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अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण विधेयक, 2019

International Financial Services Center Authority Bill, 2019
  • वर्तमान परिदृश्य
  • 6 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSCs) में सभी वित्तीय सेवाओं के विनियमन के लिए एक एकीकृत प्राधिकरण की स्थापना को मंजूरी प्रदान की।
  • इसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण विधेयक, 2019 के द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।
  • पृष्ठभूमि
  • वर्तमान में आईएफएससी में बैंकिंग, पूंजी बाजार और बीमा क्षेत्र, विभिन्न विनियामकों यथा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, सेबी और आईआरडीएआई (IRDAI) द्वारा विनियमित किए जा रहे हैं। आईएफएससी में निरंतर गतिशीलता के कारण विनियामकों के बीच समन्वय की अत्यधिक आवश्यकता होती है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (IFSCs) में वित्तीय गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले मौजूदा नियमों में नियमित स्पष्टीकरण और बार-बार संशोधन की आवश्यकता होती है। इन केंद्रों में वित्तीय सेवाओं और उत्पादों के विकास के लिए केंद्रित और समर्पित विनियामकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इसलिए वित्तीय बाजार सहभागियों को विश्वस्तरीय नियामकीय वातावरण प्रदान करने के लिए भारत में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों के लिए एक एकीकृत वित्तीय विनियामक की आवश्यकता महसूस की गई है।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों की विनियामकीय आवश्यकताओं और वित्तीय क्षेत्र के मौजूदा कानूनों के प्रावधानों के मद्देनजर वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने इन केंद्रों के लिए एक अलग एकीकृत विनियामक प्राधिकरण स्थापित करने हेतु एक विधेयक का मसौदा तैयार किया है।
  • विधेयक की प्रमुख विशेषताएं

(i) प्राधिकरण का गठन

इस प्राधिकरण में एक अध्यक्ष तथा रिजर्व बैंक, सेबी, आईआरडीएआई (IRDAI), पीएफआरडीए (PFRDA) प्रत्येक द्वारा नामित एक सदस्य, केंद्र सरकार द्वारा नामित दो सदस्य तथा दो अन्य पूर्णकालिक या अंशकालिक सदस्य शामिल होंगे।

(ii) प्राधिकरण का कार्य

यह प्राधिकरण ऐसी सभी वित्तीय सेवाओं, वित्तीय उत्पादों और वित्तीय संस्थाओं को एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में विनियमित करेगा, जिन्हें इन केंद्रों के लिए वित्तीय क्षेत्र नियामकों द्वारा पहले ही अनुमति दी जा चुकी है।

  • समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जा सकने वाले ऐसे अन्य वित्तीय उत्पादों, वित्तीय सेवाओं या वित्तीय संस्थाओं को भी प्राधिकरण विनियमित करने का कार्य करेगा।
  • यह केंद्र सरकार को ऐसे अन्य वित्तीय उत्पादों, वित्तीय सेवाओं और वित्तीय संस्थानों की भी सिफारिश कर सकता है, जिन्हें आईएफएससी में अनुमति दी जा सकती है।

(iii) शक्तियां

संबंधित अधिनियमों के तहत संबंधित वित्तीय क्षेत्र नियामकों (आरबीआई, सेबी, आईआरडीएआई और पीएफआरडीए आदि) द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियां अकेले प्राधिकरण द्वारा प्रयोग की जाएंगी।

निष्कर्ष

अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों के लिए एकीकृत वित्तीय विनियामक की स्थापना से बाजार के सहभागियों को व्यापार करने में आसानी के नजरिए से विश्वस्तरीय नियामकीय वातावरण प्रदान किया जा सकेगा। यह भारत में इन केंद्रों के विकास को प्रोत्साहित करेगा और उन वित्तीय सेवाओं एवं लेन-देनों को वापस लाने में सक्षम करेगा, जो वर्तमान में भारत में अपतटीय वित्तीय केंद्रों में व्यवहृत हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों के साथ-साथ भारत के वित्तीय क्षेत्र में रोजगार पैदा होंगे।