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इक्वाडोर : ओपेक (OPEC) से बाहर होने का निर्णय

Ecuador: decision to exit OPEC
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 1 अक्टूबर, 2019 को इक्वाडोर (Ecuador) ने तेल निर्यातक देशों के संगठन ‘ओपेक’ (Organization of the Petroleum Exporting Countries- OPEC) की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया।
  • यह निर्णय 1 जनवरी, 2020 से प्रभावी होगा
  • इक्वाडोर के ओपेक से बाहर होने के पश्चात वेनेजुएला (Venezuela) एकमात्र दक्षिण अमेरिकी देश ओपेक का सदस्य रह जाएगा।
  • सदस्यता छोड़ने का कारण
  • इक्वाडोर सरकार के अनुसार, देश की वित्तीय समस्याओं से निपटने के लिए ओपेक की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया गया है।
  • इससे देश में राजकोषीय स्थिरता आएगी तथा सार्वजनिक खर्च को कम करने तथा नई आय उत्पन्न करने में सहजता होगी।
  • ध्यातव्य है कि इक्वाडोर वर्ष 1973 में ओपेक में शामिल हुआ था। भारी सदस्यता शुल्क तथा संगठन द्वारा उत्पाद हिस्सा बढ़ाने से इनकार करने के कारण वर्ष 1992 में ओपेक से बाहर हो गया था।
  • तत्पश्चात अक्टूबर, 2007 में पुनः ओपेक की सदस्यता ग्रहण की थी।
  • ध्यातव्य है कि भूमध्यरेखा (Equator) पर पश्चिम की ओर से सर्वप्रथम देश होने के कारण इसका नाम इक्वाडोर (Ecuador) पड़ा है।
  • ओपेक पर प्रभाव
  • इक्वाडोर द्वारा सदस्यता वापस लेने से ओपेक सदस्य देशों की संख्या जनवरी, 2020 से 13 हो जाएगी।
  • विदित है कि 3 दिसंबर, 2018 को कतर ने ओपेक की सदस्यता छोड़ दी थी।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि इक्वाडोर के ओपेक की सदस्यता छोड़ने पर संगठन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस संगठन के देशों द्वारा उत्पादित कुल तेल की मात्रा के 2 प्रतिशत से भी कम का उत्पादन इक्वाडोर करता है।
  • गौरतलब है कि 14 सदस्यीय ओपेक संगठन में सर्वाधिक तेल उत्पादन करने वाले देशों की सूची में इक्वाडोर 10वें स्थान पर है।
  • उल्लेखनीय है कि ‘ओपेक’ का गठन 10 – 14 सितंबर, 1960 के मध्य हुए बगदाद सम्मेलन के दौरान हुआ था।
  • ज्ञातव्य है कि ओपेक के 14 देशों में सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश सऊदी अरब (10512 मिलियन बैरल) (कुल 32%) है।
  • तत्पश्चात दूसरे स्थान पर इराक (4650 मिलियन बैरल) तथा तीसरे स्थान पर ईरान (3447 मिलियन बैरल) का स्थान है।
  • भारत पर प्रभाव
  • भारत, ओपेक से लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात करता है, लेकिन इक्वाडोर द्वारा ओपेक को 2 प्रतिशत से भी कम सहयोग करता है। अतः भारत पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • इसके साथ ही भारत तेल के अलावा अन्य ऊर्जा के साधनों पर चरणबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है, ऐसे में आने वाले दिनों में तेल आयात में कमी होने की संभावना है।

संसुनीत कुमार द्विवेदी