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स्वच्छ ऊर्जा के लिए प्रौद्योगिकी लूप

  • वर्तमान परिदृश्य
  • 22 Òरवरी, 2018 को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन द्वारा बंगलुरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science-IISc) परिसर में उत्कृष्ट सूक्ष्म कार्बन डाइऑक्साइड ब्रेटन चक्र परीक्षण लूप सुविधा (Super critical Carbon dioxide brayton test loop facility) का उद्घाटन किया गया।
  • उद्देश्य
  • सूक्ष्म कार्बन डाइऑक्साइड ब्रेटन चक्र परीक्षण लूप तकनीकी द्वारा सौर ताप ऊर्जा संयंत्र समेत भविष्य के अन्य ऊर्जा संयंत्रों से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकेगा।
  • स्वच्छ ऊर्जा का तात्पर्य ऐसी ऊर्जा उत्पादन इकाइयों से है जिससे जलवायु (Climate) पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • स्थापना
  • इस अवसर पर भारतीय विज्ञान संस्थान में ऊर्जा अनुसंधान के लिए भारत के पहले सुपर क्रिटिकल कार्बन ब्रेटन चक्र आधारित सौर तापीय परीक्षण केंद्र की स्थापना की गई।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • भारत में सूक्ष्म कार्बन डाइऑक्साइड ब्रेटन चक्र परीक्षण लूप तकनीकी अगली पीढ़ी के लिए पहला टेस्ट बेड (Test-Bed) है। इसके माध्यम से प्रभावी, सुगठित एवं जल रहित ऊर्जा उत्पादन में मदद मिलेगी।
  • संभवतः यह विश्व का प्रथम टेस्ट लूप है जिसमें ऊर्जा का स्रोत सौर ताप है।
  • भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के प्रो. प्रदीप दत्ता एवं प्रो. प्रमोद कुमार सूक्ष्म CO2  ब्रेटन चक्र परीक्षण लूप प्रौद्योगिकी के विकास में शामिल हैं।
  • इस प्रौद्योगिकी के आधारित संयंत्रों में सुपर क्रिटिकल CO2 को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • सुपर क्रिटिकल (Super Critical) शब्द का उपयोग कार्बन डाइऑक्साइड की सघन अवस्था के लिए किया जाता है। इस अवस्था में CO2 , भाप (Steam) की तुलना में दोगुनी सघन होती है।
  • इस प्रौद्योगिकी की मदद से ऊर्जा रूपांतरण की दक्षता (efficiency) को 50 प्रतिशत या उससे अधिक बढ़ा सकते हैं।
  • ऊर्जा उत्पादक संयंत्रों में यह प्रौद्योगिकी कार्बन फुट-प्रिंट को कम करने में सहायता कर सकती है।
  • किसी एक संस्था या उत्पाद द्वारा किया जाने वाला कुल कार्बन उत्सर्जन ही उसका कार्बन फुट-प्रिंट (Carbon foot print) कहलाता है।

लेखक-प्रभात सिंह