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सेवा भोज योजना

July 25th, 2018
Seva Bhoj Yojana
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा एक नई योजना ‘सेवा भोज योजना’ (Seva Bhoj Yojana) शुरू की गई है।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 और वर्ष 2019-20 के लिए योजना का कुल परिव्यय 325 करोड़ रुपये का होगा।
  • यह एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
  • उद्देश्य
  • योजना के तहत ‘चैरिटेबल धार्मिक संस्थानों’ द्वारा विशिष्ट अनिर्मित खाद्य वस्तुओं की खरीद पर प्रदत्त केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) और एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) के केंद्र सरकार के हिस्से को लोगों को निःशुल्क भोजन वितरण हेतु भारत सरकार द्वारा वित्तीय सहायता के रूप में प्रतिपूर्ति की जाएगी।
  • विशेषताएं
  • यह योजना व्यक्तियों/श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन प्रदान करने हेतु धार्मिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट अनिर्मित खाद्य वस्तुओं की खरीद पर प्रदत्त केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर और एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर के केंद्र सरकार के हिस्से की प्रतिपूर्ति के लिए है।
  • योजना के तहत पात्र संस्थानों के लिए ही यह योजना लागू होगी।
  • योजना के तहत गुरुद्वारा, मंदिर, धार्मिक आश्रम, मस्जिद, दरगाह, चर्च, मठ, विहार आदि द्वारा दिए जाने वाले निःशुल्क प्रसाद या निःशुल्क भोजन/लंगर/भंडारा को समर्थन दिया जाएगा।
  • योजनांतर्गत वित्तीय सहायता ‘पहले आओ-पहले पाओ’ आधार पर एक वित्तीय वर्ष में इस उद्देश्य हेतु उपलब्ध कोष से दी जाएगी।
  • प्रतिपूर्ति के रूप में वित्तीय सहायता धार्मिक संस्थानों द्वारा घी, खाद्य तेल, चीनी/बुर्रा/गुड़, चावल, आटा/मैदा/रवा/सूजी और दालों पर प्रदत्त वस्तु एवं सेवा कर के लिए प्रदान की जाएगी।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 में खरीद पर प्रतिपूर्ति की जाने वाली केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर और एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर के केंद्र सरकार के भाग की कुल राशि की अधिकतम सीमा वित्तीय वर्ष 2018-19 का 10 प्रतिशत होगी।
  • वित्तीय सहायता हेतु मानदंड
  • सेवा भोज योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए पात्र संस्थानों में निम्नलिखित संस्थान शामिल होंगे-
  • धार्मिक एवं चैरिटेबल उद्देश्यों हेतु आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12AA के प्रावधानों के तहत पंजीकृत या आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(23BBA) के प्रावधानों के तहत आच्छादित सार्वजनिक ट्रस्ट या सोसाइटी या निगमित निकाय या संगठन या संस्थान; अथवा
  • धार्मिक एवं चैरिटेबल उद्देश्यों हेतु कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 या कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के प्रावधानों के तहत गठित एवं पंजीकृत एक कंपनी; अथवा
  • धार्मिक एवं चैरिटेबल उद्देश्यों हेतु सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत सोसाइटी।
  • उपर्युक्त संस्थानों को भोजन/प्रसाद/लंगर/भंडारा की निःशुल्क एवं परोपकारी वितरण की धार्मिक तथा चैरिटेबल दोनों गतिविधियों में शामिल होना अनिवार्य है।
  • आवेदन के दिन से न्यूनतम विगत तीन वर्षों से निःशुल्क भोजन, प्रसाद एवं लंगर का वितरण कर रहे संस्थान ही वित्तीय सहायता के पात्र होंगे।
  • संस्थानों को एक कैलेंडर माह में न्यूनतम 5000 व्यक्तियों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराना होगा।
  • नामांकन प्रक्रिया
  • सेवा भोज योजना के तहत पात्र धार्मिक संस्थानों का एक बार ही नामांकन होगा।
  • 31 मार्च, 2020 तक संस्कृति मंत्रालय द्वारा पात्र धार्मिक संस्थानों का नामांकन किया जाएगा।
  • सर्वप्रथम धार्मिक संस्थानों को नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • योजना के उद्देश्यों के लिए प्रत्येक राज्य/संघ राज्यक्षेत्र में एक नोडल केंद्रीय कर अधिकारी होगा।
  • वस्तु एवं सेवा कर प्राधिकारियों द्वारा संस्थानों के दावों को प्रमाणित एवं पारित किए जाने के पश्चात संस्थानों को निधि (Fund) जारी की जाएगी।
  • संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों या इसके अधिकृत प्रतिनिधियों द्वारा प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 5 प्रतिशत मामलों का निरीक्षण किया जाएगा।
  • वित्तीय वर्ष 2018-19 के अंत में संस्कृति मंत्रालय द्वारा योजना की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति का मापन किया जाएगा।
  • इकाई/संस्थान के कार्यकारी निकाय के सदस्य अनुदान के दुरुपयोग की वसूली के लिए उत्तरदायी होंगे।

लेखक -नीरज ओझा

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