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सेशेल्स के राष्ट्रपति की भारत-यात्रा

August 3rd, 2018
Seychelles President's visit to India
  • सेशेल्स : स्थिति
  • सेशेल्स अफ्रीकी देश केन्या के तट से पूर्व में 1600 किमी. दूर हिंद महासागर में अवस्थित है। इसकी 90 प्रतिशत जनसंख्या इसके सबसे बड़े ‘माहे’ द्वीप पर निवास करती है। मानचित्र पर भारत एवं सेशेल्स के मध्य केवल हिंद महासागर की विशाल जलराशि है।
  • हिंद महासागर में बढ़ती रुचि
  • हिंद महासागर में अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की दिनोंदिन बढ़ती रुचि के दृष्टिगत यह जरूरी है कि इस क्षेत्र में भारत की एक सदृढ़ नौसैन्य योजना हो। हिंद महासागर में विदेशी नौसैन्य गतिविधियों के प्रभावी पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण के लिए इस क्षेत्र के द्वीप-देशों से मैत्रीपूर्ण संबंध अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
  • सेशेल्स भी है महत्वपूर्ण
  •  वर्ष 2007 में मेडागास्कर में स्थापित भारतीय निगरानी चौकी के अतिरिक्त हिंद महासागर के 2 अन्य द्वीपों – मॉरीशस  में  अगेलेगा (Agalega) एवं सेशेल्स में एजम्पशन (Assumption) को भारतीय नौसैन्य रणनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों के रूप में चिह्नित किया गया है।
  • भारत – फ्रांस – सेशेल्स त्रिकोण
  •  भारत-सेशेल्स संबंधों से एक कोण फ्रांस का भी है। भारत-फ्रांस सामुद्रिक सहयोग हाल के दिनों में काफी बढ़े हैं। एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं के प्रयोग की अनुमति एवं अपने नौसैन्य अड्डों को युद्धपोतों के लिए परस्पर खोलने से संबंधित समझौते ने भारत-फ्रांस संबंधों में खासा इजाफा किया है। फ्रांस के साथ सेशेल्स के ऐतिहासिक संबंध हिंद महासागर में भारत-फ्रांस-सेशेल्स के मध्य सामुद्रिक साझेदारी के नए आयाम खोलते हैं।
  • सद्यः यात्रा
  •  भारत-सेशेल्स के मध्य स्त्रातजिक संबंधों की उपयोगिता के आलोक में 22-27 जून, 2018 के मध्य सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति डैनी फौरे की 6 दिवसीय भारत यात्रा संपन्न हुई।
  • प्रगाढ़ संबंधों की परंपरा
  • भारत-सेशेल्स संबंध केवल स्त्रातजिक एवं अन्य MoU तक सीमित नहीं रहे हैं। भारतीय परंपरा के अनुरूप उपहारों का भी आदान-प्रदान हुआ है। भारत ने सेशेल्स को इसी यात्रा के दौरान दूसरा डोर्नियर विमान उसके राष्ट्रीय दिवस 29 जून को सौंप दिया। इसके पहले एक ऐसा ही विमान भारत, सेशेल्स को दे चुका है। सेशेल्स के राष्ट्रपति ने अपनी इस यात्रा के दौरान ही भारत को दो बड़े अल्द्राबा कछुए भेंट में दिए। इन कछुओं की विशेषता इनकी दीर्घायु (300 वर्ष) है। सेशेल्स से ऐसे कछुए भारत पहले भी प्राप्त कर चुका है।
  • समझौते
  • सेशेल्स के राष्ट्रपति डैनी फौरे की सद्यः यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुछ समझौते हस्ताक्षरित हुए, जो इस प्रकार हैं-
  1. लघु विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए भारतीय अनुदान सहायता के संबंध में एम.ओ.यू.। ये परियोजनाएं स्थानीय निकायों, शैक्षणिक एवं स्वरोजगार संस्थानों के माध्यम से क्रियान्वित की जाएंगी।
  1. पणजी (भारत) एवं विक्टोरिया (सेशेल्स) नगर निगमों के बीच मित्रता तथा सहयोग स्थापना पर युग्म समझौता।
  2. इंडियन कंप्यूटर रिसपॉन्स टीम (CERT-in) तथा सेशेल्स के सूचना संचार प्रौद्योगिकी के बीच साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर एम.ओ.यू.।
  3. वर्ष 2018-2022 के लिए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम।
  4. भारतीय नौसेना तथा सेशेल्स के राष्ट्रीय सूचना सहभागिता और समन्वय केंद्र के बीच ‘व्हाइट शिपिंग इंफॉर्मेशन’ पर तकनीकी समझौता।
  •  नोट : वाणिज्यिक जहाजों का कलर कोड  ‘व्हाइट’, सैन्य जहाजों का ‘ग्रे’ तथा अवैध जहाजों का कोड ‘ब्लैक’ है। वाणिज्यिक जहाजों से संबंधित सूचनाओं का अग्रिम आदान-प्रदान समझौता ‘व्हाइट शिपिंग एग्रीमेंट’ कहलाता है।
  1. भारत के विदेश सेवा संस्थान और सेशेल्स के विदेश मंत्रालय के बीच एम.ओ.यू.।
  • लेन-देन ही नहीं विश्वासवर्धन भी
  •  सेशेल्स के साथ हमारा सहयोग परस्पर विश्वास पर ही आधारित होगा। प्रधानमंत्री ने उस ‘एजम्पशन द्वीप परियोजना’ पर एक-दूसरे के हितों के आधार पर मिलकर कार्य करने का आश्वासन दिया, जिस पर सेशेल्स के विपक्षी दलों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की राष्ट्रीय प्राथमिकता की परियोजनाओं के लिए प्रभावी योगदान को जारी रखने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। इन परियोजनाओं से न केवल सेशेल्स की अर्थव्यवस्था बेहतर होगी बल्कि इससे हमारे आपसी संबंध भी कई गुना प्रगाढ़ होंगे।
  • एजम्पशन आइसलैंड प्रोजेक्ट
  • भारत एवं सेशेल्स के बीच ‘एजम्पशन द्वीप’ पर संयुक्त सैन्य सुविधा के निर्माण एवं संचालन संबंधी समझौता वर्ष 2015 में हस्ताक्षरित हुआ था। भारत के सहयोग से निर्मित तट निगरानी रडार प्रणाली वर्ष  2016 से ऑपरेशनल हो चुकी है। एजम्पशन द्वीप पर निर्माण एवं विकास से संबंधित परियोजना का वहां के विपक्षी दल इस आधार पर विरोध कर रहे हैं कि इससे इस क्षेत्र में भारत-चीन क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। इस संबंध में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि ‘एजम्पशन आइसलैंड प्रोजेक्ट’ दोनों देशों की एक संयुक्त परियोजना है और इसे सेशेल्स सरकार के अनुरोध पर क्रियान्वित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सेशेल्स के ‘अनन्य आर्थिक क्षेत्र’ (EEZ) की सुरक्षा में सहायता प्रदान करना है। यह प्रस्तावित प्रसुविधा सेशेल्स के स्वामित्व में होगी और प्रबंधन संयुक्त रूप से किया जाएगा।
  • सुरक्षा चिंताएं
  • समुद्र तटवर्ती देशों के गहरे समुद्र स्थित पत्तनों के विकास में चीन की संलग्नता इस दिशा में भारतीय जागरूकता का विषय है। जिबूती  में चीन द्वारा स्थापित उसके प्रथम सैन्य अड्डे (2017 में) के बाद श्रीलंका के हम्बनटोटा पत्तन का अधिग्रहण भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाता है। लेकिन सेशेल्स के साथ भारत के संबंध चीन के अन्य द्वीप देशों के साथ संबंधों जैसे नहीं हैं। दोनों देशों ने वर्ष 2003 में ही एक सैन्य सहयोग एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किया था। भारत लगातार सेशेल्स की समुद्री क्षमताओं के संवर्धन में सहयोग प्रदान कर रहा है। इसके लिए सेशेल्स को हेलीकॉप्टर, समुद्र निगरानी विमान एवं पेट्रोलिंग नौकाएं अनुदान में दी गई हैं। केंद्रीय सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि हिंद महासागर के देशों के साथ भारत के सहयोग की नीति इसके ‘सागर’ (SAGAR-Security and Growth for All in the Region) पहल का हिस्सा है। इस नीति के विजन में- ‘विश्वास एवं पारदर्शी वातावरण’, ‘अंतरराष्ट्रीय सामुद्रिक नियमों एवं मानदंडों का सभी द्वारा सम्मान’, ‘एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता’, ‘सामुद्रिक सुरक्षा मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान’ और ‘सामुद्रिक सहयोग संवर्धन’ शामिल हैं। भारत-सेशेल्स संबंध भी इसी नीति से प्रेरित हैं।
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