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आईएन एलसीयू एल 56 भारतीय नौसेना में शामिल

IN LCU L 56 is included in the Indian Navy
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 30 मार्च, 2019 को लैंडिग क्राफ्ट यूटिलिटी एम के IV श्रेणी के छठें एलसीयू एल 56 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।
  • पृष्ठभूमि
  • सितंबर, 2011 में नौसेना द्वारा ‘गार्डनरीच शिपबिर्ल्ड्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड’ (GRSE) को लैंडिग क्राफ्ट यूटिलिटी एम के IV श्रेणी के 8 पोतों की डिजाइन एवं निर्माण हेतु 340 मिलियन डॉलर का अनुबंध प्रदान किया गया।
  • इसी क्रम में 28 मार्च, 2017 को लैंडिग क्राफ्ट यूटिलिटी (LCU) एम के IV श्रेणी के पहले पोत आईएन एलसीयू एल 51 (IN  LCU  L 51) को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।
  • इन सभी 8 पोतों को जीआरएसई (GRSE) के अनुसार, वर्ष 2019 तक भारतीय नौसेना को सौंप दिया जाएगा।
  • विशेषताएं
  • एल 56 पोत, लेफ्टिनेंट कमांडर गोपीनाथ नारायण के अधीन होगा और इस पोत पर 5 अधिकारी एवं 50 नौसैनिक तैनात होंगे।
  • इसके अतिरिक्त यह पोत 160 सैनिकों को ले जाने में सक्षम है।
  • एलसीयू पोतों का प्राथमिक कार्य मुख्य युद्धक टैंकों, बख्तरबंद वाहनों, सैनिकों एवं सैन्य उपकरणों को पोत से समुद्र तक ले जाना है।
  • साथ ही इन पोतों का उपयोग समुद्रतट संचालन (Beaching Operation) खोज एवं बचाव, आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में किया जा सकता है।
  • एलसीयू एम के  IV श्रेणी के पोतों की लंबाई 63 मीटर, चौड़ाई 11 मीटर और विस्थापन क्षमता 830 टन है।
  • इन पोतों की अधिकतम गति 15 नॉट (Knots) है।
  • उल्लेखनीय है कि एल 56 गार्डनरीच शिपबिर्ल्ड्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड द्वारा भारतीय नौसेना को सौंपा गया 100वां पोत है।
  • इसी के साथ जीआरएसई 100 युद्धपोत का निर्माण एवं आपूर्ति करने वाला देश का पहला शिपयार्ड बन गया है।
  • क्या है जीआरएसई
  • जीआरएसई (GRSE) रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन भारत की एक युद्धपोत निर्माण कंपनी है, जो प्राथमिक तौर पर भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक की पोत निर्माण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करती है।
  • जीआरएसई ने वर्ष 1961 में भारत का पहला देशी युद्धपोत आईएनएस अजय (INS Ajay) का निर्माण किया था।
  • वर्तमान में रियर एडमिरल विपिन कुमार सक्सेना (सेवानिवृत्त) जीआरएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हैं।

संअर्पित मिश्रा

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