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वाल्मीकि एवं मल्हार भाषाओं की खोज

May 14th, 2018
  • वर्तमान परिप्रेक्ष्य
  • हैदराबाद विश्वविद्यालय (UoH) के ‘लुप्तप्राय भाषा और मातृभाषा अध्ययन केंद्र’ (Center for Endangered Languages and Mother Tongue Studies) के समन्वयक प्रो. पंचानन मोहंती द्वारा वाल्मीकि (Walmiki) और मल्हार (Malhar) भाषाओं की खोज की गई है।
  • महत्वपूर्ण तथ्य
  • प्रो. पंचानन मोहंती द्वारा वाल्मीकि एवं मल्हार भाषाओं की खोज से संबंधित पेपर यूनाइटेड किंगडम में आयोजित ‘लुप्तप्राय भाषाओं हेतु फाउंडेशन’ (Foundation for Endangered Languages) के 20वें वार्षिक सम्मेलन की कार्रवाई में प्रकाशित किया गया।
  • वाल्मीकि भाषा ओडिशा के कोरापुर जिला और आंध्र प्रदेश के समीपवर्ती जिलों में बोली जाती है।
  • वाल्मीकि भाषा विशेष भाषा परिवार से संबंधित नहीं है।
  • वाल्मीकि भाषा बोलने वाला समुदाय स्वयं को महान भारतीय संत कवि वाल्मीकि का वंशज बताता है।
  • मल्हार भाषा भुवनेश्वर से 165 किमी. दूर एक छोटे से क्षेत्र में बोली जाती है।
  • मल्हार भाषा बोलने वाले समुदाय में बच्चों समेत लगभग 75 लोग शामिल हैं।
  • मल्हार भाषा द्रविड़ परिवार की भाषाओं के उत्तर द्रविड़ उपसमूह से संबंधित है।
  • मल्हार भाषा का घनिष्ठ संबंध पश्चिम बंगाल, झारखंड एवं बिहार में बोली जाने वाली अन्य उत्तर द्रविड़ भाषाओं जैसे माल्टो (Malto) और कुरूक (Kurux) से है।
  • उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा लुप्तप्राय जनजातीय और गौण भाषा का दस्तावेज तैयार किया जा रहा है।

लेखक नीरज ओझा 

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