Contact Us: 0532-246-5524,25, M: -9335140296 Email: [email protected]

विदेश मंत्री द्वारा तीन मध्य एशियाई देशों की यात्रा

External Affairs Minister visits three Central Asian countries
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • 2 – 5 अगस्त, 2018 के मध्य विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा तीन मध्य एशियाई देशों की यात्रा की गई। वह 2-3 अगस्त को कजाख्स्तान, 3-4 अगस्त को किर्गिस्तान तथा 4-5 अगस्त को उज्बेकिस्तान की यात्रा पर रहीं।
  • विदेश मंत्री यात्रा के पहले चरण में कजाख्स्तान जाते वक्त तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबाद में रुकी और वहां के विदेश मंत्री से द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की गई।
  • उद्देश्य




  • विदेश मंत्री की इस चार दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य मध्य एशियाई देशों में भारत की पहुंच को बढ़ाना है।
  • यात्रा संबंधी तथ्य
  • विदेश मंत्री द्वारा प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में तीनों मध्य एशियाई देशों से रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, पर्यटन, व्यापार और निवेश, सांस्कृतिक प्रदर्शन, संयुक्त फिल्म निर्माण आदि मुद्दों पर चर्चा की गई।
  • विदेश मंत्री द्वारा वर्ष 2018-19 में एससीओ (SCO) की अध्यक्षता करने के लिए किर्गिस्तान को बधाई दी गई साथ ही वर्ष 2019 में किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले एससीओ (SCO) शिखर सम्मेलन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया।
  • उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में विदेश मंत्री द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक स्थल को श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।
  • ध्यातव्य है कि भारत-पाक युद्ध के संबंध में समझौता हेतु तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे थे। 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद समझौता संपन्न हुआ और अगली सुबह 11 जनवरी, 1966 को तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मृत पाए गए। इन्हीं की याद में यहां एक स्मारक स्थल बनाया गया है।




  • विदेश मंत्री द्वारा ताशकंद में दो दिवसीय उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का भी उद्घाटन किया गया।
  • मध्य एशियाई देशों की पृष्ठभूमि
  • वर्तमान के सभी मध्य एशियाई देश वर्ष 1990 से पहले सोवियत संघ के प्रांत थे। वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के पश्चात ये सभी देश आजाद हुए थे।
  • निष्कर्ष




  • मध्य एशिया भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है क्योंकि ऊर्जा संसाधन की दृष्टि से यह क्षेत्र काफी संवृद्धि है। साथ ही निर्यात वृद्धि में भी मदद प्राप्त हो सकती है क्योंकि वर्तमान में भारत और मध्य एशिया के बीच आयात-निर्यात न्यून स्तर पर है।
  • इसी दृष्टिकोण से वर्ष 2015 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांचों मध्य एशियाई देशों (कजाख्स्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, तजाकिस्तान) की यात्रा पर गए थे। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए विदेश मंत्री द्वारा तीन मध्य एशियाई देशों की यात्रा की गई।

लेखक-सचिन कुमार वर्मा