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आकाश-एमके-I एस मिसाइल का परीक्षण

Defence Research and Development Organization- DRDO
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 25 और 27 मई, 2019 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organization- DRDO) द्वारा आकाश-एमके-I एस (AKASH-MK-IS) मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया, जो पूर्णतया स्वदेशी तकनीक से संबंधित भारतीय एयर डिफेंस प्रणाली का उन्नत संस्करण है।
  • उद्देश्य
  • इस मिसाइल परीक्षण का उद्देश्य भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करना है, जिससे किसी भी प्रकार के हवाई हमले का प्रत्युत्तर दिया जा सके।
  • आकाश मिसाइल
  • आकाश एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मारक क्षमता वाली मिसाइल है, जो बूस्टर (Booster) और रैम रॉकेट प्रणोदन (Ram-Rocket Propalsion) के लिए उच्च ऊर्जा युक्त ठोस प्रणोदक (Solid Propellant) का उपयोग करता है।
  • इस सुपरसोनिक मिसाइल की रेंज लगभग 25 किमी. और ऊंचाई लगभग 18,000 मीटर तक है।
  • क्या है एयर डिफेंस सिस्टम?
  • एयर डिफेंस सिस्टम किसी भी प्रकार के हवाई हमले से सुरक्षा हेतु उपयोग किया जाता है, जिसमें राडार और मिसाइलों के उन्नत संस्करण का काफी महत्व होता है।
  • प्रणाली के तहत जब कोई दुश्मन विमान सीमा में प्रवेश करता है तब राडार विमान की गति व दूरी का मापन कर, इसकी जानकारी दूसरी यूनिट को भेज देता है, जहां से दुश्मन के विमान/मिसाइल को नष्ट करने के लिए मिसाइलों को दागा (Fire) जाता है।
  • इस प्रकार आकाश एयर डिफेंस प्रणाली का यह परीक्षण इसे लक्षित (Targeted) हमले करने में और अधिक सटीकता प्रदान करेगा।
  • अन्य तथ्य
  • भारत अपने हवाई क्षेत्र को अधिक सुरक्षित करने के लिए इस्राइल के सहयोग से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (Medium Range Surface to Air Missile : MRSAM) विकसित कर रहा है।
  • इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध S-400 वायु रक्षा प्रणाली को भारत, रूस से खरीद रहा है, जिसकी प्राप्ति वर्ष 2020 में संभव है।
  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन
  • दिल्ली स्थित डीआरडीओ की स्थापना वर्ष 1958 में की गई थी, उस समय 10 प्रयोगशालाओं वाला यह एक छोटा संगठन था।
  • यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • डीआरडीओ – ‘दृष्टि’
  • ‘‘विश्वस्तरीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधार की स्थापना द्वारा भारत को समृद्ध बनाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रणालियों और समाधान से सुसज्जित कर हमारी रक्षा सेवा में निर्णायक बढ़त प्रदान करना है।’’