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सार्वजनिक वितरण प्रणाली का एकीकृत प्रबंधन योजना

May 15th, 2018
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • केंद्र सरकार द्वारा एक नई केंद्रीय क्षेत्र योजना नामतः ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली का एकीकृत प्रबंधन’ (IM -PDS: Integrated Management of Public Distribution System) को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • उद्देश्य
  • इस योजना का उद्देश्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के सार्वजनिक वितरण प्रणाली/पोर्टलों का केंद्रीय प्रणाली/पोर्टलों से एकीकरण, नेशनल पोर्टेबिलिटी का प्रस्ताव और राशन कार्डों/लाभार्थियों का दुहराव रोकना है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • ‘सार्वजनिक वितरण प्रणाली एकीकृत प्रबंधन योजना’ का कार्यान्वयन वर्ष 2018-19 से 2019-20 के मध्य किया जाएगा।
  • नई योजना से खाद्यान्नों के वितरण में अधिक पारदर्शिता एवं दक्षता आएगी।
  • साथ ही फर्जी/नकली राशन कार्डों की पहचान करने वाली व्यवस्था में सुधार होगा।
  • यह योजना सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभार्थियों को अपना निर्धारित खाद्यान्न राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पसंद की उचित मूल्य दुकानों से लेने का विकल्प प्रदान करती है।
  • वर्तमान में आंध्र प्रदेश, हरियाणा एवं दिल्ली ने राज्य स्तर पर पोर्टेबिलिटी की शुरुआत की है।
  • कर्नाटक, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं तेलंगाना ने राज्य के भीतर कुछ उचित मूल्य दुकानों में पोर्टेबिलिटी की शुरुआत की है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • वर्ष 1992 तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली बिना किसी विशिष्ट लक्ष्य के सभी उपभोक्ताओं के लिए एक आम हकदारी की योजना थी।
  • जून, 1992 में देश के 1775 ब्लॉकों में ‘पुनर्गठित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (RPDS) की शुरुआत की गई।
  • जून, 1997 में गरीबों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली’ (TPDS) शुरू की गई थी।

लेखक-नीरज ओझा

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