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वैश्विक पोषण रिपोर्ट, 2018

Global Nutrition Report, 2018
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 29 नवंबर, 2018 को ‘शाइनिंग अ लाइट टू स्पर एक्शन ऑन न्यूट्रिशन’ (Shining A Light To Spur Action on Nutrition) शीर्षक से जारी ‘‘वैश्विक पोषण रिपोर्ट, 2018’’ (Global Nutrition Report, 2018) कुपोषण के सभी प्रारूपों में प्रसार और सर्वव्यापकता को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 5 वर्ष से कम उम्र (0-59 माह) के बच्चों को विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं जैसे ठिगनापन, दुबलापन, मोटापा तथा अल्प वजन आदि का सामना करना पड़ रहा है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इन समस्याओं से ग्रसित कुल बच्चों की संख्या में से 150.8 मिलियन बच्चे ‘ठिगनेपन’ (Stunted), 50.5 मिलियन ‘दुबलेपन’ (Wasted) तथा 38.3 मिलियन बच्चे ‘मोटापे’ (Over Weight) के शिकार हैं, जबकि प्रत्येक वर्ष 20 मिलियन बच्चे ‘अल्प वजन’ (Low Weight) के जन्म ले रहे हैं।
  • वैश्विक स्तर पर ‘बाल ठिगनेपन’ (Child Stunting) की संख्या में भारत शीर्ष पर है, जहां बाल ठिगनेपन की संख्या 46.6 मिलियन है। तत्पश्चात नाइजीरिया 13.9 मिलियन तथा पाकिस्तान 10.7 मिलियन का स्थान है।
  • रिपोर्ट के बारे में
  • ‘वैश्विक पोषण रिपोर्ट’ (Global Nutrition Report) वैश्विक स्तर पर कुपोषण की स्थिति एवं सर्वव्यापकता पर एक अग्रणी रिपोर्ट है, जिसकी परिकल्पना वर्ष 2013 में ‘न्यूट्रीशन फॉर ग्रोथ’ (Nutrition for Growth-N4G) शिखर सम्मेलन में की गई थी। वर्ष 2014 में इस रिपोर्ट का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ था। तब से यह रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष प्रकाशित की जाती है। वर्तमान रिपोर्ट इसका पांचवां संस्करण है।
  • इस रिपोर्ट का उद्देश्य सरकार, समाज तथा अन्य संबंधित लोगों को कुपोषण के सभी रूपों को समाप्त करने हेतु प्रेरित करना है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
  • रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कुल 150.8 मिलियन (22.2%) बच्चे बाल ठिगनेपन (Stunted), 50.5 मिलियन (7.5%) दुबलेपन (Wasted) तथा 38.3 मिलियन (5.6%) बच्चे मोटापे (Over weight) से ग्रसित हैं। जबकि प्रत्येक वर्ष अल्प वजन (Low Weight) वाले बच्चे जन्म  ले रहे हैं।
  • अफ्रीका से उत्तरी अमेरिका तक लगभग 38.9 प्रतिशत वयस्क अधिक वजन और मोटापे से ग्रसित हैं और यह किशोरवय में तेजी से बढ़ रहा है।
  • पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में बाल ठिगनेपन के मामले में वैश्विक स्तर पर गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अफ्रीका में इसकी संख्या में वृद्धि हो रही है। विभिन्न देशों के मध्य बाल ठिगनेपन के स्तर पर इसकी प्रगति में बहुत अधिक असमानता है।
  • वैश्विक स्तर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के बीच बाल ठिगनेपन का स्तर वर्ष 2000 के 32.6 प्रतिशत (198.4 मिलियन) की तुलना में घटकर वर्ष 2017 में 22.2 प्रतिशत (150.8 मिलियन) पर पहुंच गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में बाल ठिगनापन वर्ष 2000 के 38.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2017 में 23.2 प्रतिशत हो गया है। वहीं लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन में यह वर्ष 2000 के 16.9 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2017 में 9.6 प्रतिशत हो गया।
  • इसी अवधि के दौरान अफ्रीका में यह कमी वर्ष 2000 के 38.3 प्रतिशत से घटकर 30.3 प्रतिशत दर्ज की गई है।
  • वैश्विक स्तर पर महिलाओं में कम वजन और एनीमिया की समस्या को हल करने की प्रगति बहुत धीमी रही है।
  • वयस्कों में अधिक वजन तथ मोटापे की समस्या में वृद्धि हुई है। पुरुषों में मोटापे की दर (11.1%) के मुकाबले महिलाओं में मोटापे की उच्च दर (15.1%) पाई गई है।
  • वर्ष 2000 की तुलना में वर्ष 2016 में कम वजन वाली महिलाओं की संख्या में थोड़ी कमी आई है। यह वर्ष 2000 के 11.6 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2016 में 9.7 प्रतिशत (20-49 वर्ष की आयु वर्ग में) तथा 5.7 प्रतिशत किशोरवय लड़कियों (15-19 वर्ष की आयु वर्ग में) में दर्ज की गई है। एनीमिया थोड़ी वृद्धि के साथ 32.8 प्रतिशत हो गया है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के लिए निर्धारित वैश्विक पोषण लक्ष्यों में से कम-से-कम एक लक्ष्य को पूरा करने हेतु 194 देशों में से मात्र 94 देश (50% से भी कम) देश ही निश्चित रूप से अग्रसर हैं, जबकि 44 देश एक लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु तथा 35 देश दो लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु अग्रसर हैं।
  • नए विश्लेषण से इस बात की स्पष्ट रूप से पुष्टि होती है कि कुपोषण के सभी रूप एक-दूसरे से संबद्ध होते जा रहे हैं।
  • अत्यधिक देश कुपोषण के कई सारे प्रारूपों से संघर्ष कर रहे हैं। 144 देशों में किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि 124 देशों (88%) में कुपोषण के एक से अधिक रूपों तथा 41 देशों (29%) में कुपोषण के तीन रूपों का उच्च स्तर बना हुआ है।
  • पांच वर्ष से कम उम्र के 3.62 प्रतिशत (15.95 मिलियन) बच्चे ठिगनेपन तथा दुबलेपन से, जबकि वैश्विक स्तर पर 1.87 प्रतिशत (8.23 मिलियन) बच्चे ठिगनेपन और मोटापे से ग्रसित महसूस कर रहे हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार, कुपोषण को समाप्त करने हेतु प्रतिबद्धताओं में वृद्धि हुई है। फिर भी इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने हेतु अभी एक लंबा मार्ग तय करना होगा।
  • राष्ट्रीय पोषण नीतियों और पोषण लक्ष्यों की संख्या और विस्तार में वृद्धि हुई है लेकिन इन लक्ष्यों को पूरा करने में सबसे अहम चुनौती है वित्तपोषण और कार्रवाई।
  • ऋणदाताओं ने वर्ष 2013 में न्यूट्रिशन फॉर ग्रोथ (N4G) शिखर सम्मेलन में किए गए वित्तपोषण प्रतिबद्धता को पूरा किया है लेकिन विश्व स्तर पर अभी भी वित्तपोषण में भारी कमी है।
  • प्रारंभिक संकेतों से पता चलता है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में सरकारें पोषण पर अधिक घरेलू व्यय कर रही हैं।
  • रिपोर्ट में कुपोषण की समस्या हेतु 5 महत्वपूर्ण कदमों का सुझाव दिया गया है, जो निम्न हैं-
  • कुपोषण के सभी प्रारूपों को समाप्त करने हेतु एकीकृत दृष्टिकोण और एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता।
  • कार्रवाई करने हेतु प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करना तथा आवश्यक डेटा को प्राथमिकता देते हुए निवेश में वृद्धि करना।
  • पोषण कार्यक्रमों हेतु वित्तपोषण में वृद्धि करना और उसमें विविधता लाना।
  • स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने हेतु विश्व भर में स्वस्थ खाद्य पदार्थों को सस्ता किया जाना और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना।
  • कुपोषण के सभी प्रारूपों को समाप्त करने हेतु बेहतर प्रतिबद्धताओं को अपनाना और उन्हें पूरा करने का प्रयास करना। वैश्विक पोषण लक्ष्यों को पूरा करने हेतु एक महत्वाकांक्षी, परिवर्तनीय दृष्टिकोण को अपनाना।
  • वर्ष 2025 तक वैश्विक पोषण हेतु लक्ष्य

   लक्ष्य 1 – पांच वर्ष से कम उम्र के बाल ठिगनेपन में 40 प्रतिशत की कमी लाना।

     लक्ष्य 2 – प्रजनन आयु की महिलाओं में 50 प्रतिशत एनीमिया में कमी लाना।

     लक्ष्य 3 – अल्प वजन जन्म लेने वाले शिशुओं में 30 प्रतिशत की कमी लाना

     लक्ष्य 4 – बचपन में होने वाले मोटापे में वृद्धि न होने देना।

     लक्ष्य 5 – प्रारंभ के 6 माह में विशेष स्तनपान में 50 प्रतिशत की दर से वृद्धि करना

     लक्ष्य 6 – 5 प्रतिशत की दर से बाल दुबलेपन में कमी करना और इस दर को बनाए रखना।

  • तीन देश जहां सर्वाधिक बाल दुबलेपन से बच्चे ग्रसित हैं-
  • भारत (25.5 मिलियन), नाइजीरिया (3.4 मिलियन) तथा इंडोनेशिया (3.3 मिलियन) हैं।

लेखक-शिव शंकर कुमार तिवारी