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समग्र जल प्रबंधन सूचकांक

June 30th, 2018
  • चर्चा में क्यों?
  • जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन में राज्यों के प्रदर्शन के आकलन व उनमें सुधार के साधन उपलब्ध कराने के कारण
  • संबंधित तथ्य
  • समग्र जल प्रबंधन सूचकांक रिपोर्ट को 14 जून, 2018 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और पोतवहन एवं जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा जारी किया गया।
  • इस रिपोर्ट को नीति आयोग द्वारा विकसित किया गया।
  • सूचकांक में वर्ष 2016-17 के लिए गुजरात को प्रथम, मध्य प्रदेश को द्वितीय तथा आंध्र प्रदेश को तृतीय स्थान मिला। कर्नाटक व महाराष्ट्र क्रमशः चौथे व पांचवें स्थान पर हैं।
  • पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों में वर्ष 2016-17 के लिए त्रिपुरा को प्रथम स्थान मिला। इसके बाद हिमाचल प्रदेश, सिक्किम व असम का स्थान रहा।
  • वृद्धि संबंधी बदलाव के संदर्भ में राजस्थान को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में त्रिपुरा पहले स्थान पर रहा।
  • सूचकांक में राज्यों को दो विशेष समूहों ‘पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्य’ तथा ‘अन्य राज्य’ में बांटा गया है।
  • गैर-हिमालयी राज्यों में झारखंड को सबसे निचला स्थान दिया गया है। इसके पश्चात हरियाणा, उत्तर प्रदेश व बिहार का स्थान है।
  • पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों में मेघालय सबसे निचले स्थान पर है।
  • समग्र जल प्रबंधन सूचकांक में 9 पैरामीटर और 28 संकेतक शामिल हैं। इनमें सिंचाई, भूजल, जल निकायों का बहाली, कृषि पद्धतियों, पेयजल, नीति व शासन से संबंधित विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।
  • सूचकांक की मदद से उन राज्यों पर दबाव बनाने में मदद मिलेगी, जिन्होंने अपनी जल प्रबंधन तकनीकों में सुधार करने के लिए अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है।
  • यह रिपोर्ट देश में गंभीर जल संकट की ओर इंगित करती है। रिपोर्ट के अनुसार, 60 करोड़ लोग जल समस्या से जूझ रहे हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिवर्ष 2 लाख लोगों की स्वच्छ जल के अभाव में मृत्यु हो जाती है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग, आपूर्ति की तुलना में दोगुना हो जाने का भी अनुमान है।

लेखक-धीरेन्द्र त्रिपाठी 

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