरातल से 400 किमी. ऊपर पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जिसका भार लगभग 20 टन होगा।
  • इसका प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा अंतरिक्ष में शोध करने के लिए किया जाएगा, जो कि गगनयान मिशन (2022) का एक हिस्सा है।
  • अंतरिक्ष स्टेशन
  • अंतरिक्ष स्टेशन एक कृत्रिम आवासीय उपग्रह होता है, जिसे अंतरिक्ष में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाता है।
  • यह निरंतर पृथ्वी की परिक्रमा करता रहता है।
  • इसमें अंतरिक्ष यात्री रहकर विभिन्न ब्रह्मांडीय गुत्थियों को सुलझाने की हर संभव कोशिश करते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन
  • यह पृथ्वी की निम्न कक्षा में स्थापित एक आवासीय कृत्रिम उपग्रह है, जो पृथ्वी के धरातल से 330-435 किमी. की ऊंचाई पर स्थापित है।
  • यह एक दिन में 15.5 बार पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करता है। एक परिक्रमा में 92 मिनट का समय लगता है।
  • अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना 5 अंतरिक्ष एजेंसियों-नासा (अमेरिका), रोसकॉसमॉस (रूस), जाक्सा (जापान), यूरोपियन स्पेस एजेंसी (यूरोपीय संघ) तथा कनाडा स्पेस एजेंसी (कनाडा) ने मिलकर तैयार किया था।

संअश्वनी सिंह