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स्क्रब टाइफस : पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन्सेफेलाइटिस का कारक

Scrub Typhus: Insefalitis Factor in Eastern Uttar Pradesh
  • वर्तमान संदर्भ
  • 8 अगस्त, 2018 को प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘द हिंदु’ द्वारा बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में इन्सेफेलाइटिस पीड़ितों पर पिछले तीन वर्षों में किए गए एक अध्ययन (study) को प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन में इन्सेफेलाइटिस के मुख्य कारक के रूप में स्क्रब टाइफस की पुष्टि की गई है।
  • पृष्ठभूमि
  • तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिन्ड्रोम (AES) की पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तथा बस्ती संभागों में सर्वप्रथम पुष्टि वर्ष 1978 में हुई।
  • तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिन्ड्रोम (AES) विशिष्ट मौसमी बीमारी है जिसका प्रकोप प्रायः अगस्त से अक्टूबर माह में होता है।




  • इस सिन्ड्रोम में मरीज को तेज बुखार के साथ उसकी मानसिक स्थिति में बदलाव यथा भ्रम, विचलन, कोमा इत्यादि का अनुभव होता है।
  • प्रायः बच्चे इस सिन्ड्रोम से अत्यधिक प्रभावित होते हैं क्योंकि उनका प्रतिरक्षण तंत्र अत्यधिक कमजोर होता है।
  • इन्सेफेलाइटिस के बदलते आयाम
  • प्रारंभ में जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु (JEV) को तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिन्ड्रोम (AES) का मुख्य कारक माना गया था।
  • ध्यातव्य है कि जे.ई.वी. का वाहक क्यूलेक्स प्रजाति का मच्छर है।
  • भारत सरकार द्वारा इसकी रोकथाम के लिए वर्ष 2006 से इन क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान चलाए गए तथा वर्ष 2011 से जे.ई.वी. (JEV) टीके को ‘नियमित प्रतिरक्षा कार्यक्रम’ (DPT/OPV) का अंग घोषित किया गया।
  • अगस्त, 2014 में ‘मणिपाल सेंटर फॉर वाइरस रिसर्च’ कर्नाटक द्वारा स्क्रब टाइफस को इन्सेफेलाइटिस के मुख्य कारक के रूप में घोषित किया गया।




  • वर्ष 2015 में चेन्नई के ‘नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी’ के निदेशक के नेतृत्व में विशेषज्ञ दल द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि 63 प्रतिशत इन्सेफेलाइटिस पीड़ितों में स्क्रब टाइफस मुख्य भूमिका में है, जबकि जापानी इन्सेफेलाइटिस विषाणु (JEV) मात्र 10 प्रतिशत मामलों के लिए उत्तरदायी है।
  • स्क्रब टाइफस
  • स्क्रब टाइफस एक संक्रामक बीमारी है जो ‘ओरिएन्शिया सुसुगामुशी’ नामक जीवाणु के संसर्ग से होती है।
  • इस जीवाणु का वाहक आर्थोपोडा संघ के ट्राम्बिक्युलिड कुल से संबंधित एक कीट है जिसे ‘चिग्गर’ कहते हैं।
  • यह तथा चेन्नई के ‘वेक्टर कंट्रोल रिसर्च सेंटर’ (VCRC) द्वारा किया गए एक अध्ययन के दौरान प्रकाश में आई।
  • इस अध्ययन को जुलाई, 2018 में ‘वेक्टर बार्न एवं जूनोटिक डिसीजेज’ में प्रकाशित किया गया था।
  • इस अध्ययन में पाया गया कि अगस्त से अक्टूबर के दरम्यान चूहे, गिलहरी आदि कृदंत जानवरों के ट्राम्बिक्युलिड कीटों द्वारा संक्रमण बढ़ जाता है, यही कारण है कि मानसून के दौरान स्क्रब टाइफस की घटनाओं में वृद्धि हो जाती है।
  • सुसुगामुशी त्रिभुज
  • स्क्रब टाइफस तथाकथित ‘सुसुगामुशी त्रिभुज’ क्षेत्र की स्थानिक (Endemic) बीमारी है।
  • इस त्रिभुजाकार क्षेत्र को ‘कीट द्वीप’ की संज्ञा से भी अभिहित किया जाता है।
  • यह उत्तर में रूस के दक्षिणी भाग-पूर्व में जापान तथा दक्षिण में ऑस्ट्रेलिया से लेकर दक्षिण पूर्व एशिया तथा पूर्वी एशिया तक विस्तारित एक त्रिभुजाकार क्षेत्र है।
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश में संचरण के कारण
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तथा बस्ती संभाग हिमालय की तराई में अवस्थित होने के कारण कीट-अनुकूल जलवायु के साथ दूर-दूर तक फैले धान के खेत, सिंचाई नहरों, बंजर जमीनों में छोटे-छोटे तालाब इत्यादि प्रचुर मात्रा में लार्वा आवास प्रदान करते हैं।




  • सुअर तथा कृन्तक जानवर यथा चूहे, गिलहरी इत्यादि इस जीवाणु (ओरिएन्शिया सुसुगामुशी) के भंडार गृह है।
  • जंगलों के अन्धाधुन्ध कटाव से कीट अब शहरों की तरफ भाग रहे हैं तथा झाड़ियों एवं घास-फूस को अपना आवास बना रहे हैं। अतः पार्कों में टहलते हुए या योगा करते हुए या अन्य मनोरंजक क्रिया-कलापों के दौरान ये कीट शरीर में चिपक जाते हैं तथा स्क्रब टाइफस का कारण बनते हैं।
  • घर के आप-पास घास-फूस एवं स्वच्छता पर ध्यान न देना भी स्क्रब टाइफस का कारण बन सकता है।
  • उपचार
  • यद्यपि स्क्रब टाइफस की पहचान सुनिश्चित करना सुदूरवर्ती स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं के अभाव में आसान नहीं है तथापि विशेषज्ञों का मानना है कि सभी संदिग्ध टाइफस पीड़ितों को ‘डाक्सीसायक्लिन’ की खुराक देकर मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
  • बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में तीव्र इन्सेफेलाइटिस सिन्ड्रोम (AES) से पीड़ित मरीजों पर एक अध्ययन के दौरान सभी पीड़ितों को ‘एजीथ्रोमाइसिन’ दवा दी गई जिसके फलस्वरूप 35 प्रतिशत गैर-स्क्रब टाइफस पीड़ितों की मृत्यु हो गई, जबकि स्क्रब पीड़ितों की मात्र 15 प्रतिशत मृत्यु हुई। इससे इस दवा के कारगर होने की पुष्टि होती है।
  • ध्यातव्य है कि स्क्रब टाइफस के उपचार के लिए अभी तक किसी टीके का विकास नहीं किया जा सका है।
  • स्क्रब टाइफस शब्द में स्क्रब का अर्थ झाड़ी है क्योंकि इस रोग का वाहक झाड़ियों में छिपा होता है।
  • टाइफस शब्द ग्रीक भाषा का शब्द है जिसका अर्थ ‘मूर्छायुक्त बुखार’ (fever with stupor) है।
  • सुसुगामुशी जापानी भाषा का शब्द है जिसमें सुसुगा का अर्थ ‘छोटा एवं खतरनाक’ तथा मुंशी का अर्थ ‘कीट’ है।
  • आर्थ्रोपोडा संघ (सन्धिपाद) प्राणी जगत का सबसे बड़ा संघ है।
  • इनका जीवन चक्र मुख्यतः चार अवस्थाओं से गुजरता है यथा- अण्डा, लार्वा, प्यूपा तथा वयस्क लार्वा अवस्था ही संक्रमण के संचार के लिए मुख्यतः उत्तरदायी होते हैं।
  • तिलचट्टा, मच्छर, मक्खी, गोजर, झींगा, केकड़ा, चिग्गर आदि इस संघ के प्रमुख जन्तु हैं।

लेखक-राजन शुक्ला