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संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना

  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा इस योजना की कार्य अवधि में वृद्धि किए जाने के कारण यह योजना चर्चा में है। समिति ने इस योजना ‘संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना’ (MPLADS: Member of Parliament Local Area Development Scheme) को 14वें वित्त आयोग की कार्य अवधि (31 मार्च, 2020) तक जारी रखने की स्वीकृति दे दी है।
  • पृष्ठभूमि
  • संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1993-94 में प्रारंभ की गई थी। यह योजना संसद सदस्यों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में पेयजल, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सड़कों जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थानीय रूप से महसूस की गई आवश्यकताओं के आधार पर टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों के सृजन के लिए सिफारिश करने में समर्थ बनाती है। यह योजना कुछ दिशा-निर्देशों द्वारा संचालित की जाती है, जिसे अंतिम बार जून, 2016 में संशोधित किया गया। योजना प्रारंभ होने के बाद से अगस्त, 2017 तक एमपी लैड्स (MPLADS) निधियों से 44,929.17 करोड़ रुपये के कुल कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
  • योजना का प्रभाव
  • संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत पेयजल, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा सड़कों जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आवश्यक आवश्यकताओं के आधार पर टिकाऊ परिसंपत्तियों के सृजन से देश की संपूर्ण आबादी को लाभ मिलेगा।
  • एमीपी लैड्स योजना के फलस्वरूप ऐसी विभिन्न टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का सृजन किया गया है, जिन्होंने स्थानीय समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन को किसी न किसी रूप में प्रभावित किया है।
  • विवरण
  • इस योजना को 3950 करोड़ रुपये के वार्षिक आवंटन तथा 11850 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ अगले 3 वर्षों तक जारी रखा जाएगा।
  • साथ ही स्वतंत्र एजेंसी (एजेंसियों) के माध्यम से निगरानी तथा मंत्रालय द्वारा राज्य/जिला स्तर पर अधिकारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि करने/उन्हें दिए जाने वाले प्रशिक्षण के प्रयोजनार्थ योजना में 5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है।
  • एमपी लैड्स की निधियां नोडल जिला प्राधिकारियों को आवश्यक दस्तावेजों के प्राप्त होने तथा एमपी लैड्स संबंधी दिशा-निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार जारी रखी जाती है।

लेखक शिवशंकर तिवारी