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वेनेजुएला संकट

Venezuela crisis
  • वर्तमान परिदृश्य
  • विश्व के सबसे बड़ा तेल भंडार वाले दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है।
  • संबंधित तथ्य
  • अत्यधिक मुद्रास्फीति, राजनीतिक अस्थिरता, खाद्य पदार्थों, दवाओं की कमी एवं सरकार के द्वारा नीतियों का उचित ढंग से क्रियान्वयन न करने के कारण लाखों नागरिक देश से बाहर जाने को मजबूर हो गए हैं।
  • गौरतलब है कि वेनेजुएला की जनसंख्या लगभग 32.4 मिलियन है, परंतु आर्थिक संकटों के कारण पिछले तीन-चार वर्षों में लगभग 2.3 मिलियन लोग देश छोड़ चुके हैं।



  • लगभग 26 दिनों में वस्तुओं के दाम दोगुने हो जा रहे हैं।
  • वेनेजुएला के विपक्ष द्वारा नियंत्रित राष्ट्रीय सभा के अनुसार, जुलाई, 2018 में वार्षिक मुद्रास्फीति की दर 83,000 प्रतिशत पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, इस वर्ष के अंत तक वेनेजुएला में मुद्रास्फीति की दर 1 मिलियन प्रतिशत तक होने की संभावना है।




  • वेनेजुएला में तेल की कीमतों में कमी, अमेरिकी एवं यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों तथा वेनेजुएला के पड़ोसी देशों द्वारा साथ न दिए जाने के कारण वेनेजुएला का आर्थिक संकट गहराता ही जा रहा है।
  • वेनेजुएला की आधिकारिक विनिमय दर 1 अमेरिकी डॉलर के सापेक्ष लगभग 248,000 वेनेजुएलाई बोलिवर के बराबर हो गई है।
  • अत्यधिक मुद्रास्फीति एवं वेनेजुएलाई बोलिवर के मूल्य में अत्यधिक कमी होने के कारण वस्तुओं का आयात करना मुश्किल हो गया तथा वस्तुओं की भारी कमी हो गई है।
  • सरकारी प्रयास
  • 20 अगस्त, 2018 को निकोलस मादुरो सरकार ने पुरानी ‘स्ट्रांग बोलिवर’ मुद्रा के स्थान पर ‘सावरेन बोलिवर’ नाम से नए बैंक नोट्स का प्रारंभ किया यह मुद्रा आठ नए बैंक नोट्स (2, 5, 10, 20, 50, 100, 200 एवं 500) और दो नए सिक्कों के साथ शुरू हुई।
  • 1 सितंबर को न्यूनतम मजदूरी में पूर्व मूल्य के सापेक्ष 34 गुना की वृद्धि की गई।




  • सरकार आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए नई ‘सावरेन बोलिवर’ को आभासी मुद्रा पेट्रो से जोड़ेंगे।
  • निष्कर्ष
  • राजनीतिक अस्थिरता, अत्यधिक मुद्रास्फीति, तेल के मूल्य में कमी, अत्यधिक विदेशी ऋण, बेरोजगारी, उत्पादक गतिविधियों के ठप पड़ जाने के कारण एवं विनिमय दर प्रतिकूल हो जाने से तथा अमेरिका, यूरोपीय देशों एवं अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों के द्वारा राजनीतिक खींचतान तथा आर्थिक प्रतिबंधों के चलते वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात उभरी विश्व आर्थिक मंदी से भी बदतर हो गई है।

लेखक-अनुज कुमार तिवारी