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33वां आसियान शिखर सम्मेलन और भारत

33rd ASEAN Summit and India

  वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन ‘आसियान’ (ASEAN : Association of South East Asian Nations) का विशेष स्थान है। एक क्षेत्रीय संगठन के रूप में आसियान की सफर की शुरुआत 8 अगस्त, 1967 को बैंकॉक (थाईलैंड) में आसियान घोषणा-पत्र (बैंकॉक घोषणा-पत्र) पर इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर तथा थाईलैंड  के हस्ताक्षर के साथ प्रारंभ हुआ था। इसके पश्चात ब्रुनेई (1984), वियतनाम (1995), लाओ पीडीआर तथा म्यांमार (1997) एवं कंबोडिया (1999) के इस संगठन में शामिल होने के साथ आसियान को वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ। आसियान देशों का सकल क्षेत्रफल 4.46 मिलियन वर्ग किमी. है और इसके सदस्य देशों की सम्मिलित आबादी 642.1 मिलियन (वर्ष 2017) है। वर्ष 2017 में आसियान देशों का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 2765.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर (वर्तमान मूल्य पर) है जो कि विश्व जीडीपी का 3.5 प्रतिशत है। आसियान देशों की शक्तिशाली स्थिति एवं बढ़ते प्रभाव के कारण ही न केवल भारत, रूस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ इसके संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं बल्कि विश्व के अन्य अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठनों एवं गैर-सरकारी संगठनों ने भी इसके साथ संबंध स्थापित किए हैं। इसी परिदृश्य में 33वें आसियान शिखर सम्मेलन सहित अन्य संबंधित सम्मेलनों का आयोजन 11-15 नवंबर, 2018 के मध्य सिंगापुर में किया गया।

  • आसियान का 33वां शिखर सम्मेलन
  • 13-15 नवंबर, 2018 के मध्य आसियान का 33वां शिखर सम्मेलन सिंगापुर के ‘सनटेक सिंगापुर कन्वेंशन सेंटर’ में संपन्न हुआ।
  • इस शिखर सम्मेलन का केंद्रीय विषय (Theme) ‘प्रतिरोधकता एवं नवप्रवर्तनशील’ (Resilient and Innovative) था।
  • इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग ने की।
  • 15 नवंबर, 2018 को ली सिएन लूंग ने आसियान शिखर सम्मेलन के सफलतापूर्वक आयोजन के उपरांत आसियान की अध्यक्षता थाईलैंड के प्रधानमंत्री जनरल प्रत्युत चान-ओ-चा (General Pratyut Chan-o-Cha) को सौंपी।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में आसियान शिखर सम्मेलन थाईलैंड के बैंकॉक में प्रस्तावित है।
  • घोषित प्रमुख दस्तावेज
  • इस शिखर सम्मेलन में आसियान देशों ने आसियान समूह विजन, 2025 के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति वचनबद्धता दर्शाते हुए वर्तमान आसन्न चुनौतियों जैसे गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों एवं पर्यावरण चुनौतियों के प्रति प्रतिक्रियाशील रहने की पुनः पुष्टि की। इसके अतिरिक्त सम्मेलन में निम्न दस्तावेजों की घोषणा की गई-

(i) आसियान स्मार्ट सिटी फ्रेमवर्क।

(ii) आसियान समुदाय के समावेशी एवं निष्पक्षता हेतु ‘ग्रीन जॉब्स’ (Green Jobs) के संवर्धन पर आसियान घोषणा।

 (iii) आसियान को समर्थवान बनाने हेतु मास्टर प्लान, 2025 ।

(iv) जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCC) के 24वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज सम्मेलन हेतु जलवायु परिवर्तन पर आसियान का संयुक्त वक्तव्य।

(v) जैव विविधता कन्वेंशन हेतु 14वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के सम्मेलन पर आसियान का संयुक्त वक्तव्य।

(vi)‘क्लाइमेट एक्शन’ एवं ‘डिजास्टर रिसेलियंस डे’ में आसियान युवा के अंगीकरण पर आसियान घोषणा।

(vii) तृतीय देशों में आसियान सदस्य राज्यों के मिशन से लेकर आसियान सदस्य राज्यों के अन्य राष्ट्रों में दूतावास सहयोग संबंधी दिशा-निर्देश पर घोषणा।

  • शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजन/समझौते
  • 33वें आसियान शिखर सम्मेलन, 2018 के दौरान प्रमुख आयोजन/समझौते इस प्रकार हैं-
  1. 13वां पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन
  2. 21वां आसियान प्लस थ्री शिखर सम्मेलन
  3. आसियान-भारत अनौपचारिक नाश्ता (ब्रेकफास्ट) शिखर सम्मेलन
  4. द्वितीय क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी शिखर सम्मेलन (RCEP)
  • 13वां पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन
  • 15 नवंबर, 2018 को सिंगापुर में ही 13वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (13th East Asia Summit) का आयोजन किया गया।
  • इस सम्मेलन में आसियान के सदस्य देशों के राष्ट्र/सरकार प्रमुखों सहित ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया, रूस तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्र/सरकार प्रमुखों ने भाग लिया।
  • इस सम्मेलन में सदस्य देशों ने पर्यावरण एवं ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य मुद्दे एवं सर्वव्यापी महामारी, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, आसियान कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग एवं व्यापार, खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर वक्तव्य जारी किया गया।
  • इसके साथ ही 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, 2019 के थाईलैंड में आयोजित होने की घोषणा की।
  • आसियान सम्मेलन में भारत
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगापुर गणराज्य के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग के निमंत्रण पर 14-15 नवंबर, 2018 के मध्य सिंगापुर की यात्रा की।
  • इस दौरान उन्होंने आसियान-भारत नाश्ता सम्मेलन, 13वें पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP : Regional Comprehensive Economic Partnership) शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
  • आरसीईपी को अंतिम रूप देने के लिए चल रहे मौजूदा वार्तालाप में हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री ने आरसीईपी के द्वितीय शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
  • उल्लेखनीय है कि आरसीईपी प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता है, जिसके लिए वर्तमान में 16 देशों-दस आसियान सदस्य देश, भारत, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड और कोरिया गणराज्य के मध्य वार्ता चल रही है।
  • वर्ष 2012 में इस वार्ता के शुरू होने के बाद इस वर्ष वार्ता में संतोषजनक वृद्धि देखी गई एवं वर्ष 2019 तक इसे अंतिम रूप प्राप्त होने की संभावना है।
  • अंतिम रूप मिलने के बाद इस समझौते में विश्व की आबादी का 45 प्रतिशत, वैश्विक व्यापार का 40 प्रतिशत और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 34 प्रतिशत भाग शामिल होगा। यह 21.3 खरब अमेरिकी डॉलर के बराबर होगा।
  • 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिनटेक महोत्सव में मुख्य अभिभाषण दिया और वे ऐसा करने वाले प्रथम शासनाध्यक्ष बने।
  • इसी दिन प्रधानमंत्री ने अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और सिंगापुर की नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित भारत-सिंगापुर हैकथॉन के विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया।
  • प्रधानमंत्री ने एपिक्स का भी शुभारंभ किया। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से आसियान वित्तीय संस्थाएं, नवप्रवर्तक और प्रयोक्ता भारतीय प्रयोक्ताओं के साथ जुड़ेगी।
  • इसके उपरांत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन, थाईलैंड के प्रधानमंत्री जनरल प्रत्युत चान-ओ-चा तथा यूएस के उपराष्ट्रपति माइक पेंस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
  • इसके अलावा भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने एक चतुष्कोणीय क्वाड (Quad) बैठक की।
  • निष्कर्ष

   रणनीतिक साझेदार के रूप में भारत और आसियान के मध्य गहरे व्यापारिक और आर्थिक संबंध हैं। वर्ष 2017-18 में भारत और आसियान के बीच का व्यापार 81.33 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर था, जो भारत के कुल व्यापार का 10.58 प्रतिशत भाग था। आसियान देशों को किया गया निर्यात भारत के कुल निर्यात का 11.28 प्रतिशत है। इसके अलावा भारत और आसियान के बीच विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित और विभिन्न स्तरों पर कार्यरत 30 वार्ता तंत्र हैं, जिनके बीच नियमित वार्तालाप होता है। इनमें विदेश मामलों, रक्षा, वाणिज्य, कृषि, पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा और दूरसंचार पर केंद्रित एक शिखर सम्मेलन और 7 मंत्रिस्तरीय बैठकें शामिल हैं। भारत और आसियान के मध्य प्रगाढ़ होते संबंधों ने भारत एवं आसियान के लिए नई उम्मीदें एवं आकांक्षाओं को जागृत कर दिया है। आसियान के साथ घनिष्ठता न केवल भारत के आर्थिक हितों को पूर्ण करेगी अपितु पड़ोसी राष्ट्रों जैसे चीन की भारत के प्रति विद्वेषपूर्ण नीतियों का मुकाबला करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

लेखक-ललिन्द्र कुमार