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आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, 2017-18

Periodic Labor Force Survey, 2017-18
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • यह रिपोर्ट जुलाई, 2017 से जून, 2018 के दौरान किए गए आवधिक सर्वेक्षण (Periodic Survey) पर आधारित है, जिसे मई, 2019 में जारी किया गया। इसमें राष्ट्रीय तथा राज्य स्तर पर रोजगार तथा बेरोजगारी के विभिन्न पहलुओं से संबंधित आकलन प्रस्तुत किए गए हैं। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा किए जाने वाले रोजगार तथा बेरोजगार संबंधी सर्वेक्षण भारत में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर श्रम बाजार आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत हैं। इन सर्वेक्षणों से प्राप्त श्रम सांख्यिकी विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा आयोजना और नीति निर्माण तथा भारत में रोजगार एवं बेरोजगारी से जुड़े अन्य संबंधित विषयों का निराकरण करने वाले अनुसंधानकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
  • सर्वेक्षण पद्धति
  • यह सर्वेक्षण 12,773 FSU (प्रथम चरण इकाइयों) में (7,014 ग्रामों और 5,759 नगरीय खंडों) में फैला हुआ था एवं 1,02,113 परिवारों (56,108 ग्रामीण क्षेत्रों और 46,005 नगरीय क्षेत्रों में) को इसमें समाविष्ट किया गया और 4,33,339 व्यक्तियों (2,46,809 ग्रामीण क्षेत्रों और 1,86,530 नगरीय क्षेत्रों) की गणना की गई। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) में श्रमबल संकेतक का प्राक्कलन क्रियाशील स्थितियों द्वारा जनसंख्या के वर्गीकरण के लिए सर्वेक्षण में अपनाए गए वर्तमान साप्ताहिक स्थिति एवं सामान्य स्थिति (PS+SS) पर आधारित है। सामान्य स्थिति (PS+SS) के लिए संदर्भ अवधि 1 वर्ष है और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति के लिए 1 सप्ताह है। अखिल भारतीय स्तर पर जुलाई, 2017 से जून, 2018 की अवधि के लिए PLFS से प्राप्त कुछ मुख्य परिणाम एवं रोजगार व बेरोजगारी पर NSS (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण) के 68वें दौर (जुलाई, 2011-जून, 2012) के सर्वेक्षण से उसकी तुलना इस प्रकार है-
  • परिवार एवं जनसंख्या
  • भारत में औसत परिवार आकार लगभग 4.2 था। यह लगभग 4.3 ग्रामीण भारत में और लगभग 3.9 नगरीय भारत में था।
  • वर्ष 2017-18 के दौरान लगभग 52.2 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के आय का प्रमुख स्रोत स्व नियोजन था। जबकि NSS के 68वें दौर के सर्वेक्षण में 49.8 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के आय का प्रमुख स्रोत स्व नियोजन था।
  • PLFS (2017-18) के दौरान 25 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के आय का प्रमुख स्रोत आकस्मिक मजदूरी (Casual Labour) था और 12.7 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत नियमित मजदूरी/वेतन था।
  • NSS के 68वें दौर (2011-12) के अनुसार 34.5 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत आकस्मिक मजदूरी था और 9.6 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत नियमित मजदूरी/वेतन था।
  • PLFS (2017-18) के दौरान लगभग 32.4 प्रतिशत नगरीय परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत स्व नियोजन था जबकि NSS के 68वें दौर में यह आंकड़ा 35.3 प्रतिशत था।
  • NSS के 68वें दौर एवं PLFS (2017-18) दोनों में ही 11.8 प्रतिशत शहरी परिवारों के आय का प्रमुख स्रोत आकस्मिक मजदूरी था, जबकि नियमित मजदूरी/वेतन प्राप्त करने वाले परिवारों की प्रतिशतता आवधिक सर्वेक्षण के लिए 41.4 प्रतिशत एवं NSS के 68वें दौर के लिए 41.7 प्रतिशत थी।
  • श्रमबल
  • आवधिक सर्वेक्षण (2017-18) के नतीजे दर्शाते हैं कि लगभग 54.9 प्रतिशत ग्रामीण पुरुष, 18.2 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं, 57 प्रतिशत नगरीय पुरुष और 15.9 प्रतिशत नगरीय महिलाएं सामान्य स्थिति (PS+SS) में श्रमबल में थे।
  • जबकि NSS 68वें दौर के सर्वेक्षणों (2011-12) में 55.3 प्रतिशत ग्रामीण पुरुष, 25.3 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं, 56.3 प्रतिशत नगरीय पुरुष और 15.5 प्रतिशत नगरीय महिलाएं सामान्य स्थिति (PS+SS) में श्रमबल में थे।