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स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत रिपोर्ट

  • पृष्ठभूमि
  • पिछले कुछ दशकों में भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक वृद्धि दर्ज की है, लेकिन देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में इसके अनुरूप प्रगति नहीं हो सकी है।
  • वर्ष 1991 से 2015 के बीच भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ प्रमुख सुधार किए, जैसे जन्म पर जीवन प्रत्याशा में लगभग 10 वर्षों की वृद्धि हुई, नवजात शिशु मृत्यु दर (IMR) घटकर आधे से भी कम हो गई, तथा मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में 60 प्रतिशत से भी अधिक की कमी दर्ज की गई।
  • इसी दौरान, गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases) व्यस्कों में रुग्णता एवं मृत्यु के मुख्य कारण के रूप में उभर कर सामने आए हैं और ये देश में होने वाली लगभग 62 प्रतिशत मृत्यु के लिए उत्तरदायी हैं।
  • स्वास्थ्य से संबंधित सतत विकास लक्ष्य
  • संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा स्वीकार किए गए 17 सतत विकास लक्ष्यों में से लक्ष्य-3 सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए स्वस्थ जीवन को सुनिश्चित करने और उनके कल्याण को बढ़ावा देने से संबंधित है।
  • विश्व के अन्य देशों सहित भारत ने भी सतत विकास लक्ष्यों को अंगीकृत करने हेतु अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
  • सतत विकास लक्ष्यों के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूर्ण करने के लिए देश के प्रयासों की रूपरेखा तैयार करने हेतु नीति आयोग नोडल एजेंसी है।
  • स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट
  • 9 फरवरी, 2018 को नीति आयोग द्वारा नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में एक व्यापक स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट जारी की गई।
  • इस रिपोर्ट का शीर्षक है, ‘‘स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’’ (Healthy States, Progressive India)।
  • रिपोर्ट का विवरण
  • विश्व बैंक के तकनीकी सहयोग तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के परामर्श से इस रिपोर्ट को नीति आयोग द्वारा विकसित किया गया है।
  • स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्र के निष्पादन (Performance) की विविधता एवं जटिलता को समझने एवं उसका मापन करने के लिए एक वार्षिक ‘सुव्यवस्थित साधन’ (Systematic Tool) के विकास हेतु यह देश में प्रथम प्रयास है।
  • इस रिपोर्ट में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्वास्थ्य परिणामों में उनके वर्ष-दर-वर्ष वृद्धिमान परिवर्तन (Incremental Change) के साथ-साथ समग्र प्रदर्शन के आधार पर भी रैंक (Rank) प्रदान की गई है।
  • यह सूचकांक 23 संकेतकों (Indicators) पर आधारित है, जिनका प्रयोग कंपोजिट सूचकांक स्कोर की गणना कर समग्र प्रदर्शन रैंक तथा वृद्धिमान रैंक तैयार करने के लिए किया गया है।
  • राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन में वार्षिक वृद्धिमान परिवर्तन के मापन के लिए दो समयावधियों यथा आधार वर्ष (Base Year) तथा संदर्भ वर्ष (Reference Year) के आंकड़ों पर विचार किया गया है।
  • आधार वर्ष, 2014-15 के दौरान जबकि संदर्भ वर्ष, 2015-16 के दौरान राज्यों के प्रदर्शन को कवर करता है।
  • वृद्धिमान रैंक इन दो समयावधियों के मध्य प्रदर्शन में अंतर (Difference) की माप है।
  • समान तत्वों के मध्य तुलना को सुनिश्चित करने के लिए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को निम्न तीन श्रेणियों में रैंक प्रदान की गई है :- (i) बड़े राज्य, (ii) छोटे राज्य तथा (iii) केंद्र शासित प्रदेश।
  • परिणाम
  • बड़े राज्यों में समग्र प्रदर्शन के आधार पर केरल (स्कोर : 76.55), पंजाब (स्कोर : 65.21) तथा तमिलनाडु (स्कोर : 63.38) प्रथम तीन स्थानों पर हैं।
  • संदर्भ वर्ष 2015-16 में, बड़े राज्यों में, उत्तर प्रदेश (स्कोर : 33.69) का स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदर्शन सबसे खराब (Poorest) रहा और उसे अंतिम (21वीं) रैंक हासिल हुई।
  • आधार वर्ष से संदर्भ वर्ष के दौरान कुल 21 बड़े राज्यों में से केवल 5 राज्यों  की स्थिति (रैंक) में सुधार हुआ है।
  • ये पांच राज्य हैं :-(i) पंजाब, आंध्र प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ तथा झारखंड।
  • कंपोजिट स्वास्थ्य सूचकांक स्कोर में वृद्धि के बावजूद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश की रैंकिंग में आधार वर्ष एवं संदर्भ वर्ष के मध्य कोई बदलाव नहीं हुआ है।
  • वार्षिक वृद्धिमान प्रदर्शन के संदर्भ में बड़े राज्यों में झारखंड, जम्मू एवं कश्मीर तथा उत्तर प्रदेश क्रमशः प्रथम तीन स्थानों पर रहे।
  • आधार वर्ष से संदर्भ वर्ष के दौरान झारखंड के स्वास्थ्य सूचकांक स्कोर में 6.87 अंकों की वृद्धि, जम्मू एवं कश्मीर के स्कोर में 6.83 अंकों की वृद्धि तथा उत्तर प्रदेश के स्कोर में 5.55 अंकों की वृद्धि हुई।
  • छोटे राज्यों में, समग्र प्रदर्शन के आधार पर मिजोरम (स्कोर : 73.70) रैंकिंग में प्रथम स्थान पर रहा।
  • इसके बाद मणिपुर (स्कोर : 57.78) दूसरे तथा मेघालय (स्कोर : 56.83) तीसरे स्थान पर रहा।
  • वार्षिक वृद्धिमान प्रदर्शन के संदर्भ में, छोटे राज्यों में क्रमशः मणिपुर (स्कोर में 7.18 अंकों की वृद्धि), गोवा (स्कोर में 6.67 अंकों की वृद्धि) तथा मेघालय (स्कोर में 5.43 अंकों की वृद्धि) प्रथम तीन स्थानों पर रहे।
  • केंद्र शासित प्रदेशों में, लक्षद्वीप समग्र प्रदर्शन एवं वार्षिक वृद्धिमान प्रदर्शन दोनों ही दृष्टि से प्रथम स्थान पर रहा।
  • निष्कर्ष
  • इस रिपोर्ट के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों को भिन्न-भिन्न स्वास्थ्य संकेतकों में उनके प्रदर्शन का विस्तृत विवरण उपलब्ध हो सकेगा। इससे राज्य यह जान सकेंगे कि किन क्षेत्रों में उनके प्रदर्शन में सुधार या गिरावट हुई है। इस प्रकार राज्य स्वास्थ्य से संबंधित उन विशिष्ट क्षेत्रों को चिह्नित कर सकेंगे, जहां अतिरिक्त प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा