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लोक ऋण रजिस्ट्री

July 25th, 2018
Public Credit Registry
  • वर्तमान संदर्भ
  • 4 अक्टूबर, 2017 को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लोक ऋण संबंधी सूचनाओं के संग्रहण के संदर्भ में लोक ऋण रजिस्ट्री पर आवश्यक सुझाव देने हेतु यशवंत एम. देवस्थली कार्यदल का गठन किया गया था।
  • इस कार्यदल ने 4 अप्रैल, 2018 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें भारत में एक लोक ऋण रजिस्ट्री (PCR : Public Credit Registry) की आवश्यकता पर बल देते हुए इसके परिचालन से संबंधित विविध पक्षों पर संस्तुति प्रस्तुत की गई है।
  • क्या है लोक ऋण रजिस्ट्री?
  • लोक ऋण रजिस्ट्री (पीसीआर) देश के भीतर लिए गए संपूर्ण ऋणों से संबंधित सूचनाओं का एक केंद्रीय डेटाबेस होगा।
  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इसका प्रबंधन किया जाएगा।
  • भारत के सभी कर्जदाताओं एवं कर्जदारों को अपने दिए/लिए गए कर्जों का विवरण कानूनी रूप से अनिवार्यतः लोक ऋण रजिस्ट्री को उपलब्ध कराना होगा।
  • कोई भी हितधारक या कर्जदाता जब चाहे इस डेटाबेस से कर्जदारों की कर्ज संबंधी संपूर्ण सूचना प्राप्त कर सकेगा।
  • पीसीआर की आवश्यकता
  • कर्जदारों के द्वारा लिए गए ऋणों की वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त न हो पाने के कारण ऋण बाजार में पारदर्शिता का अभाव होता है तथा जोखिम युक्त ऋण स्वीकृत किए जाने का जोखिम भी बना रहता है।
  • अपर्याप्त सूचना की प्राप्ति में ऋण प्रदाता को स्वविवेक का अधिकार मिल जाता है जिससे ऋण स्वीकृति के समय कदाचार का जोखिम बना रहता है।
  • व्यवहार में अपर्याप्त सूचना के कारण रसूखदार व्यक्ति (चाहे वो दागी ही क्यों न हो) तो आसानी से ऋण प्राप्त कर लेते हैं, जबकि सामान्य उद्यमी को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इससे समावेशी ऋण का लक्ष्य दूर की कौड़ी ही बना रहता है।
  • ऋण लेने वाले व्यक्ति की वास्तविक स्थिति की जानकारी न हो पाने के कारण ऋणदाता संस्था आवश्यकता से अधिक जमानत की मांग करती है। इससे ऋण संस्कृति नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है।
  • समग्रता से कहा जाए तो ऋण सूचनाओं का अभाव गैर-निष्पादन संपत्तियों में वृद्धि के मूल में है।
  • भारत में ऋण सूचना की वर्तमान प्रणाली
  • वर्तमान भारत में ऋणों के संदर्भ में सूचना ऋण, सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के नियंत्रणाधीन निजी क्रेडिट संस्थाओं द्वारा प्राप्त की जाती है।
  • इनमें ऋण सूचना ब्यूरो (भारत) लिमिटेड (CIBIL), इक्वीफैक्स (Eqifax), एक्सपेरियन (Experian) आदि प्रमुख हैं।
  • परंतु इन संस्थाओं द्वारा प्राप्त सूचनाओं का सामान्यतः खुदरा ऋणों (क्रेडिट कार्ड सहित) हेतु ही प्रयोग किया जाता है।
  • इस संदर्भ में बड़े ऋणों (5 करोड़ रुपये से अधिक) के संबंध में सूचना हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा वर्ष 2014-15 में बड़े ऋणों पर सूचना के लिए केंद्रीय कोष (CRILC : Central Repository of Information on Large Credits) का गठन किया गया।
  • वर्तमान में सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपने बड़े कर्जदारों (5 करोड़ रुपये से अधिक) का विवरण यहां उपलब्ध करवाते हैं।
  • वर्तमान में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की लगभग 60 प्रतिशत सूचना CRILC के दायरे में है।
  • पीसीआर से लाभ
  • एक केंद्रीय ऋण सूचना प्रणाली ऋण बाजार में पारदर्शिता लाएगी, जिससे एक तो सभी लोगों की ऋण तक पहुंच बढ़ेगी और दूसरे इससे आर्थिक कदाचार में कमी आएगी।
  • बैंक ऋण स्वीकृति के समय विश्वासपूर्वक निर्णय कर पाएंगे जिससे गैर-निष्पादन परिसंपत्तियों में कमी आएगी।
  • सूचनाओं की उपलब्धता से बैंक कर्मचारियों की निर्णयन में वस्तुनिष्ठता का समावेश होगा, जो उन्हें जवाबदेह बनाएगा तथा इससे उनकी स्वेच्छाचारिता पर लगाम लगेगी।
  • साख का सृजन जब उद्यमियों के साख व्यवहार के आधार पर होने लगेगा, तो रसूखदार लोगों को प्राथमिकता देने की संस्कृति जाती रहेगी। इससे छोटे उद्यमी भी ऋण प्राप्त कर पाने में सक्षम होंगे। इससे ऋण वितरण अधिक समावेशी होगा।
  • नीति निर्धारकों हेतु सूचनाओं की उपलब्धता मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता में वृद्धि करेगी तथा देश के हित में और सशक्त मौद्रिक नीति का निर्माण किया जा सकेगा।
  • समग्र रूप से लोक ऋण रजिस्ट्री सभी के लिए समान कारोबारी माहौल बनाएगी, जो अंततः तीव्र आर्थिक विकास को अंजाम देगा।

लेखक-विकास कुमार शुक्ल

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